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वाहन चोरी होने पर घर बैठे कर सकेंगे ई-एफआईआर

3 वर्ष पहले
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जयपुर| वाहन चोरी होने के बाद पीड़ित को अब पुलिस थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ई-एफआईआर से घर बैठे ही वाहन चोरी का केस दर्ज करा सकेंगे। खास बात यह है कि अगर किसी ने ई-एफआईआर दर्ज कराई और वह गलत पाई गई तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने राजस्थान पुलिस वेबसाइट पर सीसीटीएनएस सिटीजन पोर्टल का विशेष ऑप्शन बनाया है। पोर्टल के मार्फत अब पीड़ित लोग कहीं से भी बैठे-बैठे मुकदमा दर्ज करा सकेंगे। पुलिस मुख्यालय का इसका मकसद है पीड़ितों को वाहन चोरी का केस दर्ज कराने के लिए थानों के चक्कर नहीं लगाना पड़े। इससे पहले वाहन चोरी होने पर पीड़ितों को कई दिनों तक मुकदमा दर्ज कराने के लिए चक्कर लगाने पड़ते थे। पीड़ितों की सुनवाई नहीं हो पाती थी। ऐसे में पुलिस मुख्यालय ने यह कदम उठाया है। पुलिस के आंकड़ों की माने तो प्रदेश में हर वर्ष करीब 14.5 हजार दुपहिया व चौपहिया वाहन चोरी होते हैं जबकि जयपुर कमिश्नरेट में 3.5 हजार वाहन चोरी होते हैं। यानि प्रदेश में राेजाना औसतन 40 और जयपुर शहर में 10 वाहन चोरी होते हैं।



इसके लिए बदमाशों ने वाहन चोरी की वारदात करने के लिए अलग-अलग रूट बना रखे हैं। वाहन चोरी होने के बाद पुलिस अकसर ज्यादातर मामलों में कभी भी घटना के दिन वाहन चोरी का मुकदमा दर्ज नहीं करती है और पीड़ित को चक्कर लगवाती रहती है। अब पीड़ित घटना के दिन ही मुकदमा दर्ज करा सकेंगे।

यह है ई-एफआईआर दर्ज कराने के नियम
अपराधी अज्ञात होने पर ही पीड़ित वाहन चोरी होने के बाद ई-एफआईआर दर्ज करा सकेंगे। घटना के दौरान चोरी व बल प्रयोग होने पर पीड़ित को थाने में ही जाकर मुकदमा दर्ज कराना पड़ेगा। पीड़ित को खुद का मोबाइल नंबर व आधार नंबर दर्ज करना होगा क्योंकि ई-हस्ताक्षर करना आवश्यक है।

ऐसे करनी होगी ई-एफआईआर
राजस्थान पुलिस वेबसाइट पर सीसीटीएनएस सिटीजन पोर्टल के ऑप्शन पर क्लिक करना पड़ेगा।

इसके बाद सीसीटीएनएस सिटीजन पोर्टल पर खुद की आईडी बनानी पड़ेगी।

लॉगइन बनने पर ई-एफआईआर दर्ज कराने का ऑप्शन आ जाएगा। उसमें वाहन चोरी होने की डिटेल भरनी पड़ेगी और उसको सबमिट करना पड़ेगा।

ऐसे में ई-एफआईआर दर्ज हो जाएगी। पीड़ित उसका फोटो प्रिंट ले सकेंगे।

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