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सांगाेद में सीएम ने किया 242 करोड़ की 6 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास

कोटा/जयपुर| मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने गुरुवार को कोटा के सांगोद में जनसंवाद कार्यक्रम से पहले 242 करोड़ की 6 बड़ी...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 04:25 AM IST
कोटा/जयपुर| मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने गुरुवार को कोटा के सांगोद में जनसंवाद कार्यक्रम से पहले 242 करोड़ की 6 बड़ी परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि हाड़ौती क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सड़कों का जो जाल बिछा है, उसे जनता हमेशा याद रखेगी। अकेले सांगोद विधानसभा क्षेत्र में 105 ग्रामीण गौरव पथ बनाकर जनता को कीचड़ से मुक्ति दिलाई गई है। इनमें 28 करोड़ रुपए की लागत के 60 किसान गौरव पथ भी शामिल हैं। राजे ने कहा कि द्वितीय चरण में साल 2011 से जनवरी 2012 तक प्राप्त कृषि बिजली कनेक्शनों के आवेदनों के डिमाण्ड नोटिस 16 जून से 20 जून तक जारी किए जाएंगे और बरसात से पूर्व इनको कनेक्शन दे दिए जाएंगे।

सांगोद से झालावाड़ वाया दरा नई बस सेवा शुरू करने के निर्देश

राजे ने क्षेत्र के लोगों की मांग पर रोडवेज अधिकारियों को सांगोद से दरा होते हुए झालावाड़ के लिए रोडवेज की बस सेवा शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विगत सवा चार साल में सांगोद में उन्होंने जितना विकास देखा है, उतना पहले कभी नहीं हुआ।

चुनाव में पानी नहीं बने मुद‌्दा, इसलिए 30 शहर और एक करोड़ लोग पाइपलाइन से जोड़े

चुनावी साल में पानी का मुद्दा सरकार के लिए मुसीबत नहीं बने इसके लिए पानी से जुड़े प्रोजेक्ट को तेजी से निपटाया जा रहा है। पिछले 4 साल में सरकार 36 से ज्यादा छोटे और बड़े पेयजल प्रोजेक्ट पूरे कर चुकी है। इनसे 30 शहरों में एक करोड़ से ज्यादा लोग पेयजल सप्लाई प्रोजेक्ट से जुड़ गए हैं। बड़े प्रोजेक्ट में चंबल-भीलवाड़ा पेयजल परियोजना, नागौर लिफ्ट परियोजना, 2654 फ्लोराइड प्रभावित गांवों में 2575 आरओ प्लांट शामिल है। इन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए के लिए सरकार करीब 18 हजार करोड़ रु. खर्च चुकी है। साथ ही शहरों और गांवों में हैंडपंप रिपेयर करने के लिए अप्रैल से बड़ा अभियान शुरू किया जा चुका है। पिछले सप्ताह तक अभियान के जरिए शहरों में 3805 और ग्रामीण क्षेत्रों में 22553 हैंडपंपों की मरम्मत की जा चुकी है। हालांकि अभी करीब 20 हजार हैंडपंप खराब हैं।

ये 30 शहर पेयजल पाइपलाइन से जुड़े: करीब 30 से ज्यादा शहरों को सतही पेयजल सप्लाई प्रोजेक्ट से जोड़ा जा चुका है। इनमें जोधपुर में पीपाड़, बिलाड़ा, बाड़मेर में समदड़ी, पाली में तखतगढ़, जैतारण, जैसलमेर में पोकरण, जालौर में सांचोर और जालौर शहर, चूरू में राजगढ़ छापर एवं सुजानगढ़, झालावाड़ में भवानी मंडी एवं सुनेल, नागौर में मुडवा, कुचेरा, टोंक में देवली, उनियारा, जयपुर में किशनगढ़, रेनवाल और जोबनेर, भीलवाड़ा, अंता, मारवाड़, झुंझुनू, टोंक, खेतड़ी, मंडावा, बगड़, गोठड़ा के अलावा 8051 गांव और ढाणियों की एक करोड़ से ज्यादा आबादी को पेयजल सप्लाई से जोड़ा जा चुका है। इन पर अब तक करीब 18 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसमें चंबल-भीलवाड़ा परियोजना पर 1713 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस परियोजना से यहां के 2 कस्बों और 205 गांवों तक पाइपलाइन से पीने का पानी पहुंचा गया। नागौर में पानी के संकट को दूर करने के लिए 2938 करोड़ रुपए की नागौर लिफ्ट परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना से डेगाणा, डीडवाणा, मकराणा, लाडनू और कुचामन साढ़े तीन लाख शहरी और ढाई लाख से ज्यादा ग्रामीण आबादी को पेयजल सप्लाई से जोड़ा जा चुका है। इनमें जोधपुर में 1157 करोड़ रुपए की लागत से 8 पेयजल परियोजनाएं पूरी की गईं जिससे 11 लाख से ज्यादा लोगों पेयजल पाइपलाइन से जोड़े गए। बूंदी को चंबल-बूंदी प्रोजेक्ट से जोड़ा गया। अलवर, भिवाड़ी, बहरोड़, राजगढ़ और तिजारा में एनसीआरपीबी की सहायता से लाई जा रही पेयजल योजना सितंबर तक पूरी कर ली जाएगी।