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सतर्कता समिति गठन के तीन साल में तीन आदेश, अब मांगे कार्य और शक्तियों को लेकर सुझाव

उचित मूल्य की दुकानों पर होने वाली कालाबाजारी रोकने के मामले में प्रदेश का खाद्य विभाग ही गंभीर लापरवाही बरत रहा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 13, 2018, 04:30 AM IST

उचित मूल्य की दुकानों पर होने वाली कालाबाजारी रोकने के मामले में प्रदेश का खाद्य विभाग ही गंभीर लापरवाही बरत रहा है। इन दुकानों की निगरानी के लिए बनाई जाने वाली सतर्कता समितियों के गठन को लेकर पिछले 3 साल में 3 आदेश जारी हो चुके हैं। अब विभाग ने उनके कार्यों और शक्तियों की अधिसूचना का प्रारूप जारी कर उस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब समितियों के गठन और उनके कार्यों और शक्तियों को लेकर तीन आदेश जारी हो गए तो अब इस प्रकार से सुझाव मांगने का क्या औचित्य है? विभाग ने राज्य, जिला, तहसील और राशन की दुकान पर सतर्कता समितियों के गठन के आदेश जारी कर रखे हैं। इतने आदेश जारी होने के बाद विभाग ने यह नहीं देखा कि अब तक कितनी राशन की दुकानों पर सतर्कता समितियों का गठन हो गया है। जहां गठन हुआ, क्या वहां मासिक रूप से बैठकें हो रही हैं। जहां नहीं हुआ है, तो क्यों नहीं हुआ है। प्रदेश में 25 हजार से अधिक राशन की दुकान से 4 करोड़ से अधिक उपभोक्ता जुड़े हुए हैं।

1. राज्यस्तरीय- खाद्य मंत्री की अध्यक्षता में गठित इस समिति में कुल 16 सदस्य हैं। सदस्य सचिव अतिरिक्त खाद्य आयुक्त हैं। समिति का कार्य खाद्य सुरक्षा के प्रावधानों की मॉनिटरिंग करना। जिला, तहसील, वार्ड, ग्रामीण इलाकों में बनी समितियों की बैठकों की कार्यवाही की समीक्षा। गंभीर प्रकरणों पर कार्रवाई के लिए केंद्र व राज्य सरकार को अभिशंषा । प्रत्येक तीन माह में कम से कम एक बैठक जरूरी।

2. जिला स्तरीय- जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित इस समिति में जिले के सभी सांसद -विधायक, जिलाप्रमुख, प्रधान, नगरपालिका, निगम-परिषद के अध्यक्ष, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, कलेक्टर से मनोनीत उपभोक्ता संगठन का प्रतिनिधि, 4 सामाजिक कार्यकर्ता व जिला रसद अधिकारी सदस्य होंगे।

3. तहसील स्तरीय- उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित इस समिति में पंचायत समिति प्रधान, तहसीलदार, स्थानीय निकाय के दो सदस्य, पंचायत समिति के दो सदस्य, विधायक, विकास अधिकारी, उपभोक्ता संगठन का प्रतिनिधि, चार सामाजिक कार्यकर्ता, प्रवर्तन अधिकारी या निरीक्षक सदस्य होंगे।

4. उचित मूल्य दुकान स्तरीय - शहरी क्षेत्रों में वार्ड पार्षद अध्यक्ष, दो सामाजिक कार्यकर्ता, दो उपभोक्ता और स्थानीय रिटायर अधिकारी-कर्मचारी इसके सदस्य होंगे। ग्रामीण क्षेत्र में सरपंच अध्यक्ष होंगे।

सतर्कता समितियों के 3 आदेश

7 दिसंबर 2015- जिला, तहसील और उचित मूल्य दुकान पर सतर्कता समिति के गठन और इनके कार्यों को लेकर आदेश जारी हुआ।

7 सितंबर 2017- फिर से जिला, तहसील और उचित मूल्य दुकान पर सतर्कता समितियों के गठन और उनके कार्यों को लेकर आदेश जारी किया।

23 मई 2018- इस दिन राज्यस्तरीय सतर्कता समितियों के गठन का एक परिपत्र जारी किया गया।

