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पहली बार राज्य में हर घंटे घर बैठे मिलेगा बारिश, नदी व भूजल का रियल टाइम डेटा

सैटेलाइट से पानी की हर आपदा पर रहेगी सीधे नजर, पहले हो सकेंगे बचाव के उपाय, 15 लाख किसानों सहित 5 करोड़ लोगों को मिलेगा...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 04:11 AM IST
Jaipur - पहली बार राज्य में हर घंटे घर बैठे मिलेगा बारिश, नदी व भूजल का रियल टाइम डेटा
सैटेलाइट से पानी की हर आपदा पर रहेगी सीधे नजर, पहले हो सकेंगे बचाव के उपाय, 15 लाख किसानों सहित 5 करोड़ लोगों को मिलेगा फायदा

अजय कुमार | जयपुर

दशकों से पानी की त्रासदी झेल रहे प्रदेश के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट (एनएचपी) के तीसरे चरण में राजस्थान को जोड़कर सितंबर अंत तक कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। 100 प्रतिशत अनुदान के तहत राजस्थान को वर्ल्ड बैंक और केंद्र सरकार मिलकर 128 करोड़ रुपए दे रही है। ये राशि राज्य को वापस नहीं लौटानी है। प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में तीनों प्रकार के पानी (बारिश, नदी या बांध और भूजल) की हर हलचल पर पल-पल सीधे सैटेलाइट से नजर रखी जाएगी। डार्क जोन में पानी की रियल टाइम जानकारी मिलेगी। नदी, बांध व कैनाल के पास रह रहे किसानों और लोगों को आने वाले खतरे से पहले ही चेताया और बचाया जा सकेगा। प्रोजेक्ट को प्रदेश में ए, बी, सी और डी के चार भागों में बांटा गया है। इससे कोई भी व्यक्ति, रोजाना, दुनिया में कहीं से भी घर बैठे प्रदेश में भूजल स्तर से लेकर बारिश तक के पानी का रियल टाइम डेटा देख पाएगा। इससे प्रदेश के 15 लाख से ज्यादा किसानों सहित करीब 5 करोड़ लोगों को फायदा होगा। इसके लिए 574 रेन फॉल स्टेशन से 100 साल का डेटा कंप्यूटराइज किया जा चुका है।

भाग ए | पानी से संबंधित सारा डाटा एकत्र किया जाएगा। ऑटोमेटिक वर्षा मापी यंत्र, बांधों व नदियों के लिए ऑटो वाटर लेवल रिकॉर्डर व बांधों का सारा नियंत्रण ऑटो मेटिक, भूजल के लिए लेवल रिकॉर्डर व गुणवत्ता मापन, पानी की जांच के लिए प्रयोगशाला का निर्माण होगा।

भाग बी | पानी के तीनों प्रकारों की सूचना को आम आदमी तक पहुंचाने का कार्य होगा। सिंचाई विभाग इसके लिए जोधपुर स्थित रीजनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (आरआरएससी) मिलकर काम करेगा। पानी के सारे आंकड़े हर घंटे वेबसाइट पर ऑटोमेटिक अपडेट होंगे।

भाग सी | रियल टाइम डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (आरटीडीएसएस) का काम होगा। इसके लिए माही व चंबल वाले क्षेत्र को चुना गया है। पानी की समस्या वाले जिलों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद ये तय होगा कि, आसमान, सतही या भूजल में से कौन से प्रकार के पानी से समस्या का समाधान हो सकेगा। आरटीडीएसएस देश भर में केवल चंडीगढ़ में भाखड़ा व्यास व महाराष्ट्र में है। राजस्थान तीसरा प्रदेश है। इससे बांध टूटने या पानी की किसी भी प्रकार की आपदा से पहले ही आगे पीछे का सारा गणित इंजीनियर लगा सकेंगे।

भाग डी | एनएचपी के लिए एसपीएम यूनिट का गठन किया है। उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है। फिलहाल सिंचाई और भूजल विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। भूजल की तरफ से वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक परवाल अथैया व विनय भारद्वाज कार्य कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर बाहर के एक्सपर्ट की सेवाएं भी ले सकेंगे।

चार भागों से समझिए पूरे एनएचपी को

भाग ए | पानी से संबंधित सारा डाटा एकत्र किया जाएगा। ऑटोमेटिक वर्षा मापी यंत्र, बांधों व नदियों के लिए ऑटो वाटर लेवल रिकॉर्डर व बांधों का सारा नियंत्रण ऑटो मेटिक, भूजल के लिए लेवल रिकॉर्डर व गुणवत्ता मापन, पानी की जांच के लिए प्रयोगशाला का निर्माण होगा।

भाग बी | पानी के तीनों प्रकारों की सूचना को आम आदमी तक पहुंचाने का कार्य होगा। सिंचाई विभाग इसके लिए जोधपुर स्थित रीजनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (आरआरएससी) मिलकर काम करेगा। पानी के सारे आंकड़े हर घंटे वेबसाइट पर ऑटोमेटिक अपडेट होंगे।

भाग सी | रियल टाइम डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (आरटीडीएसएस) का काम होगा। इसके लिए माही व चंबल वाले क्षेत्र को चुना गया है। पानी की समस्या वाले जिलों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद ये तय होगा कि, आसमान, सतही या भूजल में से कौन से प्रकार के पानी से समस्या का समाधान हो सकेगा। आरटीडीएसएस देश भर में केवल चंडीगढ़ में भाखड़ा व्यास व महाराष्ट्र में है। राजस्थान तीसरा प्रदेश है। इससे बांध टूटने या पानी की किसी भी प्रकार की आपदा से पहले ही आगे पीछे का सारा गणित इंजीनियर लगा सकेंगे।

भाग डी | एनएचपी के लिए एसपीएम यूनिट का गठन किया है। उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है। फिलहाल सिंचाई और भूजल विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। भूजल की तरफ से वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक परवाल अथैया व विनय भारद्वाज कार्य कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर बाहर के एक्सपर्ट की सेवाएं भी ले सकेंगे।

85 बांध व महत्वपूर्ण नदियों में 28 जगह एडब्ल्यूएलआर

नदियों-बांधों पर नजर व आपदा से निपटने के लिए 85 ऑटोमैटेड वॉटर लेवल रिकॉर्डर (एडब्ल्यूएलआर) लगाए जाएंगे। बांध व नदी की रियल टाइम जानकारी मिलेगी। बांध का दरवाजा खोलना-बंद करना, जैसे निर्देश कंट्रोल रूम से दे सकेंगे।

भूजल की जानकारी देगा डीडब्ल्यूएलआर

भूजल की रियल टाइम जानकारी के लिए 150 जगह डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर (डीडब्ल्यूएलआर) पंचायत समिति स्तर पर लगेंगे। 147 पीजियो मीटर (मैनुअल रिकॉर्डर) वाली जगहों पर भी डीडब्ल्यूएलआर लगाए जाएंगे।



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