राजस्थान / पटरी पर 8 एमएम फ्रैक्चर देख की-मैन ने लाल झंडी दिखा ट्रेन रुकवाई, हादसा टला



की-मैन रमेश चंद मीणा की सतर्कता से रेल हादसा टला। की-मैन रमेश चंद मीणा की सतर्कता से रेल हादसा टला।
बांदीकुई के पास रेलवे जयपुर-दिल्ली ट्रैक पर आया 8 एमएम का फ्रैक्चर। बांदीकुई के पास रेलवे जयपुर-दिल्ली ट्रैक पर आया 8 एमएम का फ्रैक्चर।
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की-मैन रमेश चंद मीणा की सतर्कता से रेल हादसा टला।की-मैन रमेश चंद मीणा की सतर्कता से रेल हादसा टला।
बांदीकुई के पास रेलवे जयपुर-दिल्ली ट्रैक पर आया 8 एमएम का फ्रैक्चर।बांदीकुई के पास रेलवे जयपुर-दिल्ली ट्रैक पर आया 8 एमएम का फ्रैक्चर।

  • अक्टूबर से नौंवी बार आया फ्रैक्चर
  • आधा दर्जन ट्रेनों को धीमी गति से निकाला
     

Dainik Bhaskar

Feb 08, 2019, 12:10 PM IST

बांदीकुई (दौसा)। दौसा जिले में बांदीकुई के पास एक की- मैन की सतर्कता से शुक्रवार को बड़ा रेल हादसा टल गया। रूटीन चैकअप के दौरान की- मैन ने लाल झंडी दिखाकर वहां आ रही सवारी गाड़ी को रुकवा दिया जिससे बड़ा हादसा टल गया। रेल प्रशासन को सूचना देकर ट्रेनों को धीमी गति से निकाला गया। पिछले चार माह में जयपुर-दिल्ली रेल मार्ग पर यह नौवां फ्रैक्चर है।

इंटरसिटी को लाल झंडी दिखाकर रोका

  1. बांदीकुई रेलवे स्टेशन से करीब आठ किलोमीटर दूर गुल्लाना के पास किमी संख्या 129 पर की- मैन रमेश चंद मीणा को रेल लाइन में फ्रैक्चर दिखाई दिया। तभी दूसरी ओर से इंटरसिटी एक्सप्रेस आ रही थी। मीणा ने ट्रेन की ओर तेजी से चलते हुए लाल लाल झंडी लहरानी शुरू कर दी। ड्राइवर ने इसे देख लिया और ट्रेन को रोक दिया।

  2. वहां पहुंची तकनीकी टीम ने जोगल प्लेट बांधकर फ्रैक्चर को ठीक किया तब जाकर ट्रेन को निकाला गया। इस बार आठ एमएम का फ्रैक्चर था। इससे ट्रेन करीब आधा घंटा वहीं रेलमार्ग प खड़ी रही। पटरी में फ्रैक्चर से आश्रम एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, डबल डेकर एक्सप्रेस, हिसार-जयपुर फास्ट पैसेंजर सहित आधा दर्जन ट्रेनों को धीमी गति से निकाला गया।

  3. चार माह में नौवां फ्रैक्चर

    रेलवे की एक टीम बांदीकुई रेलवे स्टेशन के करीब डेढ़ किलोमीटर के एरिए में लगातार गश्त करती है। इस एरिया में पिछले चार माह में यह नौवां फ्रैक्चर है। एक बार तो यहां 10 एमएम का फ्रैक्चर हो गया था। इससे रेलवे में हड़कंप मच गया था। समय पर इसे ठीक करने के कारण कोई हादसा नहीं हुआ। हालांकि इस बार का फ्रैक्चर और दूर हुआ।
     

  4. इसलिए रहता है फ्रैक्चर का खतरा

    यहां ट्रैक करीब 25 साल पुराना है। यहां रेलवे ने गर्मियों ने एक मशीन से जांच की तो पता चला कि यहां सर्दियों में फ्रैक्चर का खतरा ज्यादा है। इसलिए रेलवे की पेट्रोलिंग टीम यहां पर हर दो-दो किमी के एरिए में पटरियों की जांच करती रहती है। रेलवे ने यहां ट्रैक पर क्रॉस का निशान भी लगवा रखा है। अब रेलवे यहां ट्रैक बदलने की कार्रवाई कर रहा है।

     

    न्यूज व फोटो : लोकेश पाठक
     

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