इंवेंशन / वेजीटेबल ऑयल से चलेगा डीजल जेनरेटर; 10 साल बाद मिला पेटेंट, दावा- 30% सस्ता पड़ेगा

खाने वाले तेल से बाइक इंजन चलाने के लिए प्रयोग किया था, अब जेनरेटर में काम आएगी तकनीक। खाने वाले तेल से बाइक इंजन चलाने के लिए प्रयोग किया था, अब जेनरेटर में काम आएगी तकनीक।
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खाने वाले तेल से बाइक इंजन चलाने के लिए प्रयोग किया था, अब जेनरेटर में काम आएगी तकनीक।खाने वाले तेल से बाइक इंजन चलाने के लिए प्रयोग किया था, अब जेनरेटर में काम आएगी तकनीक।

  • एमएनआईटी प्रोफेसर्स ने डीजल इंजन बाइक पर किया था रिसर्च
  • नीम, रतनजाेत और जेट्राेफा जैसे नाॅन एडिबल ऑयल से चलाया गया इंजन

Dainik Bhaskar

Dec 14, 2019, 09:12 AM IST

जयपुर. एमएनआईटी के प्रोफेसर्स ने एक नई तकनीक का आविष्कार किया है, जिससे वेजीटेबल ऑयल से डीजल जेनरेटर चलाए जा सकेंगे। प्रोफेसर्स ने डीजल इंजन की बाइक चलाने पर रिसर्च की थी। मगर इसका पेटेंट 10 साल बाद हुआ है। चूंकि अब डीजल बाइक नहीं चलती हैं, ऐसे में इस तकनीक का इस्तेमाल डीजल से चलने वाले इंजन और जेनरेटर में किया जाएगा। प्रोफेसर्स का दावा है कि डीजल के मुकाबले यह 30% तक सस्ता होगा। इंजन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। धुएं के साथ कार्बन फुट प्रिंट भी नहीं बढ़ेंगे।

एमएनआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के हेड प्रो. दिलीप शर्मा और वर्तमान में एनआईटी उत्तराखंड के डायरेक्टर प्रो. एस एल सोनी, कमल खत्री और टीम ने 2009 में डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के जरिए इंडियन पेटेंट ऑफिस भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिली है।

यूं किया प्रयोग: सिर्फ 1500 रु. में लगा फ्यूल चेंजर

  • बाइक में डीजल टैंक के पास एक ओर टैंक लगाया गया। जिसमें वेजीटेबल ऑयल (नाॅन एडिबल) डाला गया।
  • दाेनाें टैंक के पाइप के पास फ्यूल चेंजर लगाया गया।
  • बाइक के साइलेंसर में हीट एक्सचेंजर लगाया गया।
  • बाइक काे डीजल माेड पर लेकर स्टार्ट किया जाता है, फिर फ्यूल चेंजर से नाॅन एडिबल ऑयल से बाइक चलती है।
  • इस ऑयल काे चेंजर से साइलेंसर तक पहुंचाया जाता है।
  • साइलेंसर से तेल गर्म हाेकर इंजन तक पहुंचता है।
  • इस सिस्टम में चार बदलाव किए गए। इनमें ऑयल के लिए टैंक, फ्यूल चेंजर वाॅल्व, साइलेंसर में हीट एक्सचेंजर और एक ब्लेड लगाई गई, जिनका खर्च करीब 1500 रु. आया।

नई तकनीक खाेजने वाले बोले- फ्री में मदद करेंगे

  • एमएनआईटी के प्राे. दिलीप शर्मा ने कहा, खेती या दूसरी जगह डीजल इंजन में यह टेक्नोलॉजी काम में आ सकेगी। किसानों की या टेक्नोलॉजी पर काम करने के लिए लाेगाें की हम निशुल्क मदद करेंगे।
  • एनआईटी उत्तराखंड के डायरेक्टर प्राे. एसएल साेनी ने बताया, बायाे डीजल बनाए बिना साइलेंसर से गर्म करके इसे फ्यूल की तरह काम में लिया जाएगा। डीजल इंजनों में यह टेक्नोलॉजी काम आएगी। 10 साल बाद पेटेंट हो सका। 
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