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जयपुर. राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को राजस्थान आवासन बोर्ड (संशोधन) विधेयक-2020 ध्वनिमत से पारित हुआ। इस विधेयक के पारित होने से हाउसिंग बोर्ड की शक्तियों में इजाफा होने से सशक्त हुआ है। अब बोर्ड खुद की भूमि और उस पर बनी हुई सम्पत्ति से अतिक्रमण हटा सकेगा। इसके साथ ही बोर्ड को यह अधिकार मिला है कि वह किश्तों की बकाया राशि एवं लीजमनी की बकाया राशि को वसूल कर सकेगा। बोर्ड ऐसे सम्पत्ति मालिकों के खिलाफ भी कुर्की की कार्रवाई करेगा, जिन्हांेने बकाया राशि का भुगतान ही नहीं किया है।
बकाया वसूली के अधिकार मिलने से बोर्ड की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी
हाउसिंग बोर्ड कमिशनर पवन अरोड़ा ने बताया कि बोर्ड की योजनाओं में भूमि अधिग्रहण के बाद अन्य सुविधाएं डवलप करने व आवासों का निर्माण करने के बाद आमजन को आवंटित करने में समय लगता है। इस अवधि में कई बार अतिक्रमियों द्वारा सम्पत्ति पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण कर लिया जाता था, लेकिन इनको हटाने की शक्तियां आवासन बोर्ड अधिनियम में नहीं थी। राजस्थान आवासन बोर्ड अधिनियम 1970 खण्ड 2 में धारा 51 ख जोड़ी गई है, जिससे मंडल को यह अधिकार मिल गया है कि वह अपनी सम्पत्ति से खुद अतिक्रमण हटा सकेगा।
अधिनियम 1970 के खण्ड 2 में धारा 51 क जोड़ी गई
अरोड़ा ने बताया हाउसिंग बोर्ड अधिनियम 1970 के खण्ड 2 में धारा 51 क जोड़ी गई है। इसमें आवंटियों से किश्तों की राशि और लीज मनी वसूलने का अधिकार होगा। बकाया न चुकाने वालों की सम्पत्ति की कुर्की का भी अधिकार होगा। विकास एवं आवासन मंत्री शांति धारीवाल ने विधेयक को चर्चा के लिए सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पर सदन में हुई चर्चा के बाद धारीवाल ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा पूर्व में बनाए गए करीब 23 हजार आवास बिक्री के अभाव में पड़े हुए जर्जर हो रहे थे, इसलिए 25 से 50 प्रतिशत तक की छूट देकर इनकी बिक्री की जा रही है।
अवैध निर्माण हटाने का जिम्मा नगरीय निकायों का ही
धारीवाल ने कहा हाउसिंग बोर्ड की भूमि से ही अतिक्रमण हटाने का अधिकार दिया गया है। आवासीय कॉलोनियों में अवैध निर्माण हटाने का जिम्मा नगरीय निकायों का ही है। अतिक्रमियों को धारा-51 के तहत सजा का प्रावधान कोर्ट के माध्यम से ही है। ऐसा नहीं है कि किसी आरोप पर बोर्ड अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं होगी। किसी अधिकारी पर लगे आरोपों का आधार होगा तो अधिकारियों पर भी कार्यवाही होगी। बोर्ड से संबंधित पौने चार हजार प्रकरणों के निस्तारण के लिए समझौता समिति तथा लोक अदालतें बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।
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