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जयपुर. शहर की सरकार के चुनाव की तारीख का एेलान हो चुका है। जयपुरवासी 5 अप्रैल को अपनी सरकार चुनेंगे। निगम के वार्डों की संख्या 91 से बढकर 250 होने से इस बार निगम चुनाव काफी रोचक हो गया है। इसलिए इस बार रिकॉर्ड संख्या में नामांकन दाखिल होने की संभावना है। विधायक व दोनों ही पार्टियों के पदाधिकारियों के पास दावेदार भी पहुंचने लगे हैं। शहर की सियासत को लेकर अब आपके मन में कई सवाल उठ रहे होंगे। एक्सपर्ट के बात कर भास्कर बता रहे आपसे जुड़े सवालों के जवाब।
सवाल- हैरिटेज और ग्रेटर नगर निगमों में कौन सी पार्टी के मेयर बनने की संभावना है?
जवाब- राजनीति में वैसे तो कुछ भी संभव है, लेकिन विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से वर्तमान में हेरिटेज के 96% भाग पर कांग्रेस और 4% भाग पर भाजपा का कब्जा है। इसी तरह ग्रेटर के 72% हिस्से पर भाजपा व 28% हिस्से पर कांग्रेस का कब्जा है। इसलिए हेरिटेज में कांग्रेस और ग्रेटर में भाजपा का महापौर बनने की संभावना अधिक है।
सवाल- इस बार जयपुर में मेयर की सीट किस केटेगरी के लिए आरक्षित है?
जवाब- दोनों निगमों में मेयर की सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है।
सवाल- क्या ओबीसी, सामान्य या सामान्य महिला सीट से जीती हुई ओबीसी महिला भी महापौर बन सकेगी?
जवाब- निगम के पूर्व निदेशक (विधि) अशोक सिंह का कहना है- ओबीसी, ओबीसी महिला, सामान्य या सामान्य महिला सीट से जीतने वाली ओबीसी वर्ग की महिला मेयर पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर सकती है।
सवाल- हेरिटेज व ग्रेटर में दोनों ही पार्टियों की ओर से मेयर के प्रमुख दावेदार कौन होंगे।
जवाब- ग्रेटर और हेरिटेज नगर निगम के महापौर पद इस बार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हैं। इस पद के लिए अभी किसी दावेदार का नाम सामने नहीं आया है। ....क्योंकि सबसे पहला काम टिकट लेना है। दोनों ही पार्टियों में अंदरखाने मंथन शुरू तो गया है, लेकिन पार्टियां पत्ते नहीं खोल रही है। टिकट वितरण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मेयर पद के लिए कौन दावेदार रहेगा।
दूसरे वार्ड से भी लड़ सकेंगे चुनाव :
सवाल- कोई व्यक्ति दूसरे वार्ड से भी चुनाव लड़ सकता है?
जवाब- हां, एक व्यक्ति दूसरे वार्ड से भी चुनाव लड़ सकता है। उसका नाम जयपुर नगर निगम क्षेत्र की मतदाता सूची में होना चाहिए।
सवाल- निगम चुनाव कौन लड़ने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
जवाब- चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्ति 21 साल से अधिक का हो। निगम क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम हो। कोई ऐसा आपराधिक मामला दर्ज न हो जिसमें 5 साल या इससे अधिक की सजा का प्रावधान हो। नवंबर 1995 के बाद दो से अधिक संतान न हों। नगर निगम से नो ड्यूज भी लेना होगा।
सवाल- पिछले चुनाव और इस चुनाव की तिथियों में काफी अंतर है। इससे चुनाव प्रक्रिया और मतदान पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
जवाब- इस बार नामांकन से उपमहापौर के चुनाव तक हर चीज में अधिक समय है। पिछली बार अधिसूचना से उपमहापौर के चुनाव तक 20 दिन का समय था। इस बार 19 मार्च को अधिसूचना जारी होगी। 5 अप्रैल को वोटिंग, 7 को मतगणना, 16 को मेयर व 17 को उपमहापौर का चुनाव होगा। इस बार मतगणना के बाद मेयर के लिए 9 व उपमहापौर के लिए 10 दिन का समय है। इससे पार्षदों की बाड़ेबंदी व खरीद-फरोख्त की संभावना रहेगी।
परिसीमन से फायदा किसे : हर बार भाजपा का वार्ड बना, पर दो निगम से फायदा कांग्रेस को
सवाल- जयपुर में दो नगर निगम बनने और परिसीमन करने का कांग्रेस व भाजपा में से किसे अधिक फायदा नजर आ रहा है?
जवाब- इतिहास देंखे तो परिसीमन के बावजूद हर बार भाजपा का ही बोर्ड बना है। वर्ष 2009 में परिसीमन के बाद 77 वार्ड हुए, जिसमें भाजपा को 46 मिले थे। वर्ष 2014 में 91 हुए तब भी भाजपा को 64 वार्ड मिले थे। एक निगम होता तो भाजपा काे लाभ होने की संभावना थी। निगम के दो टुकड़े होने से सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। दो में से एक निगम पर कांग्रेस का कब्जा हो सकता है।
सवाल- 250 वार्ड होने से सरकार व शहर के विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा, क्या चुनौतियां आएंगी?
जवाब- पहले 25 से 30 हजार की आबादी पर वार्ड था। अब 10 से 12 हजार की आबादी पर है। एरिया छोटा गया है। पार्षद अपने वार्ड पर फोकस कर सकेंगे। विकास कार्य होंगे। लेकिन दो निगम के हिसाब से कर्मचारियों की उपलब्धता व पर्याप्त संसाधन जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होगा।
सवाल- दोनों निगमों के पार्षदों के बैठने की क्या व्यवस्था रहेगी।
जवाब- ग्रेटर निगम के अधिकारी और पार्षद निगम के लालकोठी स्थित पुराने निगम मुख्यालय में ही बैठेंगे। जबकि हेरिटेज नगर निगम के अधिकारी और पार्षद पुराने पुलिस मुख्यालय में तैयार हो रहे निगम के नए भवन में बैठेंगे।
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