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नेता को सदन में पहुंचाने के लिए जनता को भूले कांग्रेसी, कपड़े फटे, पार्षद बेसुध

6 माह बाद हुई निगम की साधारण सभा गुरुवार को बिना विपक्ष 11 घंटे चली। तीन प्रस्तावों पर चर्चा में 91 में 53 पार्षद ही अपनी...

Danik Bhaskar | Jul 13, 2018, 04:30 AM IST
6 माह बाद हुई निगम की साधारण सभा गुरुवार को बिना विपक्ष 11 घंटे चली। तीन प्रस्तावों पर चर्चा में 91 में 53 पार्षद ही अपनी बात रख पाए। कांग्रेसी पार्षद सदन का बहिष्कार करने के चलते चर्चा में शामिल नहीं हुए वहीं 3 भाजपाई पार्षदों ने अपनी बात नहीं रखी। ऐसा पहली बार है जब विपक्ष का एक भी सदस्य नहीं था। सदन से निष्कासित पार्षद धर्मसिंह सिंघानिया को सदन में लाने के प्रयास में पुलिस और कांग्रेसियों में झड़प भी हुई। उपनेता के कपड़े भी फटे, एक महिला पार्षद बेसुध हो गई। दूसरी ओर, बैठक में विपक्ष मौजूद न रहा हो, लेकिन सत्तादल के ही कई नाराज पार्षदों ने विपक्ष की भूमिका निभाई और मेयर व डोर टू डोर कंपनी पर घेरा। भाजपा पार्षद अनिल शर्मा, श्वेता शर्मा व मान पंडित ने भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों पर शिथिलता देने का मेयर पर आरोप लगाया। पार्षदों ने 6 माह बाद बोर्ड बैठक होने और अधिकारियों द्वारा दूसरे शहरों का दौरा करने का मामला भी उठाया।

भाजपाई पार्षदों के इन सवालों पर घिरे मेयर





बिना विपक्ष के 11 घंटे तक चली, बीवीजी कंपनी, भ्रष्टाचार और कार्यशैली पर अपनों ने मेयर को घेरा

विकास की बात करनी थी तब कांग्रेसी धरने पर थे

पिछली बोर्ड बैठक में कांग्रेसी पार्षद दल के उपनेता धर्मसिंह सिंघानिया को मेयर ने तीन बैठकों से निष्कासित कर दिया था। कांग्रेसियों को विरोध करना था तो उन्होंने प्री बोर्ड बैठक की प्लानिंग के तहत इसे ही मुद्दा बना डाला। मेयर अशोक लाहोटी ने दो वरिष्ठ पार्षद मंजू शर्मा व उमरदराज को बुलाकर कहा कि वे लिखित में निष्कासन रद्द करने का पत्र दे दें वे तो तत्काल प्रभाव से सिंघानिया का निष्कासन रद्द कर दिया जाएगा। लेकिन कांग्रेसी पार्षद लक्की मोरानी, मुकेश शर्मा, मोहन मीणा जबरन ही सिंघानियां को सदन के भीतर ले जाने पर अड़े रहे। नतीजा, कांग्रेसी अपने वार्डों की समस्याओं को सदन में नहीं रख सके। यानी उनके वार्डों में विकास की गति धीमी ही रहेगी और जनता परेशान रहेगी, यह तय है।

भाजपाई पार्षदों में आपस में हुई नोक झोंक

पार्षद रॉबिन सिंह पर पार्षद दिनेश कांवट को मजाक महंगा पड़ गया। पार्षद रॉबिन को बोलने का मौका दिया तो 12 बज रहे थे। इस पर कांवट ने मजाकिया अंदाज में तंज कसा। इश पर गुस्साए रॉबिन ने सिख और हिन्दू धर्म से जोड़ते हुए व्याख्या की। हमारे धर्म में कुर्बानी देना सिखाया है तो हम हकीकत बताना भी जानते हैं। बाद में कांवट ने कहा अगर आपको ठेस पहुंची है तो माफी मांगता हूं, मैं केवल मजाक कर रहा था।