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क्लासें घटी, कॉन्ट्रेक्ट बेस पर ट्रेनर्स

जयपुर कथक केंद्र में सालों से कोई नियुक्ति नहीं हो रही, जबकि केंद्र में 8 पद अभी भी खाली हैं। 18 साल पहले 15 तकनीकी...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 04:30 AM IST
क्लासें घटी, कॉन्ट्रेक्ट बेस पर ट्रेनर्स
जयपुर कथक केंद्र में सालों से कोई नियुक्ति नहीं हो रही, जबकि केंद्र में 8 पद अभी भी खाली हैं। 18 साल पहले 15 तकनीकी अधिकारी कथक केंद्र को संभाला करते थे। अलग-अलग सालों में अधिकारी तो रिटायर हुए पर उनकी जगह पर कोई नियुक्ति नहीं हुई। केंद्र में अभी से 6 लोग ही परमानेंट अधिकारियों के तौर पर कार्यरत हैं। बाकी जगहों की पूर्ति प्लेसमेंट एजेंसी की ओर से कराई जा रही है। एजेंसी द्वारा ही कॉन्ट्रैक्ट बेस पर यंग ट्रेनर्स रखे जा रहे हैं। केंद्र को स्टाफ मुहैया कराने वाली एजेंसी ट्रेनर्स को अपने हिसाब से पैसे दे रही हैं। कुछ को डेली वेजेज के आधार पर रखा गया है। केंद्र में पहले 5 क्लासेस चला करती थीं जो अब सिमट कर 3 ही रह गई हैं। सूत्रों के अनुसार सन 2000 में कथक केंद्र में 15 अधिकारी हुआ करते थे और हर रोज 5 क्लास लगती थीं। 2000 के बाद से अब तक जितने भी कर्मचारी रिटायर हुए हैं उनके पदों पर नई नियुक्तियां नहीं हुई हैं। इनमें प्रशिक्षक से लेकर फोर्थ ग्रेड के स्टाफ के पद खाली हैं। 1994 के बाद से केंद्र में कोई भी नियुक्ति नहीं हुई।

रिटायरमेंट के बाद अधिकारियों को 900 रु. की पेंशन-

केंद्र में पूरी जिंदगी देने वाले अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन के नाम पर 900 से 1200 रुपए ही दिए जा रहे हैं। सन 2000 से अब तक केंद्र से जितने भी अधिकारी रिटायर हुए हैं उन्हें पेंशन के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में अधिकारियों की जिंदगी में कई नये संघर्ष पनप रहे हैं। स्व. चिरंजी लाल तंवर, प्रभु लाल और डॉ.शशि सांखला जैसे कथक गुरुओं का जीवन संघर्षमय रहा है।

2006 से 2018 तक मिलने वाली पेंशन राशि में सिर्फ 50 रुपए की बढ़ोतरी

2006 में केंद्र से बतौर प्रिंसिपल रिटायर हो चुकीं डॉ. शशि सांखला का कहना है, “मैंने कथक केन्द्र को 28 साल दिए। पहले 1400 रुपए मासिक वेतन मिलता था। सुबह 8 से 12 और शाम 4 से 8 बजे तक दो शिफ्ट में हमने कलाकार तैयार किए। रिटायरमेंट तक पहुंचते-पहुंचते 2500 रु. सैलरी हुई। रिटायरमेंट के बाद 11 सालों तक 850 रुपए प्रतिमाह सहायता राशि मिलती रही जिसे पिछले साल बढ़ाकर 900 रु. किया गया। सरकार द्वारा बनाई गई ऑटोनोमस संस्थाओं में इस बात का ख्याल नहीं रखा गया कि रिटायरमेंट के बाद इन कलाकारों का क्या होगा? आज के यंगस्टर्स तो स्मार्ट वर्क कर मोटी रकम कमा रहे हैं। आज फ्रेशर्स को जवाहर कला केंद्र में प्रोग्राम दिए जा रहे हैं, मुझे तो ये मंच भी सिर्फ एक बार ही मिला। जयपुर घराना दुनिया में मशहूर है पर जयपुर में ही कलाकारों की दुर्गति है।” वहीं कथक केंद्र की आचार्य रेखा ठाकर का कहना है, “ये दुख की बात है कि कथक केन्द्र के अधिकारियों के लिए पेंशन का प्रावधान नहीं है जिसके लिए हमने लिखित में सरकार से आवेदन किया है। डांसर या वादक के काम में शारीरिक श्रम है। 60-65 साल के बाद इंसान कितना नृत्य कर सकता है या कितना बजा सकता है? सरकारी नौकरी करते हुए हम अपनी एकेडमी भी नहीं खोल सकते, फिर अपना भविष्य कैसे सुरक्षित करें?

डॉ. शशि सांखला

केंद्र में क्लासेस चल रही हैं। लोग काम भी कर रहे हैं, बस परमानेंट बेस पर नहीं हैं। कुछ कॉन्ट्रेक्ट बेस पर हैं, कुछ रिटायर्ड अधिकारियों को रखा गया है। जयपुर कथक केंद्र के सेवा नियम अप्रूव नहीं हुए थे। अब सेवा नियम को सेक्रेटेरियट भेजा गया है। अप्रूव होते ही पदों पर नियुक्तियां होनी शुरू हो जाएंगी। सेवा नियम में कई नई चीजें जोड़ी गई हैं। इनमें पीजी डिग्री क्वालिफिकेशन, रेडियो या दूरदर्शन के अप्रूव्ड आर्टिस्ट हाेने जैसी योग्यताएं शामिल हैं। प्लेसमेंट एजेंसी के लिए भी सरकारी नियम हैं। ट्रेनर्स को पेमेंट भी एजेंसी द्वारा किया जाता है।  रेखा ठाकर, आचार्य, कथक केंद्र

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