राजस्थान / सरकार-डाक्टरों की वार्ता का नहीं निकला कोई हल, 400 ऑपरेशन टले

Jaipur Resident Doctors Strike News Update: Ashok Gehlot Rajasthan Government On Strike, patient were upset
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Jaipur Resident Doctors Strike News Update: Ashok Gehlot Rajasthan Government On Strike, patient were upset

  • मरीज परेशान, मंत्री बोले तत्काल आदेश जारी करने की रेजिडेंट्स की हठधर्मिता गलत

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 02:30 PM IST

जयपुर। प्रदेश में रेजिडेंट्स की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। हजारों मरीज परेशान रहे वहीं सरकार ने कहा है कि यदि जल्दी ही रेजीडेंट काम पर नहीं लौटे हो मजबूरी में सख्ती करनी पड़ेगी। वहीं बुधवार को 400 से अधिक ऑपरेशन प्रदेश भर के अस्पतालों में नहीं हो सके। अस्पतालों में अब केवल इमरजेंसी केस ही देखे जा रहे हैं। वहीं इस दौरान मंत्री ने कहा कि तत्काल आदेश जारी करने की रेजिडेंट्स की हठधर्मिता गलत है।

सरकार में हर काम को पूरा करने की एक प्रक्रिया होती है। चिकित्सा मंत्री ने रेजिडेंट्स से अपील करने के साथ ही चेतावनी भी दी कि रेजिडेंट्स के मुद्दों पर 'सरकार संवेदनशील है,लेकिन मजबूर भी नहीं है। यदि रेजिडेंट इसी तरह हठधर्मिता पर अड़े रहे तो 'सरकार को मजबूरी में सख्त कदम उठाने होंगे'।

ये हैं मांग : रेजिडेंट्स हॉस्टल में कमरा उपलब्ध नहीं होने पर अन्य राज्यों की तर्ज पर आवासीय भत्ता दिया जाए, हाल ही बढ़ाई पीजी और सुपर स्पेशीलिटी की फीस का आर्डर वापस लिया जाए] चिकित्सकों के लिए अस्पतालों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाए।

हड़ताल से नाराजगी

रेजीडेंट्स की मांग और काम पर नहीं आने से आमजन में नाराजगी है। बुधवार को जिन मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो सके उनके परिजन खासे नाराज दिखे। उन्होंने जमकर अस्पताल प्रशासन, सरकार और रेजीडेंट्स को कोसा। उनका कहना था कि डॉक्टर्स की संवेदनाएं खत्म हो गई हैं, इसीलिए अब वे आए दिन मारपीट की घटनाओं के शिकार होते हैं।

रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल प्रदेश के हजारों मरीजों पर भारी पड़ रही है। मंगलवार को एसएमएस सहित मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध अस्पतालों में पहले से प्रस्तावित 80 से अधिक ऑपरेशन टले। तीन सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार सुबह नौ बजे से की गई हड़ताल को खत्म करने के लिए सरकार स्तर पर रेजीडेंट से दो बार वार्ता हुई, लेकिन लिखित आश्वासन नहीं मिलने से रेजीडेंट ने काम बंद रखने का निर्णय किया।

अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है और सीनियर डॉक्टर्स, एमओ सभी को लगाया गया। इसके बावजूद इमरजेंसी केस ही देखे जा सके। मालूम हो कि ओपीडी से लेकर वार्डो, ऑपरेशन में रेजीडेंट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 1300 से अधिक रेजीडेंट के हड़ताल में शामिल होने से एसएमएस, जेके लोन, महिला, कांवटिया, गणगौरी, जनाना अस्पताल में इलाज प्रभावित रहा।

न्यूज व फोटो : संदीप शर्मा

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