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पीएमटी की तैयारी के दौरान साथी की हत्या की आरोपी डॉक्टर बन गया, सात साल बाद उम्रकैद

2 वर्ष पहले
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आरोपी मोईन खां। - Dainik Bhaskar
आरोपी मोईन खां।
  • माेईन खा और वीरेंद्रसिंह दाेनाें सीकर के एक निजी कोचिंग सेंटर में पीएमटी की तैयारी कर रहे थे
  • न्यायालय ने आरोपी पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया

सीकर. अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-3 यशवंत भारद्वाज ने चिड़ावा के डॉक्टर मोईन खां को सात साल पहले पीएमटी की तैयारी के दौरान साथी वीरेंद्रसिंह की गर्दन मरोड़कर हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा न्यायालय ने आरोपी पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। माेईन खा और वीरेंद्रसिंह दाेनाें सीकर के एक निजी कोचिंग सेंटर में पीएमटी की तैयारी कर रहे थे।


अपर लोक अभियोजक सुभाष कुल्हरी ने बताया कि डॉ. हरजिंद्रपालसिंह निवासी श्रीगंगानगर ने सदर थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी कि साल 2012 में उनका पुत्र 18 वर्षीय वीरेंद्रसिंह निजी कोचिंग में पीएमटी की तैयारी कर रहा था। वह नजदीक ही एक हॉस्टल में रह रहा था। 29 मार्च 2012 को सुबह 11 बजे बेटे वीरेंद्रसिंह की फोन पर मां से बात हुई तो उसने बताया कि पढ़ाई ठीक चल रही है। 11.30 बजे हाॅस्टल इंचार्ज ने फोन पर बताया कि आपका बच्चा बेहोश हो गया, जिसे अस्पताल लेकर जा रहे हैं। हम सरपंच को लेकर अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी।


हॉस्टल वार्डन भूपसिंह ने बताया कि आपके बच्चे की हत्या करके वार्ड नंबर 7 चिड़ावा, झुंझुनूं निवासी मोइन खां पुत्र महमूद अली वहां से भाग गया। हॉस्टल के छात्र योगेश कुमार व रवि ने पुलिस को दिए बयानों में बताया कि वे सब ऊपर की मंजिल पर मेस में खाना खा रहे थे। इस दौरान वीरेंद्र व मोईन खां के बीच झगड़ा हो गया था। मोईन खां ने आवाज देकर वीरेंद्र को नीचे बुलाया और अपने कमरे में ले जाकर उसकी गर्दन मरोड़कर उसकी हत्या कर दी। वीरेंद्र की गर्दन टूटी हुई थी और गर्दन के पीछे निशान थे व शर्ट फटी हुई थी। मोईन खां वहां खड़ा था और वीरेंद्र नीचे पड़ा था। पुलिस ने 16 गवाहों के बयान करवाए और 18 सबूत पेश किए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मृत्यु का कारण गर्दन की चोट की वजह से शॉक के कारण से होना बताया गया।

हंस रहा था आरोपी, जज की टिप्पणी-अभियुक्त के व्यवहार में नहीं दिख रहा पश्चाताप
आरोपी मोईन खां को घटना के दूसरे दिन ही सीकर पुलिस ने चिड़ावा से गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उसने पीएमटी पास कर उदयपुर के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया। एमबीबीएस करीब डेढ़ साल पहले पूरी हुई। इसके बाद पीपीपी मोड़ पर चल रही नूनिया गोठड़ा पीएचसी में छह माह तक संविदा पर प्रैक्टिस की। पीजी में एडमिशन मिलने के चलते उसने यहां से नौकरी छोड़ दी। अब अभियुक्त पीजी कर रहा है।

डेढ़ साल पहले पूरी की एमबीबीएस
अभियुक्त मोईन खां डॉक्टर है और अभी पीजी कर रहा है। उसने झुंझुनूं के नूनिया गोठड़ा में पीपीपी मोड़ पर चल रही पीएचसी में छह माह तक संविदा पर काम भी किया। सजा सुनाने के दौरान मोईन हंस रहा था। न्यायाधीश यशवंत भारद्वाज ने टिप्पणी की है कि सजा सुनने के दौरान किसी प्रकार का पश्चाताप या ग्लानिकारी अभियुक्त के व्यवहार में दर्शित नहीं हो रही है। अभियुक्त किसी भी प्रकार के नरमी के रूख का हकदार नहीं है।

चश्मदीद गवाह मुकर गए थे
मामले में हॉस्टल इंचार्ज भूपसिंह सहित चश्मदीद गवाह पुलिस को दिए गए बयानों से न्यायालय में मुकर गए थे। न्यायालय ने पुलिस के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृतक के पिता व अन्य के बयान, एफएसएल रिपोर्ट, साक्ष्य सहित अन्य चीजें सबूत के रूप में देखीं। वहीं मृतक के गर्दन पर निशान मिले। गर्दन पर निशान गिरने या फिसलने से नहीं लगे। इसके साथ ही अन्य साक्ष्यों को देखते हुए यह सजा सुनाई गई।

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