जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल / पेरिस में 1847 में शुरू हुए दुनिया के मशहूर ज्वैलरी हाउस ऑफ कार्टियर्स का भारत से गहरा रिश्ता: फ्रेंसिस्का

फ्रंट लॉन में पुस्तक का विमोचन करती सांसद दीया कुमारी फ्रंट लॉन में पुस्तक का विमोचन करती सांसद दीया कुमारी
Former princess and MP Diyakumari released book based on the stories of Rajshahi families
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फ्रंट लॉन में पुस्तक का विमोचन करती सांसद दीया कुमारीफ्रंट लॉन में पुस्तक का विमोचन करती सांसद दीया कुमारी
Former princess and MP Diyakumari released book based on the stories of Rajshahi families

  • कार्टियर की स्थापना करने वाले परिवार की सदस्य फ्रेंसिस्का ने जेएलएफ में सुनाए किस्से
  • फ्रेंसिस्का कार्टियर की किताब का विमाेचन राजसमंद सांसद दीया कुमारी ने किया

Dainik Bhaskar

Jan 25, 2020, 07:07 AM IST

जयपुर. पेरिस में 1847 में शुरू हुए दुनिया के नामचीन ज्वैलरी हाउस ऑफ कार्टियर्स का भारत से बहुत पुराना रिश्ता है। इस कंपनी काे स्थापित करने वाले कार्टियर परिवार की सदस्या फ्रेंसिस्का कार्टियर ब्रिकेल इसी रिश्ते की कहानी सुनाने जेएलएफ पहुंचीं। उनकी किताब का विमाेचन राजसमंद सांसद दीया कुमारी ने किया। उन्हाेंने बेहद राेचक अंदाज में बताया कि कभी इश्तेहार न देने वाले इस ज्वैलरी हाउस ने ज्वैलरी डिजाइनर्स नहीं बल्कि आर्किटेक्ट, लेस डिजाइनर्स और इंटीरियर डिजाइनर्स से भी नायाब ज्वैलरी के डिजाइन बनवाए थे।


कार्टियर्स का पुश्तैनी बिजनेस पहले बहुत छाेटा था। कार्टियर्स परिवार की तीसरी पीढ़ी के तीन भाइयाें लुई, पीयेर और जैक्स कार्टियर ने एक दिन दुनिया का नक्शा आपस में बांटा और इस ब्रांड काे सबसे बड़े ज्वैलरी हाउस में तब्दील करने का सपना देखा। उनका मंत्र था कि जूलरी डिजाइन क्रिएट करना है लेकिन काॅपी नहीं, प्रेरणा का साेर्स चाहे कुछ भी हाे। इसलिए कंपनी में ज्वैलरी डिजाइनर नहीं रखे बल्कि आर्किटेक्ट, लेस डिजाइनर और इंटीरियर डिजाइनर्स जूलरी डिजाइन के आइडिया देते थे जाे अनदेखे हाेने के साथ-साथ नायाब हाेते थे।


संदूक में रखे पुराने खतों से बनी कहानी
फ्रेंसिस्का ने बताया कि एक दिन जब वाे अपने परदादा जीन जैक्स कार्टियर की 90वीं सालगिरह मना रहे थे ताे शैम्पेन खाेजते-खाेजते उन्हें एक पुराना संदूक मिला, जिसमें उनके परिवार और ज्वैलरी के सफरनामे से जुड़े कई खत थे। हर खत में एक कहानी थी। उसी वक्त उन्हें किताब लिखने का आइडिया आया। वाे भारत सहित दुनिया के कई देशाें से उन खताें से जुड़ी कहानियाें की खाेज में निकली। उन्हाेंने बताया कि कैसे उनके परदादा 100 साल पहले राॅल्स राॅयस में भारत घूमे थे और जैम स्टाेन्स खरीदे थे। साथ ही कई महाराजाओं के लिए ज्वैलरी बनाई थी।


पहली बार पुरुषाें के लिए बनाई रिस्ट वाॅच

कार्टियर ने पहली बार पुरुषाें के लिए रिस्ट वाॅच बनाई। पहले सिर्फ महिलाओं के लिए बनती थी। पुरुष अमूमन पाॅकेट वाॅच पहनते थे। फ्रेंसिस्का ने बताया कि एक पायलट दाेस्त एल्बर्टाे सैंटाेस ड्यूमाॅन्ट ने लुगस कार्टियर से कहा कि वाे प्लेन उड़ाते वक्त पाॅकेट वाॅच से समय नहीं देख पाते हैं इसलिए उनके लिए रिस्ट वाॅच डिजाइन करें।
                

अमेरिका की भीषण मंदी में हमारे शाही परिवारों ने ही बचाई थी कंपनी
अमेरिका में 1930 के ग्रेट डिप्रेशन के दिनाें में हिंदुस्तान के शाही परिवाराें से बिजनेस ने आंच नहीं आने दी। फ्रेंसिस्का ने बताया, एक बार पटियाला के महाराजा भूपेन्द्र सिंह पेरिस आए थे। उन्हाेंने कार्टियर से कई बेशकीमती जैम स्टाेन व ज्वैलरी से माॅडर्न यूराेपियन ज्वैलरी बनाने को कहा। इसमें 3 साल लगे। पटियाला के राजा के लिए 2930 हीरे जड़े थे और बीच में गाेल्फ बाॅल के आकार का डायमंड भी था।

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