मानवाधिकार आयोग / बारातियों पर पथराव की घटना को डिप्टी एसपी ने फर्जी बताया, एएसपी ने बताया सच, अब डीजीपी से पूछा सच कौन?

Human rights commission raises question on the working style of police
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Human rights commission raises question on the working style of police

  • मानवाधिकार आयोग ने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल
  • अनुसंधान गलत करने वाले अधिकारी पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई

Oct 31, 2018, 12:57 PM IST

जयपुर। राज्य मानवाधिकार आयोग ने बारातियों पर पथराव के दो साल पुराने एक मामले में गलत अनुसंधान करने वाले अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने पर डीजीपी से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।

पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने कहा है कि किसी बालिका की शादी में बारात के साथ में गंभीर अपराध कारित किया जाता है और ऐसे गंभीर अपराध में शिथिलता से अनुसंधान किया जाता है।  पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आयोग ने कहा कि गलत अनुसंधान करने वाले के विरुद्ध पुलिस विभाग की ओर से कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है तो निश्चित ही यह अत्यन्त खेदजनक स्थिति है।

आयोग ने डीजीपी से पूछा है कि ऐसे गंभीर आरोपों के प्रकरण में अनुसंधान में देरी के क्या कारण रहे। पूर्व अनुसंधान अधिकारी की ओर से अभियुक्तों के प्रभाव एवं पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर झूठी एफआर तैयार करने पर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई? आयोग ने यह भी सवाल किया है कि दो महीने तक चालान कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया और प्रकरण में वर्तमान स्थिति क्या है। इन सभी बिंदुओं पर डीजीपी आगामी 22 जनवरी से पहले अपना मत आयोग के समक्ष पेश करें।
 

अलवर जिले के खेरली थाना क्षेत्र में 9 दिसंबर, 2016 की रात करीब आठ बजे परिवादी कमल सिंह की बहन की बारात विदाई की रस्म के दौरान नामजद आरोपियों ने उत्पात मचाया। पथराव में बाराती घायल हो गए और भीमराव अंबेडकर की मूर्ति तोड़ दी गई थी। आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किए जाने एवं राजीनामे का दबाव बनाने के आरोपों के चलते कमल सिंह ने आयोग में परिवाद पेश किया था।

अलवर एसपी ने आयोग के समक्ष जो तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की, उसमें प्रकरण के प्रारंभिक अनुसंधान अधिकारी सीओ लक्ष्मणगढ़ अकलेश शर्मा ने मामला झूठा मानते हुए अंतिम प्रतिवेदन की सिफारिश की।

वहीं, अलवर ग्रामीण के एएसपी मूलसिंह ने कराई गई जांच में माना कि पूर्व अनुसंधान अधिकारी ने मुल्जिमान के पक्ष के प्रभाव में आकर एवं पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर मामले को झूठ करार दिया। जबकि, अनुसंधान सत्यापन से साक्ष्यों के विश्लेषण से घटना की पुष्टि होती है।

 

न्यूज : मनोज शर्मा

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