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मनुष्य को आसक्ति रहित जीवन जीना चाहिए : वेदांती

3 वर्ष पहले
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संत शिरोमणि नारायण दासजी महाराज को श्रद्धांजलि स्वरूप संकट मोचन हनुमान मंदिर अंबाबाड़ी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गुरुवार को व्यासपीठ से महंत हरिशंकर दास वेदांती ने जड़ भरतजी का प्रसंग सुनाया।

उन्होंने बताया कि मनुष्य को आसक्ति रहित जीवन जीना चाहिए। संसार मे प्राप्त हुई वस्तुएं, संबंध सब भगवान के दिए हुए हैं। उनमें आसक्त नहीं होकर अपना कर्म करना चाहिए। अजामिल का प्रसंग सुनाते हुए भगवान नाम की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि अजामिल ने संतों के कहने पर अपने पुत्र का नाम नारायण रख लिया और अंत समय में नारायण के उच्चारण से ही उनका कल्याण हुआ। भक्त प्रहलाद की चर्चा में बताया कि कुल में एक भी बालक धर्मप्रेमी भगवतनुरागी आ जाता है तो पूरे कुल का उद्धार हो जाता है। भक्त प्रहलाद दैत्य कुल में पैदा हुए पिता के अनेक तरह की यातना देने के बाद भी अंत में भगवान से अपने पिता के लिए मोक्ष मांग लिया। पुत्र धर्म का पालनकर कुल का उद्धार करा दिया। कथा में शुक्रवार को कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर गौसेवी संत प्रकाशदास महाराज भजनामृत सत्संग भी करेंगे।

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