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राजनीति की हिस्सेदारी / विधानसभा में महिलाएं : शून्य से लेकर इतिहास रचने तक



Journey of women in rajasthan politics
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Journey of women in rajasthan politics
  • एक दखल से बढ़ी पहुंच, आज सदन में बराबरी के सम्मान का सफर

Dainik Bhaskar

Oct 16, 2018, 08:29 PM IST

जयपुर। राजस्थान की प्रथम विधानसभा के आम चुनाव में महिलाओं का प्रतिनिधित्व जीरो था। यानी एक भी महिला पहले चुनाव में निर्वाचित होकर विधानसभा नहीं पहुंची। अब 14वीं विधानसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी शून्य से साढ़े तेरह प्रतिशत तक बढ़ गई है। यह देशभर की विधानसभाओं में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व है।
 

तब पंडित नेहरू ने यह कहा था

  1. राजस्थान की महिलाओं में राजनीतिक जागृति की कमी पर टिप्पणी करते हुए 31 मार्च 1954 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पं.जवाहरलाल नेहरू ने अफसोस जताते हुए कहा था- कल मैं आपकी विधानसभा देखने गया था। मुझे यह देखकर बड़ी हैरत हुई कि 160 सदस्यों वाले सदन में महिला विधायक सिर्फ एक है। राजस्थान महिलाओं के मामले में बहुत पिछड़ा हुआ है। हमें उन्हें आगे लागा होगा। 

  2. वास्तव में पं. नेहरू की यह पीड़ा सही थी, जो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास के आवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक बैठक में व्यक्त की थी। उस समय एकमात्र महिला विधायक यशोदा देवी थीं, जो समाजवादी पार्टी के टिकट पर बांसवाड़ा क्षेत्र से उपचुनाव में निर्वाचित हुई थीं।

  3. इसके दो माह बाद यानी जून 1954 में आमेर-बी विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव हुआ। यहां से आम चुनाव में निर्दलीय विधायक संग्राम सिंह ने इस्तीफा दे दिया था।

  4. इतिहास पढ़ाती थीं कमला बेनिवाल

    इस उपचुनाव में दलीय प्रत्याशी बनाने के लिए कांग्रेस के रामकरण जोशी गुट ने भूदेव शर्मा का नाम भिजवाया, जो आम चुनाव में हार गए थे। इसके विपरीत चौधरी कुंभाराम गुट ने कमला बेनीवाल के नाम की सिफारिश की जो उस समय जयपुर के किसी सरकारी स्कूल में इतिहास की अध्यापिका थीं। इस नाम के पीछे चौधरी की सोच थी कि दो महीने पहले ही पं. नेहरू ने महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात कही थी।
     

  5. इसलिए उन्हें कमला का नाम उपयुक्त लगा। वजह ये भी थी कि राजस्थान के एक बड़े स्वतंत्रता सेनानी चौधरी नेतराम सिंह की बेटी हैं और वनस्थली विद्यापीठ की पहली स्नातक छात्रा हैं। जहां तक उनके सरकारी सेवा में होने का प्रश्न है, वहां से त्यागपत्र दिलवा लेंगे। 
     

  6. ...और कमला बेनिवाल मंत्री बन गईं

    कांग्रेस ने चौधरी कुंभाराम का प्रस्ताव मानकर कमला बेनीवाल को प्रत्याशी बनाया। वे उपचुनाव जीत गईं। बाद में 6 नवंबर 1954 में कांग्रेस विधायक दल के नेता के लिए जयनारायण व्यास और मोहनलाल सुखाड़िया के बीच हुए चुनाव में कुंभाराम की सुखाड़िया के पक्ष में अहम भूमिका रही। उनके सुझाव पर कमला बेनीवाल को सुखाड़िया मंत्रिमंडल में उपमंत्री के रूप में शामिल कर लिया गया। 
     

    स्टोरी : सीताराम झालानी (वरिष्ठ पत्रकार) 
     

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