राजस्थान / राज्य में पहली बार रेयर इंसुलिनोमा टयूमर की हुई पहचान



इंसुलिनोमा टयूमर की पहचान करने वाली टीम। इंसुलिनोमा टयूमर की पहचान करने वाली टीम।
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इंसुलिनोमा टयूमर की पहचान करने वाली टीम।इंसुलिनोमा टयूमर की पहचान करने वाली टीम।

  • मॉलिक्यूलर फंक्शनल इमेजिंग टेस्ट के जरिए कैंसर की हुई जांच
     

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 02:49 PM IST

जयपुर। शरीर में इंसुलिन की मात्रा को तेजी से बढाने वाले कैंसर "इंसुलिनोमा ट्यूमर" की पहचान राज्य में पहली बार हुई है। प्रदेश के भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के न्यूक्लियर मेडिसन विभाग में इस रेयर ट्यूमर को डायग्नोस किया गया है।

 

अग्नाशय के अंदर (1.3 से.मी.) इंसुलिनोमा ट्यूमर की पहचान गैलियम-68 डॉटानोक पैट सीटी स्केन के जरिए की गई है। इस स्केन को मॉलिक्यूलर फंक्शनल इमेजिंग टेस्ट कहा जाता है। बीएमसीएचआरसी के न्यूक्लियर मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ जे के भगत और सहायक चिकित्सक डॉ. हेमंत राठौर की टीम ने इस ट्यूमर की पहचान की है।

 

डॉ हेमंत राठौर ने बताया कि इंसुलिनोमा ट्यूमर एक तरह का न्युरोऐण्डोक्राईन ट्यूमर होता है जिसमे अत्यधिक मात्रा मे सोमेटोस्टेटिन व गलायकोप्रोटिन 1 नामक रिसेपटार होता है, जिसे गैलियम-68 डॉटानोक पैट सिटी स्केन के द्वारा खोजा जा सकता है। डॉ जे के भगत ने बताया कि इंसुलिनोमा ट्यूमर का साइज बहुत छोटा होता है। इसकी वजह से इसकी पहचान साधारण सिटी स्केन या एमआरआई से करना संभव नहीं होता है।

 

इसके लिए एडवांस डायग्नोसिस मशीन की जरूरत होती है। चिकित्सालय में मौजूद प्रदेश की पहली और एक मात्र गैलियम-68 मशीन के जरिए इस रोग की पहचान की गई है। चिकित्सालय के अधिशासी निदेशक मेजर जनरल डॉ एस सी पारीक (सेवानिवृत) ने बताया कि राज्य के लोगों को किसी भी तरह के कैंसर की जांच और उपचार के लिए प्रदेश के बाहर ना जाना पड़ा इस उद्देश्य से चिकित्सालय समय-समय हर आधुनिक तकनीक को चिकित्सालय से जोड़ रहा है।

 

इंसुलिनोमा ट्यूमर के लक्षण और उपचार

 

डॉ राठौर ने बताया कि इंसुलिनोमा ट्यूमर के रोगी के शरीर में इंसुलिन की मात्रा तेजी से बढ़ती जाती है, जिसकी वजह से ग्लूकोज का स्तर घटता चला जाता है। आमतौर पर एक व्यक्ति में ग्लूकोज की मात्रा (90 से 110 मिलिग्राम/डी एल) होती है, जो इस रोग में बार-बार घटकर (50) से भी नीचे तक पहुंच जाती है। इससे रोगी को कमजोरी आती है, पसीना आकर रोगी बेसुध हो जाता है। कई रोगियों में ग्लूकोज का लेवल कम होने पर मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उपचार के तहत रोगी का ऑपरेशन कर इस ट्यूमर को निकाला जाता है।

 

न्यूज व फोटो : संदीप शर्मा

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