…और चौथी बार में मांगे सुझाव

9 जुलाई 2018- इस दिन राज्य, जिला, तहसील और उचित मूल्य दुकानों की सतर्कता समितियों के गठन का स्वरूप, कार्यक्षेत्र, शक्तियों और कार्यविधि की अधिसूचना का विस्तृत प्रारूप जारी किया गया। प्रारूप पर लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगे गए। ये सुझाव व आपत्तियां 25 जुलाई, 2018 तक खाद्य भवन के कमरा नंबर 7026 में जमा कराने को कहा गया।

राशन दुकानों पर निगरानी | चार तरह की सतर्कता समिति

विनोद मित्तल | जयपुर

उचित मूल्य की दुकानों पर होने वाली कालाबाजारी रोकने के मामले में प्रदेश का खाद्य विभाग ही गंभीर लापरवाही बरत रहा है। इन दुकानों की निगरानी के लिए बनाई जाने वाली सतर्कता समितियों के गठन को लेकर पिछले 3 साल में 3 आदेश जारी हो चुके हैं। अब विभाग ने उनके कार्यों और शक्तियों की अधिसूचना का प्रारूप जारी कर उस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब समितियों के गठन और उनके कार्यों और शक्तियों को लेकर तीन आदेश जारी हो गए तो अब इस प्रकार से सुझाव मांगने का क्या औचित्य है? विभाग ने राज्य, जिला, तहसील और राशन की दुकान पर सतर्कता समितियों के गठन के आदेश जारी कर रखे हैं। इतने आदेश जारी होने के बाद विभाग ने यह नहीं देखा कि अब तक कितनी राशन की दुकानों पर सतर्कता समितियों का गठन हो गया है। जहां गठन हुआ, क्या वहां मासिक रूप से बैठकें हो रही हैं। जहां नहीं हुआ है, तो क्यों नहीं हुआ है। प्रदेश में 25 हजार से अधिक राशन की दुकान से 4 करोड़ से अधिक उपभोक्ता जुड़े हुए हैं।

1. राज्यस्तरीय- खाद्य मंत्री की अध्यक्षता में गठित इस समिति में कुल 16 सदस्य हैं। सदस्य सचिव अतिरिक्त खाद्य आयुक्त हैं। समिति का कार्य खाद्य सुरक्षा के प्रावधानों की मॉनिटरिंग करना। जिला, तहसील, वार्ड, ग्रामीण इलाकों में बनी समितियों की बैठकों की कार्यवाही की समीक्षा। गंभीर प्रकरणों पर कार्रवाई के लिए केंद्र व राज्य सरकार को अभिशंषा । प्रत्येक तीन माह में कम से कम एक बैठक जरूरी।

2. जिला स्तरीय- जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित इस समिति में जिले के सभी सांसद -विधायक, जिलाप्रमुख, प्रधान, नगरपालिका, निगम-परिषद के अध्यक्ष, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, कलेक्टर से मनोनीत उपभोक्ता संगठन का प्रतिनिधि, 4 सामाजिक कार्यकर्ता व जिला रसद अधिकारी सदस्य होंगे।

3. तहसील स्तरीय- उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित इस समिति में पंचायत समिति प्रधान, तहसीलदार, स्थानीय निकाय के दो सदस्य, पंचायत समिति के दो सदस्य, विधायक, विकास अधिकारी, उपभोक्ता संगठन का प्रतिनिधि, चार सामाजिक कार्यकर्ता, प्रवर्तन अधिकारी या निरीक्षक सदस्य होंगे।

4. उचित मूल्य दुकान स्तरीय - शहरी क्षेत्रों में वार्ड पार्षद अध्यक्ष, दो सामाजिक कार्यकर्ता, दो उपभोक्ता और स्थानीय रिटायर अधिकारी-कर्मचारी इसके सदस्य होंगे। ग्रामीण क्षेत्र में सरपंच अध्यक्ष होंगे।

ये होंगे जिला, तहसील व उचित मूल्य सतर्कता समितियों के अधिकार

हर माह एक बार बैठक करना। पात्र लाभार्थी को खाद्य सुरक्षा से जोड़ना और अपात्र को हटाने का काम। समिति के सदस्य दुकान के रिकॉर्ड का कभी भी अवलोकन कर सकेंगे।

सतर्कता समितियों के गठन और कार्य-शक्तियों का प्रारूप विभाग की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है। इस पर आमजन से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन या खाद्य भवन में आपत्तियां व सुझाव 25 जुलाई तक जमा कराए जा सकते हैं। -अंजू राजपाल, उपायुक्त, एवं संयुक्त शासन सचिव, खाद्य विभाग

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