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मॉर्निंग वॉक पर निकली थी महिला, गाय ने सींग मारकर गिराया...अब आईसीयू में

6 माह में ऐसा दूसरा हादसा

Bhaskar News Network| Last Modified - May 17, 2018, 04:25 AM IST

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मॉर्निंग वॉक पर निकली थी महिला, गाय ने सींग मारकर गिराया...अब आईसीयू में
6 माह में ऐसा दूसरा हादसा

21 नवंबर को विदेशी युवक को सांड ने मार डाला था

अब जेएलएन मार्ग से 200 मीटर दूर पॉश कॉलोनी में घटना

जयपुर | टोंक रोड जय जवान कॉलोनी द्वितीय में बुधवार सुबह सात बजे गाय ने घर से घूमने निकली महिला को टक्कर मारकर बुरी तरह से घायल कर दिया। महिला के सिर पर गंभीर चोट लगी है। अचेत अवस्था में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करवाया जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। देर रात तक महिला को होश नहीं आया था।

हादसे का शिकार इन्कम टैक्स कॉलोनी निवासी रजनी भावनानी (55) घर से कॉलोनी के पार्क में घूमने जाने के लिए निकली थी। जय जवान कॉलोनी द्वितीय में मृत्युंजय महादेव मंदिर के पास गाय ने रजनी भावनानी को सींग मार दिया। वे सिर के बल गिरीं। सिर से खून बहने लगा। देखने वालों ने गाय को भगाया। कर्नल आरके कपूर व न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक वंगानी ने निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। घटना के बाद कॉलोनी वालों ने कॉलोनी में चल रही 16 डेयरियों का विरोध किया। विरोध देखकर डेयरी संचालकों ने गायों को बाड़ों से निकाल दिया।

निगम का दावा :14 हजार आवारा पशुओं को पकड़ा

इधर नगर निगम का दावा है कि विदेशी नागरिक की माैत के बाद चलाए अभियान में शहर में 14 हजार से अधिक आवारा पशुओं को पकड़ा जा चुका है। निगम के दावों की बुधवार को हुई घटना ने पोल खोल दी। इंकम टैक्स कॉलोनी, जय जवान प्रथम व द्वितीय में खुले आम आवारा पशु घूम रहे हैं। क्षेत्र में करीब 20 डेयरियां घरों में संचालित हो रहे है।

सड़क पर महिला को गाय ने मारा, अस्पताल में नवजात को नहीं मिला वेंटिलेटर

निगम में सुनवाई नहीं होती

वार्ड 54 के पार्षद सर्वेश लोईवाल का कहना है कि क्षेत्र में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए निगम के पशु शाखा के अधिकारियों को कई बार शिकायतें कर चुके लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।

गाय तो वहीं बैठी है

प्रत्यक्षदर्शी सूरज शर्मा ने बताया- जिस गाय ने रजनी को सींग मारा, वह अब भी कॉलोनी के गेट नंबर-8 पर बैठी है। यह अवैध डेयरी वाले की गाय है

दुनिया में बदनाम हुए हम

इससे पहले 21 नवंबर 2017 को चौड़ा रास्ते में सांड की टक्कर से अर्जेंटीना िनवासी जॉन लाम्पे की मौत हो गई थी। इस मामले के बाद भी निगम शहर में खुले घूम रहे पशुओं व शहरी क्षेत्र में संचालित डेयरियों को लेकर सजगता नहीं दिखाई।

जेकेलॉन में भी जानलेवा लापरवाही

एक दिन पहले शुरू होती एनआईसीयू तो बच जाती नवजात की जान

हैल्थ िरपोर्टर|जयपुर

जेके लोन अस्पताल में 12 दिन पहले जिस एनआईसीयू का उद्घाटन किया गया, उसके शुरू नहीं होने की वजह से मंगलवार को एक नवजात की मौत हो गई। मामले को लेकर नाराज परिजनों ने बुधवार सुबह अस्पताल के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध जताया। वहीं मामले में अस्पताल प्रशासन भी इस बात के स्वीकार रहा है कि यदि बच्चे को वेंटीलेटर और आईसीयू मिल जाता तो संभव है कि उसकी जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, प्रशासन ने बुधवार सुबह से ही एनआईसीयू में मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया।

चौमूं निवासी अनीता नागर को मंगलवार को डिलीवरी हुई थी। बच्चे को बर्थ एस्फीजिया (जन्म के साथ नहीं रोना) डिजीज थी। बच्चे को पास के ही क्लीनिक में जेके लोन के डॉक्टर योगेश को दिखाया। डॉ. योगेश को बच्चे को तुरंत जेके लोन अस्पताल के लिए रैफर कर दिया। परिजन तुरंत बच्चे को जेके लोन अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर्स ने उसे वेंटिलेटर की जरूरत बताई। लेकिन उस समय अस्पताल में एक भी आईसीयू का बेड खाली नहीं था। ऐसे में बच्चे को एंबु बैग लगाया गया और उससे पंपिंग कर बचाने की कोशिश की गई। लेकिन देर रात उसकी मौत हो गई।

ऐसा क्यों हुआ : अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता ने बताया कि एनआईसीयू में जिस तरह की मशीनें हैं, उनके लिए नर्सिंग स्टाफ को ट्रेंड किया जाना जरूरी था। इसके लिए स्टाफ को ट्रेंड किया जा रहा था और इसी में इतने दिन लगे।

तो कम पड़ ही नहीं सकते वेंटिलेटर

जेके लोन में 201 बेड नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) शुरू किए हैं। यहां 64 एनआईसीयू और 32 सर्जिकल एनआईसीयू बेड हैं। ऐसे में किसी भी गंभीर मरीज को यहां आईसीयू की कमी नहीं हो सकती। एक दिन लेट शुरू होने की वजह से बच्चे को नहीं बचाया जा सका।

हमें भी इसका दुख है कि बच्चे को नहीं बचा सके। बच्चे को वेंटिलेटर की जरूरत थी लेकिन उस समय सभी वेंटिलेटर पर बच्चे थे। किसी को भी नहीं हटा सकते थे। एनआईसीयू के लिए स्टाफ ट्रेंड नहीं था, इसलिए दिक्कत हुई, अन्यथा उसे बचा सकते थे। -डॉ. अशोक गुप्ता, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल।

यहां भी नहीं शुरू हो सका डिजीटल एक्स-रे

जयपुरिया अस्पताल में भी दो दिन पहले डिजीटल एक्स-रे का उदघाटन किया गया। तीन दिन बाद भी इसकी मालाएं नहीं उतर सकी। न स्टाफ लगाया गया और ना ही किसी का एक्स-रे किया गया।

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