जेके लोन अस्पताल में 35 दिन में 107 बच्चों की मौत, सचिन पायलट बोले- यह दिल दहला देने वाली घटना, जिम्मेदारी तय हो

2 वर्ष पहले
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  • जेके लोन सरकारी अस्पताल में 35 दिन से बच्चों की मौतें हो रहीं, शनिवार को भी एक नवजात ने दम तोड़ा
  • जांच समिति ने बच्चों की मौत की वजह सर्दी बताई, संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में हीटर और वॉर्मर जैसे उपकरण नाकाफी
  • शनिवार को स्थानीय सांसद और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कोटा में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की

कोटा. शहर के जेके लोन अस्पताल में मरने वाले बच्चों का आंकड़ा 35 दिन में 107 पहुंच गया। शुक्रवार को दो और शनिवार सुबह एक नवजात बच्ची ने दम तोड़ा। दोपहर में राज्य के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट अस्पताल का दौरा करने पहुंचे। उन्होंने कहा- मैं समझता हूं कि यह कोई छोटा-मोटा हादसा नहीं है, यह दिल दहला देने वाली घटना है। पूरे मामले में किसी न किसी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। प्रशासन, मेडिकल, सरकार में से कोई न कोई तो जिम्मेदार हो। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी पीड़ित परिवारों से मिलने कोटा पहुंचे थे।


सचिन पायलट ने कहा- मैं यहां आया हूं, मेरे साथ कोई नारे लगाने वाला नहीं आया। न मैंने नारे लगाने दिए हैं। मैंने जवाबदेही और जिम्मेदारी की बात की है। मैंने इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया। मैं जिन परिवार वालों से मिला हूं, उन्होंने कहा कि हमारा तो बच्चा चला गया, लेकिन भविष्य में ऐसा न हो, इसका इंतजाम होना चाहिए। जिस मां ने अपनी कोख में नौ माह बच्चे को रखा, उसे खोने की पीड़ा वही जानती है। इस मामले में हमारी प्रतिक्रिया ज्यादा संवेदनशील और ज्यादा सहानुभूतिपूर्ण होनी चाहिए थी।

पिछली सरकार को जिम्मेदार कहने से हालात नहीं बदलेंगे: पायलट
पायलट ने यह भी कहा कि 13 महीने सरकार में रहने के बाद भी अब अव्यवस्थाओं या कमियों के लिए पूर्व की सरकार पर निशाना साधने से कोई हल नहीं निकलेगा। क्योंकि, अगर उन्होंने अपना काम ठीक तरह से किया होता, तो जनता उन्हें सत्ता से बाहर नहीं करती। हमें जनता ने चुना है, हमें जिम्मेदारी का सामना करना पड़ेगा, जनता की हमसे अपेक्षाएं हैं। इससे पहले जोधपुर एम्स की टीम भी अस्पताल पहुंची। टीम ने डॉक्टरों, कर्मचारियों से चर्चा करने के साथ-साथ वहां की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।

जांच समिति ने बच्चों की मौत की वजह 'हाइपोथर्मिया' बताया
राज्य सरकार ने बच्चों की मौत के मामले में जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की मौत का मुख्य कारण हाइपोथर्मिया बताया गया है। इसके अलावा अस्पताल के लगभग हर तरह के उपकरण और व्यवस्था में खामियां बताई गई हैं।

अस्पताल के 71 में से 44 वॉर्मर खराब
नवजातों का तापमान 36.5 डिग्री तक होना चाहिए। नर्सरी में वॉर्मर के जरिये तापमान 28 से 32 डिग्री के बीच रखा जाता है। जिसके लिए अस्पताल में 71 वार्मर हैं, जिसमें से 44 खराब पड़े हैं। यही मशीन खराब होने से नर्सरी में तापमान गिर गया और बच्चे हाइपोथर्मिया के शिकार हुए। मंत्री शर्मा ने जनरल वार्ड के 90 बेड की तीन यूनिट, एनआईसीसीयू की 36 वार्ड की 3 यूनिट और पीआईसीयू की 30 वार्ड की 3 यूनिट के प्रस्ताव 7 दिन में भिजवाने के निर्देश दिए हैं।

ऑक्सीजन लाइन के लिए आया पैसा कहां खर्च हुआ, पता नहीं
शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने अस्पताल प्रबंधन के साथ बजट पर चर्चा की। इस दौरान पता चला कि हर खाते में पैसा पड़ा है। एनएचएम के खाते में 1 करोड़ रुपए हैं, जबकि भामाशाह और आरएमआरएस खाते में भी पैसा है। नवजात बच्चों के पीआईसीयू की सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन के लिए 22.80 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी, इसमें से 15 लाख रुपए सीएमएचओ ने अप्रैल में ही ट्रांसफर कर दिए। लेकिन, यह पैसा भी पूरा खर्च नहीं किया गया, सिर्फ 8.50 लाख रुपए का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) भेजा गया। सीएमएचओ ने जब पूरे बजट का विस्तृत ब्योरा रखा तो मंत्री ने पूछा कि बाकी पैसा कहां है, कहां खर्च किया तो कोई भी जवाब नहीं दे पाया।