भास्कर खास / 34 साल से क्लाइमेट चेंज पर काम में औपचारिकता, अब पर्यावरण निदेशालय 10 विभागों को रेगुलेट करेगा



Environmental Directorate to regulate 10 departments for work on climate change
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Environmental Directorate to regulate 10 departments for work on climate change

  • सरकार पर एनजीटी-सुप्रीम कोर्ट तक 1500 केसों की बदनामी
  • सीएस की आए दिन पेशी, बीजेपी सरकार में बढ़े अधिक केस

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 01:39 AM IST

जयपुर (महेश शर्मा). अभी तक केवल बड़ी-बड़ी कांफ्रेंसेज, देशी-विदेशी मंचों पर चर्चा में रहने वाला पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और क्लाइमेट चेंज जैसे भारी-भरकम मसले पर जमीनी स्तर पर काम हो सकेगा। 2010 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के बाद से पर्यावरण के मसलों पर लगातार प्रदेश की खिंचाई होती आ रही है।

 

एनजीटी से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक करीब 1500 केसेज चल रहे हैं। इनमें से कई में निर्णय भी हुए तो वो निदेशालय की कमी के चलते लागू नहीं हो रहे थे। पिछले दिनों कई मामलों में कोर्ट के आदेश की पालना नहीं होने से मुख्य सचिव को हाजिर होना पड़ा तो लगातार मैराथन मीटिंग के बाद भी मामले नहीं सुलझ पाए। आखिरकार प्रमुख सचिव श्रेया गुहा की ओर से इस मसले पर सरकार का ध्यान आकर्षित करा मौजूदा दौर में इसकी जरूरत को बताया गया। नतीजा, बजट में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय की घोषणा के रूप में सामने आया। अब निदेशालय में नए सिरे से साईंटिस्ट, रिर्सचर, विधि, अकाउंट्स, फॉरेस्ट आदि सर्विस से जुड़े स्टाफ की स्ट्रेंथनिंग के बाद नतीजे आने की उम्मीद रहेगी।

 

पर्यावरण जैसे मसले पर 34 साल बाद फोकस

{1983 से पर्यावरण विभाग निदेशालय चल रहा है। लेकिन केवल 4 चपरासी-बाबू सहित बमुश्किल 10 लोगों के स्टाफ सहित। निदेशक का काम भी अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर। 
{30 पद स्वीकृत थे, जो खत्म होकर 21 रह गए। 1998 में रूल तो बने लेकिन लागू करने वाले नहीं थे। 
{बीजेपी सरकार के 5 साल के कार्यकाल में कोर्ट केसेज की भरमार रही। इसे देख निदेशालय को मजबूत करने की आवाज उठी, लेकिन प्राथमिकता में नहीं आई। 
{कांग्रेस सरकार में पहली बार सचिव पद पर वन विभाग के सीनियर और एपीसीसीएफ रैंक के डीएन पांडे को सचिव पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। 
{अब निदेशालय के साथ पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मसले पर काम आगे बढ़ेगा।

 

अब ये 5 टॉप प्राथमिकता

{स्ट्रेंथनिंग : 21 पदों के साथ 12 नए पद और। इसके लिए रिक्रूटमेंट और डेपुटेशन।
{कोर्ट केसेज : कोर्ट ने जो निर्णय दिए हैं, उन पर विभागों से पालना कराना।
{पर्यावरण प्लान : जलवायु परिवर्तन के मसले पर पर्यावरण प्लान लागू कराना।
{कार्डिनेशन : लोगों को खासकर सरकारी विभागों को जागरूक करना। प्लान लागू कराना।
{नई सेल : पर्यावरण-प्रशासनिक-आईईसी सेल बनेगी। जो पर्यावरण अधिनियम, इसके नियम, वेस्ट मैनेजमेंट, प्लास्टिक रूल आदि पर काम।

 

^पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय के बाद अब मसले पर काम होगा। कई विभागों को साथ लेकर पर्यावरण संरक्षण के मसले पर राज्य सरकार की भागेदारी बढ़ेगी। -श्रेया गुहा, प्रमुख सचिव, वन-पर्यावरण

 

^प्रदूषण तो एक विषय है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण उससे आगे का मसला है। और जलवायु संरक्षण उसके भी आगे का है। निदेशालय जमीनी स्तर पर काम कर सकेगा। न कि लोगों, व्यवसायों के लिए मंजूरी देने जैसा कोई नया अडंगा। -डीएन, पांडे, सचिव, पर्यावरण निदेशालय

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