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खराब मार्केटिंग ने 4 डेयरी संघों के बर्बाद कर दिए Rs.20 करोड़

राजस्थान को ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन के अफसरों की खराब मार्केटिंग से सरस घी की रेट कम करने से चार डेयरी जिला संघों को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 13, 2018, 04:30 AM IST

राजस्थान को ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन के अफसरों की खराब मार्केटिंग से सरस घी की रेट कम करने से चार डेयरी जिला संघों को 20 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। हालांकि, समय रहते अगर अफसर घी को मार्केट में खपा देते और डीलर्स पर सख्ती करते तो संघों को नुकसान से बचाया जा सकता था। रेट कम होने का फायदा अब सीधे डीलर्स और व्यापारी को मिलेगा। आधा-एक और पांच लीटर पैकिंग पर रेट कम होने का फायदा तो उपभोक्ताओं को होता, लेकिन अधिकारियों ने 15 टिन और बल्क में खरीदने वालों के लिए स्कीम लॉंच की गई।

रेट कम करने से सबसे ज्यादा घाटा जयपुर डेयरी को हुआ

जयपुर डेयरी - Rs.14 करोड़ का घाटा

अजमेर डेयरी - Rs.4.5 करोड़ का नुकसान अलवर डेयरी-250 मैट्रिक टन से 2 करोड़ घाटा

कोटा डेयरी- 100 मैट्रिक टन से Rs.64 लाख घाटा

अकेले जयपुर डेयरी के पास दिसंबर-जनवरी का 2050 मैट्रिक टन घी पड़ा है। अजमेर डेयरी के पास 700 मैट्रिक टन पड़ा हुआ है।

जिस माह के घी की दरें कम की गई है, उसका स्टॉक मेरे ज्वाइन करने से पहले का है। ज्वाइन करने के बाद भी िबक्री के िलए कई कदम उठाए गए। इसी कड़ी में पॉलिसी के तहत घी की रेट कम की गई है। तािक समय रहते हुए घी िबक सके -जाकिर हुसैन, एमडी, आरसीडीएफ

किस डेयरी के पास कितना है दिसंबर-जनवरी का घी

आरसीडीएफ के 21 जिला संघों में दिसंबर और जनवरी का आठ माह पुराना 3200 मैट्रिक टन घी चार डेयरी संघों के पास है। दिसंबर 2017 का कुल 1200 मैट्रिक टन घी पड़ा हुआ है। इसमें जयपुर डेयरी का 1 हजार और अजमेर डेयरी का 200 मैट्रिक टन घी शामिल है। वहीं जनवरी 2018 का कुल 2 हजार मैट्रिक टन पड़ा हुआ है। इसमें जयपुर डेयरी के पास 1050, अजमेर के पास 500, अलवर के पास 250 और कोटा डेयरी के पास 100 मैट्रिक टन पड़ा हुआ है।

स्टॉक क्लीयर करने की प्लािनंग करना ही भूल गए डेयरी अफसर

आरसीडीएफ की मार्केटिंग शाखा के अधिकारियों को घी के स्टॉक को देखते हुए बेचने की प्लानिंग करनी थी। इसके लिए डीलर्स को टारगेट दिया जाता। मार्केट के हिसाब से घी की रेट तय की जाती। टारगेट पूरा नहीं करने वाले डीलर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाती। शादी-समारोह और त्यौहार के समय डीलर्स की अपेक्षा उपभोक्ताओं को स्कीम दी जाती। लेकिन अधिकारियों ने इसके विपरीत काम किया। डीलर्स से मिल गए। डीलर्स को टारगेट नहीं दिया। घी नहीं बेचने पर कोई कार्रवाई नहीं की। बोर्ड से स्वीकृत नए डीलर्स की नियुक्ति पॉलिसी को खारिज करके घटिया पॉलिसी तैयार की गई। अधिकारी समय रहते मार्केट में घी की कीमतों का अनुमान नहीं लगा सके। मार्केट में घी की डिमांड थी, तब सरस घी अन्य ब्रांडों से करीब 1 हजार रुपए महंगा रहा।

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