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कानून बना जानकारी साझा करने के लिए सरकार विवश नहीं कर सकती : स्नोडन

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2018, 02:50 AM IST

Jaipur News - City Reporter

कानून बना जानकारी साझा करने के लिए सरकार विवश नहीं कर सकती : स्नोडन
City Reporter
गवर्नमेंट सिस्टम के अलावा अगर कोई आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन ले रहा है, तो वो सजा का हकदार है। कई इंडियन बैंक और टेलीकॉम कंपनियां लगातार ये काम कर रही हैं। अपनी किसी भी जानकारी को साझा करना या नहीं करना आप पर निर्भर है। सरकार इसके लिए लोगों को कानून बनाकर मजबूर नहीं कर सकती। ये बातें सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी के पूर्व कर्मचारी और व्हिसल ब्लोअर एडवर्ड जोसफ स्नोडन ने टॉक जर्नलिज्म में लाइव वीसी के जरिए होटल फेयरमॉन्ट में कहीं। इन्होंने जून 2013 में यूएस इंटेलिजेंस सर्विसेज की जानकारी लीक की थी। इस मौके पर ‘एन इंवेस्टर्स टेक ऑन बिजनेस मीडिया’ सेशन के दौरान एंजल इंवेस्टर श्वेता शालिनी ने कहा, व्यूज और ओपिनियन को कभी न्यूज ना मानें। खबरों का आधार तथ्य होना चाहिए। जर्नलिस्ट रचना सिंह ने फेक आधार कार्ड से जुड़ी अपनी खबरों के बारे में बताया। जर्नलिस्ट सुशांत सिंह ने बताया कि पाकिस्तानी आर्मी ने अफगानिस्तान बॉर्डर के करीब गुलाम खान किल्ले के स्थानीय निवासियों को घरों पर छत बनाने से मना कर रखा है। ताकि उन लोगों पर निगरानी रख सकें।

आधार की सूचना शेयर करने पर जुर्माना

मास्को के अज्ञात स्थान पर रह रहे एडवर्ड स्नोडन ने कहा, जर्नलिस्ट बिरादरी को मिलकर एक प्लेटफॉर्म पर आना चाहिए। इससे वे ज्यादा मजबूत बनेंगे। उन्होंने आधार कार्ड से जुड़ी खबर करने वाली जर्नलिस्ट रचना खैरा का जिक्र भी किया। गूगल के खिलाफ स्नोडन ने कहा, वो आधार से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक मंच पर शेयर कर मिसयूज नहीं कर सकता। युवा पीढ़ी को प्राइवेसी के हक को समझना चाहिए। भारत में आधार से जुड़ी पर्सनल इंफॉर्मेशन का खुलासा करने के लिए एजेंसियों पर जुर्माना होना चाहिए।

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गूगल हैंगआउट से टॉक जर्नलिज्म में कनेक्ट हुए स्नोडन

महिलाओं की अस्मिता पर हमले होते हैं

‘लाइटनिंग राउंड’ सेशन में दैनिक भास्कर के सीनियर जर्नलिस्ट आनंद चौधरी ने कहा, हम राम और कन्या की पूजा करते हैं। दूसरी ओर राम कन्या को प्रताड़ना दी जाती है, उन्हें डायन बताकर कमरे में कैद कर दिया जाता है। समाज की ये सच्चाई हमें सबसे ज्यादा डराती है। मगर फिर भी हम नहीं चेत रहे। इस तरह महिलाओं की अस्मिता पर हमले की खबरें हमें डराती हैं। राजस्थान में 105 महिलाओं को डायन बता कर गांव से बेदखल कर दिया गया। पुलिस और प्रशासन ने जानबूझ कर मुंह फेर लिया। वो हकीकत से भागते रहे। एेसे में जरूरी है फील्ड रिपोर्टिंग करें। खबरों से ऐसी कुप्रथाओं का मुकाबला किया जा सकता है।

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