जयपुर

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खाने में मिलावट करने वालों के 105 केस वापस लेगी सरकार, कहा- जनहित में फैसला

नहीं पचा फैसला: जिन्होंने पकड़ा, उन्हीं स्वास्थ्य व खा‌द्य विभाग ने की केस वापस लेने की सिफारिश

Danik Bhaskar

Aug 11, 2018, 05:23 AM IST

मिलावट खुद परखिए : सरकार के तर्क और फैसले की असल वजह

जयपुर. खाने-पीने में मिलावट रोकना तो जनहित हो सकता है, लेकिन मिलावट करने वालों के केस जनहित में बताकर वापस लेना गले नहीं उतरता। लेकिन सरकार ने खाने-पीने के सामान में मिलावट करने के 105 केस विड्रॉ करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय कानून के तहत दर्ज इन प्रकरणों में राज्य सरकार ने केंद्र से अनुमति ले ली है।

अब कोर्ट से विड्रॉ किए जाने की कार्रवाई के लिए संबंधित 25 जिलों के कलेक्टर-एसपी व अभियोजन अधिकारियों को पत्र भेजे जा चुके हैं। गृह विभाग ने इसके पीछे कारण भी अजीबो-गरीब बताया है। विभाग का कहना है कि न्यायालय में विचाराधीन इन 105 प्रकरणों को जनहित में वापस लेने पर सहमति दी गई है। खास बात यह है कि इन मामलों को स्वास्थ्य तथा खाद्य विभाग ने पकड़ा था, अब उन्होंने ही इन्हें वापस लेने की सिफारिश की है। ये मामले वर्ष 2000 से अब तक के हैं। इनमें से 31 मामले इसी सरकार के कार्यकाल के हैं, जबकि शेष 74 मामले वर्ष 2000 से इस सरकार के कार्यकाल की शुरुआत तक के हैं।

गृह विभाग की दलील यह है: गृह विभाग के स्पेशल सैक्रेट्री रमेश कुमार शर्मा ने 9 अगस्त को एक आदेश निकाला है। इसमें साफतौर पर लिखा गया है कि राज्य सरकार ने जनहित में प्रकरणों को कोर्ट वापस लिए जाने पर सहमति दी है। इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, आयुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त और चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य सेवाएं राजस्थान के निदेशक की अनुशंसा पर केंद्र सरकार से परामर्श किया गया। राज्य सरकार ने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम-1954 के अंतर्गत मामले विड्रॉ किए हैं। कोर्ट केस विड्रो किए जाने की पालना के लिए यह आदेश एडीजी क्राइम, जयपुर-जोधपुर के पुलिस कमिश्नर, 25 जिलों के जिला मजिस्ट्रेट, एसपी, सहायक निदेशकों, सहायक अभियोजन निदेशकों एवं अभियोजन अधिकारियों को दिए गए हैं।

असली वजह दो हैं : पहली- चुनावी साल है : सरकार चुनावी साल में अब तक सरकार 500 से अधिक केस विड्रॉ कर चुकी है। यह फैसला भी उसी कड़ी में लिया गया है। इससे पहले ये केस वापस लिए...

गुर्जर आरक्षण आंदोलन- 236 केस विड्रॉ। 758 केस दर्ज किए गए थे। 364 में एफआर लग चुकी। 359 केस में चालान पेश हुए हैं।

आनंदपाल एनकाउंटर- 13 केस वापस लेने को राजी। पुलिस ने 24 केस दर्ज किए। 3 केसों की जांच सीबीआई को। अन्य 21 मामलों में से 8 में एफआर लग चुकी।

भारत बंद आंदोलन- 300 केस, वापस लेने में जुटे। 2 अप्रैल को हुई हिंसा को लेकर 300 केस दर्ज किए। कमेटी की सिफारिश पर 254 कर्मचारी बहाल किए।

दूसरी- जीएसटी की नाराजगी : जीएसटी की वजह से व्यापारिक वर्ग में नाराजगी है। इसको दूर करने के लिए सरकार ने व्यापारियों के खिलाफ दर्ज मिलावट के मामलों में इस तरह से रियायत देने का कदम उठाया है।

केस वापस नहीं होते तो उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है: मिलावट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के प्रावधान हैं। अवमानक (सब स्टैंडर्ड) पाए गए केसों में 5 लाख रु. तक के जुर्माने, अपमिश्रित (मिसब्रान्डेंड) प्रकरणों में तीन लाख तक और असुरक्षित (अनसेफ) पाए गए प्रकरणों में छह माह से आजीवन कारावास तक की सजा एवं 10 लाख रु. तक के जुर्माने का प्रावधान है।

फैक्ट फाइल: 14882 नमूने लिए प्रदेश में जनवरी, 16 से दिसंबर, 2017 तक। 3601 में मिलावट पाई गई। 1596 प्रकरणों में चार्जशीट दाखिल की स्वास्थ्य ने। 84 मामलों में कोर्ट का निर्णय आ चुका है। 1512 में जांच पेंडिंग।

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