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जयपुर हॉस्पिटल में आग से एसएमएस शिफ्ट हुए मरीज ने कुछ देर में दम तोड़ा

News - जयपुर हॉस्पिटल में रविवार रात लगी आग के बाद यहां से सवाई मानसिंह अस्पताल में शिफ्ट किए गए एक मरीज की अस्पताल...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:50 AM IST
जयपुर हॉस्पिटल में आग से एसएमएस शिफ्ट हुए मरीज ने कुछ देर में दम तोड़ा
जयपुर हॉस्पिटल में रविवार रात लगी आग के बाद यहां से सवाई मानसिंह अस्पताल में शिफ्ट किए गए एक मरीज की अस्पताल पहुंचते ही मौत हो गई। मृतक 52 वर्षीय अनिल शर्मा झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे का था तथा जयपुर हॉस्पिटल के आईसीयू में वेंटीलेटर पर था। अनिल के पिता शिवकुमार का कहना है कि अनिल को 11 अप्रैल को जयपुर हॉस्पिटल में पेट फूलने, सांस लेने में दिक्कत व बुखार होने पर भर्ती कराया था। उन्हें डायबिटीज व हार्ट की दिक्कत भी थी। हादसे के दौरान अन्य मरीजों के साथ उन्हें भी बाहर निकालकर ऑक्सीजन सिलेंडर सहित नीचे शिफ्ट किया गया। कुछ देर बाद एंबुलेंस में उन्हें एसएमएस में शिफ्ट किया गया जहां करीब 15 मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई।

दो भाइयों के बीच इकलौता पुत्र था

शिवकुमार शर्मा ने बताया कि हम दो भाइयों के बीच अनिल इकलौता बेटा था। दोनों परिवारों की जिम्मेदारी उसी पर थी। हम तो इस आस में जयपुर लाए थे कि ठीक होने पर फिर से परिवार में खुशियां लौटेंगी लेकिन अस्पताल में लगी आग ने हमारी सारी खुशियां छीन ली। पिता शिवकुमार को रो-रो कर बुरा हाल है।

वेंटीलेटर पर था मरीज : अस्पताल प्रबंधन

इधर, जयपुर हॉस्पिटल प्रबंधन ने बताया कि मरीज का डॉ. दिनेश शर्मा इलाज कर रहे थे। भर्ती के समय उन्हें वेंटीलेटर पर रखा था, लेकिन बाद में हटा लिया था। दो दिन से हालत गंभीर होने पर फिर से वेंटीलेटर पर लिया था। फेफड़े में संक्रमण था। रविवार सुबह ही परिजनों को गंभीर हालत के बारे में बता दिया था। पहले की हिस्ट्री के अनुसार दिमाग में 2 बार लकवा और हार्ट अटैक आ चुका था।

एसएमएस आते ही हो गई मौत : अधीक्षक

उधर, एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ.डी.एस.मीणा का कहना है कि मरीज के इलाज में हमारी तरफ से किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई। प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया गया। मरीज के पहले से ट्यूब भी लगी हुई थी। डायबिटीज, क्रोनिक हार्ट डिजीज से पीड़ित था। अस्पताल में पहुंचने के 10 से 15 मिनट बाद ही इलाज के दौरान मौत हो गई।

अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम चैकिंग अभियान चलाएगा निगम

नगर निगम अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम चेक करने का अभियान चलाएगा। अस्पतालों के लिए फायर एनओसी लेना अनिवार्य किया जाएगा। निगम के चारों फायर ऑफिसरों को जोनवार जिम्मेदारी दी जाएगी। फायरमैन हॉस्पिटल में आग लगने की संभावनाओं के बारे में पता कर हॉस्पिटल संचालकों को बताएगा। इन्हें दूर करने की समय सीमा तय की जाएगी। तय समय में एनओसी नहीं लेने पर कार्रवाई की जाएगी।

जयपुर अस्पताल में हुई अाग की घटना के बाद तय किया है कि शहर के सभी अस्पतालों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य किया जाएगा। अस्पतालों में बिजली के उपकरण, फर्नीचर, बैड, पर्दे लगे होने के साथ बडी संख्या में एसी भी लगे होते हैं। ऐसे में आग लगने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। अस्पतालों में फायर अधिकारी फायर फाइटिंग सिस्टम चेक करेंगे। सिस्टम कम पाए जाने पर अस्पताल के अनुपात के हिसाब से फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी ताकि सुरक्षा में कोताही नहीं बरती जाए। अभियान के बाद अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण में फायर फाइटिंग सिस्टम में कमी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बहुमंजिला अस्पतालों के फायर एक्जिट को निश्चित किया जाएगा।

फायर एनओसी : 6 माह में आए 200 आवेदन, 40 को ही एनओसी दी

नगर निगम ने छह माह में पहले ऑनलाइन फायर एनओसी लेने की व्यवस्था की थी। इसके बाद करीब 200 संस्थाओं ने आवेदन किया। इनमें से केवल 40 को ही एनओसी जारी की गई। जिनमें 3 अस्पताल भी हैं। चीफ फायर अधिकारी जलज घसिया का कहना है कि यूडी टैक्स जमा नहीं होने और नियमानुसार फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं होने पर एनओसी जारी नहीं की। सभी आवेदकों को नोटिस भेजे हैं। इसके बाद आवेदकों ने दुबारा फायर एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया।

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