राजस्थान / सिस्टम नहीं होने से शहर में पेयजल किल्लत, बीसलपुर बांध का 60 दिन से डाउनस्ट्रीम में छोड़ रहे है पानी



Drinking water problem in jaipur due to lack of system
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Drinking water problem in jaipur due to lack of system

  • विभाग के इंजीनियरों ने पिछले तीन महीने में एक भी नए क्षेत्र व कॉलोनी को पेयजल सप्लाई से नहीं जोड़ा
  • अगले छह महीने तक पेयजल सप्लाई में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं

Dainik Bhaskar

Oct 19, 2019, 02:51 PM IST

जयपुर(श्याम राज शर्मा). मानसून की मेहरबानी के बाद बीसलपुर बांध पूरा भर गया। वहीं 60 दिन गेट खोलकर 93 टीएमसी पानी बनास के डाउनस्ट्रीम में छोड़ा गया, लेकिन जलदाय विभाग के इंजीनियरों की लापरवाही के कारण शहर की पेयजल सप्लाई में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। शहर में परफेक्ट सिस्टम नहीं होने के कारण पेयजल सप्लाई व स्टोरेज नहीं हो पा रहा है।

 

विभाग के इंजीनियरों ने पिछले तीन महीने में एक भी नए क्षेत्र व कॉलोनी को पेयजल सप्लाई से नहीं जोड़ा है। वहीं पेयजल प्रेशर में सुधार के लिए मौजूदा सिस्टम की पाइपलाइन भी नहीं डाली है। इससे शहर के चारदीवारी क्षेत्र, शास्त्रीनगर, जवाहर नगर, सांगानेर, सोड़ाला, हसनपुरा, मुरलीपुरा सहित अन्य इलाकों के लोगों को पेयजल किल्लत झेलनी पड़ रही है। अगले छह महीने तक पेयजल सप्लाई में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। बांध से अभी भी रोजाना 1500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। सालभर में 8.96 टीएमसी पानी वाष्पीकरण व रिसाव में खर्च हो जाता है।

 

चार जिलों की 90 लाख आबादी प्रभावित
बीसलपुर बांध से जयपुर, अजमेर, टोंक सहित चार जिलों की 90 लाख आबादी के लिए बांध से रोजाना 8000 लाख लीटर से ज्यादा पानी लिया जा रहा है। मानसून के कमजोर होने की आशंका लेकिन अगले छह महीने तक शहर के इलाकों की पेयजल सप्लाई में सुधार की कोई संभावना नहीं है।

 

बांध में पूरा पानी, फिर भी जमीन से दोहित कर रहे है पानी
बीसलपुर बांध में इस बार पूरा पानी आया है। इसके बावजूद शहर मेंं तीन हजार ट्यूबवेल के जरिए जमीन से पानी दोहित कर रहे है। इन ट्यूबवेलों के कारण करोड़ों रुपए बिजली बिल का भी चुकाना पड़ रहा है। लेकिन विभाग के इंजीनियर ठेकेदारों को फायदा देने के लिए नए ट्यूबवेल खुदवा रहे है।

 

पेयजल सप्लाई में सुधार के लिए यह होना है काम

  • पेयजल किल्लत वाले इलाकों को चिन्हित कर पाइपलाइन के छोटे-छोटे टुकड़े बिछाए जाए और मिलान हो।
  • शहर में नई पेयजल स्कीम, टंकियों व पंप हाउसों का काम समय या समय से पहले हो ताकि गर्मियों में लोगों को दिक्कत नहीं हो।
  • मल्टीस्टोरी बिल्डिंग को कनेक्शन देने की पॉलिसी बने, ताकि वहां ट्यूबवेल से भूजल दोहित नहीं करना पड़े।
  • टैंकरों को बंद कर पाइपलाइन से पेयजल सप्लाई की जाए। ताकि विभाग के करोड़ों रुपए खर्च होने के साथ ही लोगों की जीवनशैली में भी सुधार हो।

 

इस तरह से है बांध के पानी की बंटवारा
बीसलपुर बांध का अधिकतम लेवल 315.50 आरएल मीटर और न्यूनतम लेवल 297 आरएल मीटर है। बांध की भराव क्षमता 38.70 टीएमसी है, जबकि बांध से 75 फीसदी यानि 33.15 टीएमसी ही पानी का उपयोग किया जा सकता है। इसमें से 16.20 टीएमसी पेयजल के लिए आरक्षित है। जयपुर व टोंक सहित अन्य जिलों के लिए 11.20 टीएमसी और अजमेर के लिए 5 टीएमसी पानी आरक्षित है। वहीं 8 टीएमसी पानी सिंचाई के लिए देना होता है। जबकि 8.96 टीएमसी पानी वाष्पीकरण व रिसाव में खर्च हो जाता है। इस बार बांध में भरपूर पानी आने से खेती के लिए भी पानी मिलेगा। बांध का सिंचाई कमांड एरिया 81 हजार 800 हेक्टेयर जमीन तक फैला है। बीसलपुर बांध से टोंक, टोडारायसिंह, देवली व उनियारा तहसीलों के 256 गांवों में सिंचाई होती है।

 

किसी को पानी की दिक्कत है तो मेरे नंबर पर संपर्क करे : एसीई देवराज सोलंकी

 

सवाल- शहर में अभी कितना पानी सप्लाई कर रहे है?
जवाब- फिलहाल ऐसी कोई सूचना तैयार नहीं है।

 

सवाल- बीसलपुर बांध में पूरा पानी आने के बावजूद शहर के चारदीवारी, जवाहरनगर, बरकत नगर, सांगानेर पेयजल किल्लत है?
जवाब- कही भी पानी की दिक्कत नहीं है। सभी जगह गर्मियों से ज्यादा पानी दे रहे है।

 

सवाल- लोगों की शिकायत है कि पानी नहीं आ रहा है?
जवाब-किसी को पेयजल की दिक्कत है तो मेरे आॅफिस, टेलीफोन नंबर -0141-2702700 व मोबाइल पर संपर्क कर सकते है।

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