जयपुर

--Advertisement--

अब मीठे पानी में हो सकेगी मोती की खेती; टोंक जिले के चंदलाई मत्स्य फार्म में होगा डेमो

यूनिट के माध्यम से किसानों को मोती की खेती करने के तरीकों का प्रशिक्षण और इससे होने वाले फायदे की जानकारी दी जाएगी

Danik Bhaskar

Sep 09, 2018, 06:12 AM IST

जयपुर. भले ही बीसलपुर बांध पानी की कमी से जूझ रहा हो, सरकार टोंक जिले में मीठे पानी में मोती की खेती शुरू करने की तैयारी में है। मत्स्य पालन विभाग ने बीसलपुर से करीब पचास किलोमीटर दूर चंदलाई मत्स्य फार्म को मोती पालन के डेमो सेशन यूनिट के लिए चुना है।

इस यूनिट के माध्यम से किसानों को मोती की खेती करने के तरीकों का प्रशिक्षण और इससे होने वाले फायदे की जानकारी दी जाएगी। मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को सहायता के लिए 40 से 60 फीसदी अनुदान राशि भी देगी। देश में मोती पालन ज्यादातर दक्षिणी राज्यों में किया जाता है। इसी तर्ज पर अब प्रदेश में भी किसानों की आय बढ़ाने व रोजगार के अवसर मुहैया कराने को लेकर यह पहल की जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मछली पालन की तरह सरकार मोती पालन को भी बढावा देना चाहती है। मोती पालन प्रशिक्षण का देश में एकमात्र सरकारी इंस्टीट्यूट (सीफा )ओडीशा की राजधानी भुवनेश्वर में है । जहां से अभी हाल ही में प्रदेश से दो अधिकारियों को सरकार की आेर से ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था।

यूं तैयार होता है मीठे पानी का मोती : दरअसल, मोती सीप मीठे पानी का एक जीव है जो लेमेनीडेंथ मार्जलिस वेरायटी के होते हैं। ये वैरायटी मीठे पानी की नदियों व तालाबों में पाई जाती है। इन्हें एकत्रित करके या कहीं से खरीदकर अपने फार्म या पोंड में लाकर पानी में डाल देते हैं। उसका ऑपरेशन करके न्यूकलेस डालते हैं, यानी जीव के शरीर के अंदर आर्टिफिशियल न्यूकलीअस डालना पड़ता है। जो अलग-अलग आकृतियों में हो सकता है। न्यूकलीअस के ऊपर जीव (सीप) परत बनाता रहता है, वो परत सीप का शरीर का पार्ट बन जाता है ,जो बाद में मोती बन जाता है। ये कैलिशियम कार्बोनेट की परत होती है जो चमकदार होती है। परत चढ़ने के बाद एक साल से दो साल के बाद क्वालिटी के हिसाब से निकाल लेते है। वो ही मोती है। कैरेट के हिसाब से इसका मूल्य तय होता है।

ऐसे होगी मोती की खेती

- मोती पालन के लिए एक हैक्टेयर में इकाई की लागत 25 लाख रु., उसमें 25 हजार सीपों का संचयन संभव।
- सामान्य वर्ग को 40% और एस.टी.-एस.सी., महिला और सहकारी संस्थाओं को 60%अनुदान राशि दी जाएगी।
- मोती पालन करने वालों को डेमो सेशन के तहत ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस मोती का उपयोग
- ज्वैैलरी व सजावटी सामान बनाने के काम आता है
- इससे जल शुध्दिकरण भी होता है
- इसका इत्र भी तैयार होता है
- आयुर्वेदिक दवा में मोती भस्म के रुप में भी काम आता है।

मोती की खेती में लाभ : मीठे पानी के मोती पालन या मोती की खेती के लिए टोंक जिले के चंदलाई मतस्य फार्म में मोती पालन का डेमो सेशन यूनिट लगाया जाएगा। अगर किसान मोती की खेती करते हैं तो एक हैक्टेयर से 3 लाख रुपए वार्षिक आय संभव है। -राकेश देव, जिला मत्स्य विकास अधिकारी, टोंक

Click to listen..