राजस्थान / शिक्षा मंत्री ने कहा- धन्यवाद भास्कर! कमियां बताईं, स्कूली शिक्षा में बदलाव के लिए सरकार 1500 करोड़ देगी

शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा
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शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासराशिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा

  • भास्कर ऑडिट- बदहाल स्कूली शिक्षा में बदलाव के लिए 
  • सरकार का पक्ष- शिक्षा में सुधार की सोच दी, अब हमारी बारी

दैनिक भास्कर

Oct 10, 2019, 07:09 AM IST

जयपुर. बदहाल स्कूली शिक्षा में बदलाव के इरादे से भास्कर ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों का ऑनस्पॉट ऑडिट किया। 300 से ज्यादा स्कूलों के हालात जाने। न्यूज सीरीज को सरकार ने भी सकारात्मक और सुधारात्मक तरीके से लिया। शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा ने दैनिक भास्कर को अपने विभाग का एक्शन प्लान बताया। मंत्री ने बताया- अगले साल कोई स्कूल बिना भवन, बिना बिजली नहीं रहेगा। 60 स्कूलों में नए भवन बनेंगे। स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1500 करोड़ रु. खर्च करेंगे। मार्च तक 24 हजार कमरों से कबाड़ हटा देंगे।
स्कूली शिक्षा पर शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा से बातचीत के अंश...
 

 

सवाल- स्कूलों का अंधेरा कब दूर होगा? 
जवाब- सभी सैकंडरी-सीनियर सैकंडरी स्कूलों में बिजली आ गई। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में सोलर सिस्टम के जरिए बिजली की व्यवस्था की जाएगी। सीएसआर से यह काम किया जाएगा। 

 

सवाल- 24 हजार कमरों में तो कबाड़ भरा है?  
जवाब- मार्च तक कबाड़ को पूरी तरह हटा देंगे। वित्त विभाग से नियमों में छूट ले ली है। अब विभाग के सहायक लेखाधिकारी की जगह अन्य विभाग के सहायक लेखाधिकारी या जूनियर अकाउंटेट की मौजूदगी में कबाड़ की नीलामी हो सकेगी। इससे विभाग को 100 करोड़ रुपए मिलेंगे।  

 

सवाल- सरकारी स्कूल प्राइवेट जैसे होंगे?
जवाब- प्राइवेट जैसे नहीं, उनसे बेहतर होंगे। हम इसी सत्र से आंगनबाड़ी केंद्रों को हाईटेक प्री-प्राइमरी के रूप में विकसित करेंगे। राजस्थान पहला राज्य है, जहां प्री-प्राइमरी व्यवस्था लागू होने जा रही है। एनजीओ के साथ एमओयू किया है ताकि शुरू से ही स्मार्ट क्लासेज व अंग्रेजी की शिक्षा मिल सके। विवेकानंद मॉडल स्कूलों के लिए 10-10 करोड़ स्वीकृत किए हैं।

 

सवाल- साइंस-कंप्यूटर लैब तालों-बक्सों में?   
जवाब- जिस सरकारी स्कूल में साइंस लैब नहीं, तो हम नजदीकी प्राइवेट स्कूल में उन बच्चों के प्रेक्टिकल की व्यवस्था करेंगे। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित करेंगे। कंप्यूटर शिक्षकों के लिए हमने वित्त विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है। 

 

सवाल- क्या सरकारी स्कूल गरीबों के लिए हैं? 
जवाब- सबके लिए हैं। अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलकर हम ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं ताकि कलेक्टर-एसपी का बेटा भी इनमें पढ़े। कोई भी सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएगा और बच्चे के 70% से अधिक अंक आएंगे तो दो बच्चों को 10-10 हजार की छात्रवृत्ति दी जाएगी। 

 

सवाल- भवन विहीन स्कूलों को भवन कब? 
जवाब-इस साल हम 60 नए प्राइमरी स्कूलों में भवन बना रहे हैं। पहली बार स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1500 करोड़ रुपए मिले हैं। हम डेपुटेशन पर इंजीनियर लाकर काम की गुणवत्ता की जांच भी करेंगे। 

 

सवाल- स्कूलों में विषय अध्यापक भी नहीं? 
जवाब- पिछली सरकार ने 120 स्कूलों में साइंस विषय खोल दिया। उनमें न बच्चे थे, न शिक्षक, न लैब। जल्द ही 9000 सैकंड ग्रेड, पांच हजार व्याख्याता, 4500 पीटीआई और 1200 प्रधानाध्यापक मिलने वाले हैं।  

 

भास्कर अपील:

 

क्योंकि... प्राइमरी शिक्षा हमारे भविष्य की बुनियाद है। सिर्फ अकेली सरकार सबकुछ ठीक नहीं कर सकती। उसकी भी सीमाएं हैं। शिक्षा के बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए हम सबको आगे आना होगा। अगर आप शिक्षा में बदलाव के भागीदार बनना चाहते हैं तो ज्ञानसंपर्क पोर्टल www.gyansankalp.nic.in पर आर्थिक सहयोग दें। यह सरकारी पोर्टल है। आपके पैसे से स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम, डिजिटल ब्लैक बोर्ड, अत्याधुनिक कंप्यूटर व साइंस लैब विकसित होंगी। 83 हजार भामाशाह 110 करोड़ रुपए स्कूलों को दे चुके हैं, मगर जरूरत इससे बहुत ज्यादा की है। स्कूलों को दान देने पर 80जी में टैक्स छूट मिलेगी। स्कूल भवन अपने परिजन के नाम करवा सकते हैं। सरकार हर साल सम्मानित करती है। मुख्यमंत्री विद्या दान कोष और सीधे स्कूल के खाते में भी मदद दी जा सकती है। मदद के लिए आगे आएं।

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