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हरियाली के नाम सालाना ढाई सौ करोड़ खर्च, लेकिन 5 साल में 3% बढ़ी, वन विभाग का तर्क यह- मवेशी ज्यादा, 60 प्रतिशत हरियाली खा जाते हैं

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:11 AM IST

प्रदेश में 33 की जगह सिर्फ 9.59 प्रतिशत ही है हरा क्षेत्र

अनुराग बासिड़ा | जयपुर

प्रदेश में हरियाली के लिए हर साल करीब ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन हरियाली 5 साल में सिर्फ 3% ही बढ़ी है। भास्कर ने वन विभाग के अधिकारियों से कारण जानना चाहा तो उनका कहना है कि प्रदेश में मवेशी बहुत हैं, 60% हरियाली तो वे ही खा जाते हैं। साथ ही वे इसके पीछे वन विभाग में 1500 रिक्त पदों का भी हवाला दे रहे हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण ने इंडिया स्टेट ऑफ़ फारेस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 5 साल पहले वर्ष 2013 में प्रदेश में हरियाली क्षेत्र 16,086 वर्ग किमी था, जो पिछले साल तक 16,572 किमी ही पहुंचा है। 5 साल में मात्र 486 वर्ग किमी में हरियाली बढ़ी है। जबकि इन 5 सालों में वृक्षारोपण पर 1270 करोड़ रु. खर्च हुए।

साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है पौधरोपण का खर्च

वर्ष पौधरोपण खर्च राशि

2013-14 58172 241.53

2014-15 60416 305.99

2015-16 64740 389.22

2016-17 60388 332.74

(खर्च राशि करोड़ रुपए में)

17 साल में जनसंख्या 21% बढ़ी, हरियाली सिर्फ 1.25%

भास्कर ने हरियाली की वास्तविकता जानने के लिए 17 सालों के आंकड़े जुटाए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि 17 साल में प्रदेश में 21 प्रतिशत जनसंख्या बढ़ गई, लेकिन हरियाली सिर्फ 1.25 प्रतिशत ही बढ़ी है।

यह है प्रदेश में हरियाली की स्थिति (सभी आंकड़े हैक्टेयर में)

वर्ष बहुत घना जंगल मध्यम घने जंगल खुले वन क्षेत्र कुल हरियाली

2013 72 4424 11590 16086

2017 78 4340 12154 16572