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जयपुर / 25 साल में पहली बार एक बोर्ड में तीसरा मेयर बनेगा

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 03:19 AM IST


For the first time in 25 years, the third mayor in a board
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For the first time in 25 years, the third mayor in a board

  • 3 धड़ों में भाजपा के 13 पार्षद कर रहे दावेदारी, 1 निर्दलीय भी मैदान में
  • 22 जनवरी को 90 पार्षद चुनेंगे शहर का नया मुखिया

जयपुर. मनोज भारद्वाज के कार्यवाहक मेयर बनने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि निगम के शेष कार्यकाल में मेयर का चुनाव नहीं होगा। लेकिन अब सरकार की घोषणा के बाद सियासी दौड़ तेज हो गई है। बोर्ड में बहुमत को देखते हुए तय था कि मेयर भाजपा का ही बनेगा लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने के बाद अब कांग्रेस भी जोर आजमाइश की दौड़ में आ गई है।

 

भाजपा के तीन धड़े हैं, जो ‘अपनों’ के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। अशोक लाहोटी के विधायक बनने के बाद 24 दिसंबर 2018 को उन्होंने मेयर पद छोड़ा था। 90 पार्षदों वाले निगम बोर्ड में भाजपा के 63 और कांग्रेस के 18 पार्षद हैं। 9 निर्दलीय हैं। निगम के 25 साल के इतिहास में पहली बार होगा कि पांचवें बोर्ड में तीसरा मेयर चुना जाएगा। 22 जनवरी को एक बार फिर स्थायी मेयर मिलेगा।

 

‘अपनों’ के लिए परेशानी करेंगे भाजपा के पार्षद

भाजपा के 13 पार्षदों ने दावेदारी जताई दी। इनमें डिप्टी मेयर मनोज भारद्वाज, पूर्व मेयर व पार्षद निर्मल नाहटा, अनिल शर्मा, विष्णु लाटा, सत्यनारायण धामाणी, मान पंडित, राखी राठौड़, कुसुम यादव, प्रकाश गुप्ता, भगवत सिंह देवल, अशोक गर्ग, मुकेश लख्यानी, नवरत्न नराणियां और निर्दलीय सुशील शर्मा हैं। जयपुर के छठे नगर निगम के चुनाव नवंबर 2019 में होंगे।

 

दावेदारी के लिए कम से कम दो पार्षद चाहिए

डीएलबी निदेशक (विधि) अशोक सिंह का कहना है कि  मेयर के लिए एक नाम पर सर्वसम्मति नहीं होने पर चुनाव करवाया जाता है। कोई भी दल का और निर्दलीय पार्षद मेयर पद के लिए दावेदारी कर सकता है। बस उसके पास दो पार्षदों का समर्थन होना चाहिए।

 

निगम-एक नजर

  • पहला बोर्ड (1994 से 1999): भाजपा के मेयर मोहन लाल गुप्ता।
  • दूसरा बोर्ड (1999 से 2004): मेयर निर्मला वर्मा के निधन के बाद 4 माह तक पवन शर्मा कार्यवाहक मेयर रहे। ओबीसी महिला सीट होने के कारण उपचुनाव में शील धाबाई मेयर बनीं। 
  • तीसरा बोर्ड (2004 से 2009): मेयर अशोक परनामी 2008 में विधायक चुने गए। डिप्टी मेयर पंकज जोशी को सर्वसम्मति से मेयर चुना गया था। 
  • चौथा बोर्ड (2009 से 2014): महिला सीट पर मेयर के सीधे चुनाव में कांग्रेस की ज्योति खंडेलवाल मेयर बनीं। 
  • पांचवां बोर्ड (2014 से): नवंबर 2014 में निर्मल नाहटा मेयर बने। अगस्त 2016 में हिंगोनियां गौशाला में गायों की मौत के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। भाजपा के अशोक लाहोटी के सामने निर्दलीय सुशील कुमार शर्मा खड़े हुए तो 14 दिसंबर 2016 को पार्षदों ने 69-21 से लाहोटी को चुना। इस विधानसभा चुनाव में विधायक बनने के बाद मनोज भारद्वाज को कार्यभार सौंपा गया।
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