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आंदोलन की चेतावनी के बीच केंद्र ने गुर्जरों पर दर्ज 11 केस वापस लिए

आरक्षण को लेकर गुर्जर एक बार फिर आंदोलित हैं। राज्य सरकार एवं गुर्जरों में खींचतान के बीच केंद्र सरकार ने उन सभी 11...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 04:05 AM IST
आरक्षण को लेकर गुर्जर एक बार फिर आंदोलित हैं। राज्य सरकार एवं गुर्जरों में खींचतान के बीच केंद्र सरकार ने उन सभी 11 प्रकरणों को विड्रो किए जाने की मंजूरी दे दी है, जिसमें पिछले आंदोलन के दौरान गुर्जरों ने न केवल जगह-जगह नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिए थे, बल्कि जमकर तोड़फोड़ की थी। ये मामले आईपीसी, पीडीपीपी एक्ट और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम सहित लोक सेवकों के कार्य में बाधा जैसी धाराओं में दर्ज थे। इनमें दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है।

मामलों की कोर्ट में ट्रायल चल रही है और प्रकरण विड्रो किए जाने से बड़ी संख्या में गुर्जर युवाओं को राहत मिल सकेगी।

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गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2007 और वर्ष 2008 में गुर्जर आंदोलन के दौरान दर्ज 11 प्रकरणों को विड्रो किए जाने की मंजूरी केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मांगी थी। इनमें जयपुर के बस्सी थाने में तीन, कोटपूतली में दो एवं चंदवाजी में एक प्रकरण दर्ज हुआ था। इसी तरह कोटा के विज्ञान नगर थाने में दो, अजमेर के नसीराबाद, सवाई माधोपुर के बामनवास एवं भरतपुर के हलैना थाने में एक-एक मामला दर्ज किया गया था। केंद्र सरकार ने इन 11 प्रकरणों को विड्रो किए जाने की मंजूरी के साथ 26 अन्य मामले वापस लिए जाने के लिए एनएचएआई की स्थानीय इकाई को अधिकृत कर दिया है।

राज्य में दर्ज मामलों की स्थिति

-754 कुल प्रकरण दर्ज

-364 प्रकरण में एफआर

-358 प्रकरण में चालान

-32 प्रकरण में अनुसंधान पेंडिंग

-213 प्रकरण सरकार ने विड्रो किए