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प्रदेश में 221 लोगों को किडनी, 32 को लिवर और 12 को हार्ट की जरूरत

4 साल में इतना आगे बढ़ा राजस्थान वर्ष 2014 से ही राजस्थान अंगदान में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 51 मरीजों को किडनी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 13, 2018, 04:26 AM IST

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    4 साल में इतना आगे बढ़ा राजस्थान

    वर्ष 2014 से ही राजस्थान अंगदान में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    51मरीजों को किडनी कैडेवर के माध्यम से दी गई।

    27मरीजों को लिवर दिया गया।

    16हार्ट डोनेट किए गए।

    265 लोगों को नई िजंदगी के िलए चािहएअंग...दान को आप भी आगे आएं

    हैल्थ रिपोर्टर | जयपुर

    पिछले चार साल में प्रदेश में अंगदान बढ़ा है लेकिन अभी इसमें ओर तेजी लानी होगी क्योंकि प्रदेश में 265 लोगों की जिंदगी अभी भी अंगदान पर ही निर्भर है। प्रदेश में वर्ष 2014 में जहां नेत्रदान के अलावा कोई अंगदान नहीं किया जा रहा था लेकिन अब किडनी, लिवर और हार्ट डोनेशन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अब तक 94 किडनी, लीवर और हार्ट के कैडेबर ट्रांसप्लांट हो चुके हैं।

    अंगदान की दर अभी भी बहुत कम है

    आर्गन डोनेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार और निजी संस्थान काफी काम कर रहे हैं और क्षेत्र में बेहतर काम हो रहा है।

    उम्मीद चिकित्सा विभाग का मानना है कि अगले तीन सालों में आर्गन डोनेशन दुगुने से भी अधिक पहुंच जाएगा। वेब रजिस्ट्री के मुताबिक अभी राजस्थान में 221 लोगों को किडनी, 32 को लिवर और 12 को हार्ट की जरूरत है। हालांकि, लिवर, किडनी और हार्ट मरीजों की तादाद ज्यादा है, अधिकांश लोग रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं।

    10% से भी कम आर्गन डोनेट किए जा रहे हैं अभी प्रदेश में।

    1 डोनर 8 लोगों की जान बचा सकता है

    1 डोनर से 8 लोगों को नई जिंदगी की राह दिखाई जा सकती है। डोनर की आंखें दो लोगों को प्लांट की जा सकती हैं। वहीं, किडनी, लिवर, पैन्क्रियाज, फेफड़े और हार्ट ट्रांसप्लांट से 6 लोगों का नया जीवन संभव है। स्किन भी डोनेट की जा सकती है।

    इतने समय सुरक्षित रह सकते हैं अंग

    हार्ट 4-6 घंटे

    फेफड़े 4-8 घंटे

    लिवर 12-15 घंटे

    पेनक्रियाज 12-24

    किडनी 24-48 घंटे

    अंग नहीं मिलने से हो जाती है 5 लाख की मौत हर साल

    शैल्बी हॉस्पिटल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलोजिस्ट डॉ. अमित गुप्ता के मुताबिक देशभर में वर्ष 2016 में 2.50 लाख लोगों की किडनी खराब हुई लेकिन डोनेशन केवल 2045 का हुआ।

    इसी तरह 80 हजार लोगों को लिवर की जरूरत थी लेकिन केवल 733 ही लिवर ही डोनेट हुए।

    वहीं 50 हजार से ज्यादा हार्ट के जरूरतमंद लोगों में से केवल 217 को ही हार्ट मिल सके।

    हर साल 5 लाख लोगों की मौत कोई ना कोई अंग नहीं मिलने की वजह से हो जाती है। 3 लाख लोगों को तो किडनी की जरूरत होती है। सबसे बड़ी परेशानी जागरूकता की कमी है। -डॉ. अंकुर गुप्ता, मेदांता, निम्स लिवर ट्रांसप्लांट

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