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छात्रसंघों में निर्दलीयों की जीत ने भाजपा-कांग्रेस में मचाई खलबली

राजस्थान यूनिर्वसिटी में तीसरी बार निर्दलीय प्रत्याशी का जीतना और प्रदेश के अन्य चार विश्विविद्यालयों में...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:30 AM IST
राजस्थान यूनिर्वसिटी में तीसरी बार निर्दलीय प्रत्याशी का जीतना और प्रदेश के अन्य चार विश्विविद्यालयों में निर्दलीयों की जीत ने भाजपा-कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव में बड़ी चुुनौती के संकेत दे दिए हैं। अन्य विश्वविद्यालयों में भी निर्दलीयों ने भले ही जीत हासिल नहीं की हो लेकिन प्रमुख छात्र संगठन एनएसयूआई और एबीवीपी को जबर्दस्त टक्कर दी है। इस चुनाव ने यह साफ किया है कि राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों का युवाओं में क्रेज कम हुआ है और छात्रशक्ति में भी निर्दलीयों के तौर पर तीसरी शक्ति का उदय हो रहा है। मंगलवार को प्रदेशभर के छात्रसंघों के चुनाव परिणाम में एबीवीपी के चार, एनएसयूआई के दो और निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ने वाले पांच उम्मीदवारों ने विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर विजय हासिल की है।

इस जीत में सत्ताधारी पार्टी भाजपा के लिए जहां लगातार गिरती सीटों से चिंता की स्थिति पैदा हुई है वहीं राज्य के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के महज दो छात्रसंघ अध्यक्ष जीतना आगामी चुनावों में युवाओं के बीच कमजोर स्थिति को दर्शा रहा है। पिछली बार एबीवीपी ने पांच विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ अध्यक्ष पद हासिल किए थे। वहीं एनएसयूआई ने पिछली बार भी दो यूनिविर्सिटी अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी।

राजनीतिक दलों को युवाओं ने नकारा

राजस्थान यूनिवर्सिटी समेत बीकानेर की महाराजा गंगासिंह विश्विविद्यालय, वैटनरी यूनवर्सिटी, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और कोटा यूनिवर्सिटी में निर्दलीय अध्यक्ष चुने गए हैं। इन पांचों यूनिवर्सिटी में जीत हासिल करने वाले अध्यक्ष उम्मीदवार चुनाव में किसी न किसी छात्रसंगठन से टिकट की दावेदारी में थे लेकिन चयन करने वालों ने इन सबको नकार कर दूसरों को टिकट दिए। इन पांचों जगह युवाओं ने राजनीतिक दलों से जुड़े छात्रसंगठनों के घोषित उम्मीदवारों को नकार कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले युवाओं का साथ निभाया। यानी राजनीतिक दलों को छात्रशक्ति ने नकार दिया। आने वाले चुनावाें के लिए भाजपा-कांग्रेस के लिए यह सबक से कम नहीं होगा कि यदि टिकट वितरण में सही चेहरे और ग्राउंड पर काम करने वाले लोगों को टिकट नहीं दिया गया तो परिणाम इससे मिलते जुलते ही रहेंगे।