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ग्रेवी को चटखारे लेकर खाना भूल जाएंगे, लाल दिखाने कपड़ा धोने वाला सिंथेटिक रंग मिलाकर परोसा जाता था ग्राहकों को; 2 रु. Kg खरीदते थे फेंकने वाली सब्जी

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 11:37 AM IST

घातक...अल्सर, स्किन कैंसर और किडनी को खराब कर सकता है ऐसा भोजन

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भीलवाड़ा (राजस्थान). नागौरी गार्डन स्थित जेके चलता-फिरता रेस्टोरेंट में क्वालिटी को लेकर सब कुछ चलता-फिरता है। यहां खाना खाते वक्त जिस ग्रेवी के आप चटकारे लेते हो उसका रंग लाल दिखाने और मटर के दाने को हरा करने के लिए उनमें कपड़े धोने के लिए काम में लिया जाने वाला सिंथेटिक कलर मिलाया जा रहा था। यह सच मंगलवार को तब सामने आया जब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां जांच के लिए पहुंची।

टीम को रेस्टारेंट में गोभी, आलू, मटर और दाल की सड़ी-गली सब्जियां मिली, जिसे फिंकवा दिया गया। पड़ताल में सामने आया कि जानवरों को खिलाने लायक सब्जियां 2-4 रुपए किलो में खरीदी जाती हैं फिर ग्रेवी का रंग लाल और उसमें हरापन दिखाने के लिए सिंथेटिक कलर मिलाकर वहां आने वाले लोगों को परोसते हैं। टीम को वहां पर सिंथेटिक कलर के दो डिब्बे भी मिले। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जो कलर सब्जियों को लाल व हरा दिखाने के लिए मिलाया जा रहा था उससे कपड़ों पर कलर किया जाता है। रेस्टोरेंट में कलर मिलाकर सब्जी तैयार की जा रही थी कि अचानक टीम पहुंच गई और रंगे हाथों पकड़ लिया। टीम ने कुल 4 स्थानों पर कार्रवाई की। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत लिए सैंपल जांच के लिए जयपुर भिजवाए हैं।

घातक...अल्सर, स्किन कैंसर और किडनी को खराब कर सकता है ऐसा भोजन


मसाला, ग्रेवी, पनीर व रंग के नमूने लिए...


खाद्य सुरक्षा अधिकारी आनंद चौधरी ने बताया कि मंगलवार को नागौरी गार्डन में जेके चलता-फिरता रेस्टोरेंट पर सब्जियों में प्रतिबंधित कृत्रिम रंग डालते हुए रंगे हाथों पकड़ गया। रेस्टोरेंट से मसाला, ग्रेवी, पनीर व रंग के नमूने लिए हैं। इसे जयपुर भिजवाया जाएगा।

सिंथेटिक रंगों से ऐसी खतरनाक बीमारियां जिनका इलाज मुश्किल...


डॉक्टर्स के मुताबिक जो सिंथेटिक कलर सब्जियों में मिलाया जा रहा था वह कैंसर जैसी घातक बीमारी का भी कारण है। इनसे कैंसर के अलावा पेट का अल्सर, स्किन कैंसर, एलर्जी, किडनी को भी खतरा हो सकता है। ये ऐसी बीमारियां हैं जिनका इलाज बहुत मुश्किल है।

अशोका रेस्टोरेंट, अलास्का रिसोर्ट व श्रीनाथ बेकर्स से भी लिए सैंपल


* अशोका रेस्टोरेंट से दही, हल्दी पाउडर के नमूने लिए। यहां रेस्टोरेंट में खाद्य उत्पादों में शुद्वता व सफाई रखने के निर्देश दिए।
* आटूण के पास संचालित अलास्का रिसोर्ट से पनीर व मैदा के नमूने लिए गए। यहां किचन में काम कर रहे कुक व अन्य कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच कराने के लिए कहा। यहां पिछले दिनों फूड प्वाइजनिंग हो गई थी।
* श्रीनाथ बेकर्स से केक बनाने की सामग्री के नमूने लेकर जांच के लिए जयपुर प्रयोगशाला भिजवाए गए।

ये जानना जरूरी...क्योंकि सवाल आपकी सेहत का है


1. छोटे बच्चों को दाल का पानी पिलाने की सलाह दी जाती है। लेकिन...इस सिंथेटिक कलर वाली दाल का पानी पीने से शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाएगा। न्यूरो संबंधी परेशानियां होंगी। पैर टेढ़े होने लगेंगे। इलाज भी संभव नहीं। फूड कलर के लगातार सेवन से कैंसर का भी खतरा।


2. गर्भवती महिलाओं और कैंसर रोगियों को हाई प्रोटीन के लिए दालें खाने को कहा जाता है। लेकिन...रंग मिली दाल खाने से गर्भ में पल रहे बच्चें का सातवें महीने में ही विकास रुक सकता है। इससे डिलीवरी के दौरान बच्चे का वजन 1 से डेढ़ किलो भी रह सकता है। बच्चे के अंग भी छोटे हो सकते हैं।

- डॉ. अरुण गौड़, सीनियर फिजिशियन, एमजी हॉस्पिटल

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