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राजस्थान: दलालों ने मदरसा बोर्ड में 20 करोड़ रु. ठिकाने लगाने बना ली थी अपनी कंपनी

प्रदेश की एक लघु इकाई को मिला था मदरसा बोर्ड में फ्लाेर डेस्क सप्लाई करने का टेंडर

Bhaskar News | Last Modified - May 18, 2018, 07:00 AM IST

राजस्थान: दलालों ने मदरसा बोर्ड में 20 करोड़ रु. ठिकाने लगाने बना ली थी अपनी कंपनी

जयपुर. आंगनबाड़ी केन्द्रों पर फ्लोर डेस्क का मुंबई की कंपनी को टेंडर दिलाकर सरकार को 6 करोड़ रुपए से ज्यादा की चपत लगाने की तैयारी करने वाले दलालों ने मदरसा बोर्ड में भी 20 करोड़ रु. से ज्यादा के फ्लोर डेस्क सप्लाई करने के लिए एक फर्जी कंपनी बना ली थी। खास बात यह है कि अल्पसंख्यक मामलात व वक्फ विभाग ने टेंडर नियमानुसार प्रदेश की ही एक लघु इकाई डेनिएल फर्नीचर प्राइवेट लिमिटेड को जारी कर दिया था, लेकिन दलालों ने उद्योग विभाग व सीपेट के अफसरों से मिलकर टेंडर काे निरस्त करा लिया। यह खुलासा एसीबी की जांच में हुआ है।


- जांच में सामने आया कि राजस्थान मदरसा बोर्ड ने नवंबर 2017 में मदरसा बोर्ड में फ्लाेर डेस्क की सप्लाई करने के लिए टेंडर निकाला था। टेंडर 20 करोड़ रु. से ज्यादा का था। ऐसे में एसीबी की गिरफ्त में आरोपी दलाल सीके जोशी और कमलजीत राणावत ने टेंडर लेने के लिए मुंबई की रॉयल सेल्स कॉर्पोरेशन नाम से एक फर्म बना ली।

- आरोपियों ने टेंडर लेने के लिए उद्योग विभाग व अल्पसंख्यक मामलात विभाग के अफसरों से सांठगांठ की थी। लेकिन इस बीच गजट नोटिफिकेशन के आधार पर मदरसा बोर्ड चेयरमैन की दखल से नियमानुसार प्रदेश की लघु इकाई डेनिएल फर्नीचर को यह काम मिल गया। दलालों ने मिलीभगत कर फर्म में खामियां निकाल टेंडर निरस्त करा लिया। आरोपियों ने रॉयल सेल्स कॉर्पोरेशन कंपनी का जो पता कागजों में दिखाया था, उस जगह पर लोग रहते हैं और कोई कंपनी नहीं थी।

1.50 करोड़ का कमिशन देते, 60 लाख दे चुके थे
- आंगनबाड़ी केन्द्रों पर फ्लोर डेस्क सप्लाई करने के लिए नियमों से परे आईसीडीएस के अधिकारियों ने दलाल कमलजीत राणावत व सीके जोशी से मिलकर टेक्नो क्राफ्ट कंपनी को टेंडर दिया था। इसके लिए कंपनी व दलालों ने आईसीडीएस और उद्योग विभाग के अफसरों से करीब 1.50 करोड़ रुपए का कमिशन तय हुआ था। कंपनी ने दलालों के मार्फत 5 अफसरों तक करीब 60 लाख रु. की राशि रिश्वत की दी थी। हालांकि बाद में टेंडर निरस्त हो गया। टेंडर निरस्त की कार्रवाई होने के बाद कंपनी व दलाल अफसरों को करीब 90 लाख कमिशन के और बांटने वाले थे।

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