हाईकोर्ट का सवाल / एसिड अटैक पीड़िताें को नौकरियों में आरक्षण और 10 लाख रुपए मुआवजा राशि क्यों नहीं दे रही सरकार

फाइल फोटो फाइल फोटो
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  • हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव सहित 6 अफसरों से 24 फरवरी तक मांगा जवाब
  • प्रदेश में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए अस्पतालों में अलग वार्ड तक नहीं है

Dainik Bhaskar

Jan 25, 2020, 01:00 AM IST

जयपुर. हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है- एसिड अटैक पीड़िताें काे सरकारी नौकरियों में दिव्यांग कोटे में आरक्षण क्यों नहीं दे रहे? पीड़ितों को दी जा रही मुआवजा राशि 3 लाख रुपए को बढ़ाकर 10 लाख रुपए क्यों नहीं कर रहे? हाईकोर्ट ने यह भी पूछा- एसिड अटैक पीड़ितों के कल्याण के लिए क्या कर रहे हो?

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख कार्मिक सचिव, प्रमुख गृह सचिव, प्रमुख सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव और प्रमुख स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर 24 फरवरी तक जवाब मांगा है। जस्टिस सबीना व एनएस ढड्‌ढा की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश अधिवक्ता शालिनी श्योराण की पीआईएल पर दिया।

प्रदेश में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए अस्पतालों में अलग वार्ड नहीं

  • पीआईएल में कहा गया है- एनसीआरबी आंकडों के तहत वर्ष 2018 में एसिड अटैक की 228 घटनाएं हुई, जबकि खुले बाजार में एसिड बिना किसी रोक-टोक और पहचान उजागर किए मिल रहा है। 
  • एसिड बेचने वाला न तो खरीदार का रिकॉर्ड रखता है और न ही एसिड खरीदने का कारण पूछता है, जबकि विष अधिनियम, 1919 के संबंधित नियम नहीं बनाने के कारण इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं किया जा रहा। 
  • सुप्रीम कोर्ट तय कर चुका कि निजी अस्पताल में एसिड अटैक पीड़ितों का फ्री इलाज हो, लेकिन अस्पतालों में अलग से कोई वार्ड नहीं है। उन्हें बर्न वार्ड में ही दूसरे मरीजों के साथ ही रखा जाता है। 
  • याचिका में हरियाणा राज्य का हवाला देते हुए कहा कि वहां पर एसिड अटैक पीड़ितों को 8 हजार रुपए महीना राशि दी जाती है, इसलिए यहां पर भी राज्य सरकार एसिड अटैक पीड़ितों के लिए पुनर्वास की योजना बनाए और दिव्यांग कोटे में उन्हें नौकरियों में आरक्षण दे। इसके अलावा मुआवजा राशि को भी तीन लाख रुपए से बढ़ाकर दस लाख रुपए किया जाए।
  • हाईकोर्ट ने इस याचिका पर मुख्य सचिव सहित 6 अफसरों से 24 फरवरी तक जवाब मांगा है।
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