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पहली बार 48 छात्रों ने छोड़ा मेडिकल कॉलेज

जयपुर। उदयपुर के गीतांजलि मेडिकल कॉलेज द्वारा 48 स्टूडेंट को सीट देने के मामले में सरकार की ओर से सोमवार को एसएमएस...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:07 AM IST
जयपुर। उदयपुर के गीतांजलि मेडिकल कॉलेज द्वारा 48 स्टूडेंट को सीट देने के मामले में सरकार की ओर से सोमवार को एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अधिकारियों से मामले की पूरी जानकारी ली गई।

प्रथम दृष्टया गीतांजलि मेडिकल कॉलेज की ओर से आवंटित की गई सीटों को गलत माना जा रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी मेडिकल कॉलेज में नीट के जरिए एडमिशन लेने के बाद 48 स्टूडेंट्स ने एक साथ कॉलेज छोड़ दिया हो। फिलहाल चेयरमैन काउंसलिंग बोर्ड को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद एमसीआई को यह रिपोर्ट सौंपी जाएगी। वहीं एमसीआई इन स्टूडेंट के एडमिशन पर फैसला कर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा। इसी के बाद यह तय हो पाएगा कि ये स्टूडेंट्स इस मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर सकेंगे या नहीं। गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने 9 सितंबर को “मेडिकल कॉलेज ने एक भी सीट खाली नहीं बताई, फिर दे दिए 48 एडमिशन’ समाचार प्रकाशित कर मामले का खुलासा किया था। गीतांजलि मेडिकल कॉलेज ने 16 अगस्त को नीट काउंसलिंग खत्म होने के बाद यह हवाला दिया था उनके पास सीट नहीं बची हैं लेकिन काउंसलिंग पूरी होने के चार दिन बाद 48 स्टूडेंट को एडमिशन दे दिया। इसके बाद मामले में सरकार ने हस्तक्षेप किया और सोमवार को चिकित्सा शिक्षा के एडिशनल डायरेक्टर बचनेश अग्रवाल ने मेडिकल काउंसलिंग में शामिल अधिकारियों को बुलाकर मामले की जानकारी ली। इन अधिकारियों ने बताया कि नियमों के मुताबिक ऐसा नहीं किया जा सकता। क्योंकि एडमिशन लेने के बाद भी नाम वापिस लेने की एक समय सीमा निर्धारित होती है। उस दरमियान ही नाम वापिस लिया जा सकता है। यदि कोई नाम वापिस लेता है तो उसके सभी मूल दस्तावेज जब्त कर लिए जाते हैं और कानूनी कार्रवाई तक का प्रावधान है। ऐसे में गीतांजलि मेडिकल कॉलेज की ओर से दिए गए एडमिशन पूरी तरह गलत प्रतीत होते हैं।