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जयपुर/नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को#SheInspireUs की मुहीम शुरू की। इसमें उन्होंने रविवार को सात महिलाओं को अपने सोशल मीडिया हैंडल सौंपे। इनमें एक नाम है मालविका अय्यर का। मालविका का बचपन राजस्थान के बीकानेर में बीता था। 13 साल की उम्र में ही बीकानेर में हुए एक हादसे में मालविका ने अपने दोनों हाथ खो दिए थे। इंटरनेशनल मोटिवेशनल स्पीकर, डिसेबल्ड के हक के लिए लड़ने वाली एक्टिविस्ट मालविका का जन्म तमिलनाडु में हुआ था। सोशल वर्क के साथ ही फैशन मॉडलिंग में भी मालविका ने अपनी पहचान बनाई है। उनके पिता बी. कृष्णन वाटर वर्क्स डिपार्टमेंट में इंजीनियर और मां हेमा कृष्णन हाउस वाइफ हैं।
जींस की फटी जेब चिपकाने के लिए भारी वस्तु समझकर उठा लाई थी जिंदा हैंड ग्रेनेड
मालविका ने पिछले दिनों दिए बताया था कि उनके पिता की पहली पोस्टिंग बीकानेर में हुई थी। तब वह 13 वर्ष की थी और नौवीं कक्षा में पढ़ रही थी। इस दौरान वह एक भयानक हादसे से गुजरी। 26 मई 2002 को रविवार का दिन था। कुछ मेहमान उनके घर आए थे। तब उनकी बहन रसोई में चाय बना रही थीं। वहीं, मां कूलर में पानी भरने गई थी। अपनी जींस की फटी जेब को फेविकोल से चिपकाने का आइडिया मालविका के दिमाग में आया। वह किसी भारी चीज की तलाश में गैराज में चली गई। ताकि फेविकोल से जेब को चिपकाने के बाद उसे भारी वस्तु से दबा सकें। उनके घर के पास ही सरकारी गोला-बारूद डिपो था। इस डिपो में आग लगने की वजह से इलाके में उसके शेल बिखर गए थे। गैराज में भारी वस्तु की तलाश में गई मालविका को एक हैंड ग्रेनेड नजर आया। वह जिंदा बम था।
मालविका उसे भारी वस्तु उठाकर घर की तरफ चली। तभी ग्रेनेड मालविका के हाथों में फट गया। इसके चलते उसके हाथों के अलावा दोनों टांगों में कई फ्रैक्चर्स और नर्व सिस्टम डैमेज हो गया। इलाज के लिए उसे चेन्नई के एक हॉस्पिटल में दो साल रहना पड़ा। मालविका को कई सर्जरी से गुजरना पड़ा। उन्हें अपने दोनों हाथ खोने पड़े। उसकी हालत इतनी खराब थी कि चला भी नहीं जाता था। इन सबके बावजूद उसने खुद को इस कदर बदला कि डिसेबल से सुपरवुमन बनकर सामने आई।
मैंने जिन्दगी से हार नहीं मानी, सेंकडरी एग्जाम में टॉप किया तब राष्ट्रपति ने मिलने बुलाया
मालविका के मुताबिक, उन्होंने हाथ खोने के बावजूद हार नहीं मानीं। उन्होंने चेन्नई के एक स्कूल से प्राइवेट कैंडिडेट्स के तौर पर सेकेंडरी स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट एग्जाम में पार्टिसिपेट किया। एग्जाम में एक असिस्टेंट प्रोवाइड कराया गया। उस एग्जाम में मालविका ने 500 में से 483 मार्क्स हासिल कर स्टेट में टॉप किया। तब उन्हें राष्ट्रपति भवन की तरफ से एक्स प्रेसिडेंट डॉ. अब्दुल कलाम आजाद से मिलने के लिए बुलाया गया। इसके बाद आगे की पढाई जारी रखी। समाज से वंचित लोगों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए 2012 में मद्रास स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क से सोशल वर्क सब्जेक्ट में एमफिल की पढ़ाई पूरी की।
इंटरनेशनल मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर बनी पहचान, मिला नारी शक्ति पुरस्कार
जब मालविका के कार्यों के बारे में पता चला तब उन्हें 2013 में चेन्नई में आयोजित ‘TEDxYOUTH’ कांफ्रेंस में मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर अपनी बात रखने के बुलाया गया। मालविका ने उसके बाद से लाइफ में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें न्यूयार्क, नार्वे, इंडोनेशिया, कोरिया समेत कई अन्य देशों में अलग –अलग मौकों पर अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया गया।
अक्टूबर 2017 में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के समिट में उन्हें को-चेयर पर्सन के तौर पर भी अपनी बात रखने के बुलाया गया। वह आर्टिफिशियल हैण्ड से काम करती हैं। वह अपना ड्रेस करने से लेकर किचन में खाना बनाने का भी काम अकेले ही करती हैं। समाज में उनके योगदान को देखते हुए इस बार 'नारी शक्ति' राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए उनका सेलेक्शन हुआ। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद उन्हें राष्ट्रपति भवन में इंटरनेशनल वुमन्स डे के मौके पर सम्मानित किया।
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