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यूजीसी की किश्तों की ग्रांट ने आरयू में अटकाए 300 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट; नई लाइब्रेरी की बिल्डिंग तैयार, अंदर का काम अब भी अधूरा

डीएसटी पर्स में 32 करोड़ मिलने थे, पहली किश्त सिर्फ 6 करोड़ ही यूनिवर्सिटी को मिली

अर्पित शर्मा/ मोहर सिंह मीणा | Last Modified - Aug 13, 2018, 05:06 AM IST

यूजीसी की किश्तों की ग्रांट ने आरयू में अटकाए 300 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट; नई लाइब्रेरी की बिल्डिंग तैयार, अंदर का काम अब भी अधूरा

जयपुर.किश्तों में मिल रही ग्रांट के कारण राजस्थान यूनिवर्सिटी में चल रहे 300 करोड़ रुपए के रिसर्च प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। इनमें केन्द्रीय और विभागीय मिलाकर करीब 110 प्रोजेक्ट शामिल हैं। कुलाधिपति व राज्यपाल कल्याण सिंह यूनिवर्सिटी में रिसर्च के काम को रफ्तार देने की मंशा जता चुके हैं। ऐसे में किश्तों की ग्रांट के कारण प्रभावित हो रहे 300 करोड़ के रिसर्च प्रोजेक्ट राज्यपाल की इस मंशा में रुकावट बने हुए हैं।
केंद्र के स्तर के कई ऐसे बड़े प्रोजेक्ट हैं जिनमें आधी या उससे भी कम रकम यूनिवर्सिटी को प्राप्त हुई है। वहीं कई ऐसे भी हैं जिनमें ग्रांट मिलना बाकी है। यूजीसी की ओर से यूपीई प्रोग्राम में आरयू को 50 करोड़ रुपए मिलने थे लेकिन अभी तक सिर्फ 25 करोड़ ही मिले हैं। दिसम्बर 2018 में इस ग्रांट का समय भी खत्म हो रहा है। इसके लिए सितम्बर 2017 में यूजीसी की टीम ने मिड टर्म रिव्यू किया था। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आरयू को बाकी के 25 करोड़ रुपए मिलने थे। लेकिन अभी तक नहीं मिले। इससे लाइब्रेरी की बिल्डिंग तो बनकर तैयार हो गई है लेकिन अंदर का सारा काम अधूरा है। वहीं डीएसटी की ओर से मिलने वाला डीएसटी पर्स में 32 करोड़ मिलने थे लेकिन पहली किश्त सिर्फ 6 करोड़ ही यूनिवर्सिटी को मिले हैं। हालांकि इसमें 2020 तक का समय बाकी है।

दो साइंटिस्ट को मिला है पेटेंट:यूनिवर्सिटी इनोवेशन क्लस्टर में 2.2 करोड़ के बजट में से 1 करोड़ आया है जिसमें से यूनिवर्सिटी में साउथ इंडिया से आए दो साइंटिस्ट रिसर्च कर रहे हैं जिन्हें बायोटेक्नोलॉजी से जुड़ी रिसर्च में पेटेंट भी मिला है। डीआईसी- डिजाइन इनोवेशन सेंटर के मिलने वाले 10 करोड़ की ग्रांट में से आरयू को अभी 2.5 करोड़ प्राप्त हुआ है। लेकिन आरयू ने इसमें से दो कोर्स जिनमें फूड डिजाइनिंग और मेटेरियल साइंस के शुरू किये हैं। वहीं रूसा 1.0 ग्रांट में 20 करोड़ रुपए यूनिवर्सिटी को मिले थे। जिनमें से यूनिवर्सिटी में डेढ़ करोड़ के कम्प्यूटर लगाए गए। वहीं सेंट्रल लाइब्रेरी, ह्यूमिनिटी हॉल के इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएससी लैब और अन्य कार्यों में खर्च किया गया। इनके अलावा रूसा 2.0 प्रोजेक्ट में 50 करोड़ रुपए की ग्रांट की भी सैद्धांतिक मंजूरी मिली है।

वेबसाइट पर रिसर्च अपलोड नहीं:प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को राज्यपाल कल्याण सिंह ने पत्र लिखा था कि शोधों को वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। इसके बाद उन्होंने कुलपतियों पर नाराजगी जताते पूछा कि वे शोधों को वेबसाइट पर कब तक अपलोड कर देंगे। इस संबंध में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से 28 जुलाई तक जानकारी चाही थी। लेकिन अभी तक भी शोध को वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है।

- हमनें 50 करोड़ रुपए रिसर्च और 7 करोड़ एचआरडीसी के लिए प्रपोजल भेजे थे। -प्रो. दीपक भटनागर, डायरेक्टर, रिसर्च

मुख्य प्रोजेक्ट

यूपीई- 50 करोड़
डीबीटी- पर्स प्रमोशन ऑफ यूनिवर्सिटी रिसर्च एंड साइंटिफिक एक्सीलेंस- 32 करोड़
डीएसटी- प्रोग्राम सोफिस्टिकेटेड

एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटीज- 5.80 करोड़, एरिया स्टडीज प्रोग्राम- 51 लाख

रूसा- 20 करोड़

- इनके अलावा सेंटर फॉर कनवर्जिंग टेक्नोलॉजी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नैनो टेक्नोलॉजी के लिए 13 करोड़, बायो इंफोर्मेटिक्स फैसिलिटीज के लिए 10.32 करोड़, यूनिवर्सिटी इनोवेशन क्लस्टर के लिए 2.22 करोड़ मिले थे।

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