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राजस्थान में भाजपा के लिए राजपूत, ब्राह्मण और दलितों की नाराजगी को दूर करना बड़ी चुनौती, कांंग्रेस में अभी से टिकटों को लेकर लड़ाई

बीते शनिवार को अमरूदों के बाग में प्रदेश भर से जुटी करीब तीन लाख लोगों की भीड़ देखकर भाजपाइयों की आंखें चमकने लगी...

Danik Bhaskar | Jul 13, 2018, 04:30 AM IST
बीते शनिवार को अमरूदों के बाग में प्रदेश भर से जुटी करीब तीन लाख लोगों की भीड़ देखकर भाजपाइयों की आंखें चमकने लगी हंै। निराश कार्यकर्ता उम्मीद लगा रहा है कि चुनाव आते-आते भाजपा फिर से खड़ी हो जाएगी। राज्य में सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही भाजपा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली बड़ी राहत देने वाली रही है। इधर कांग्रेस भी आश्वस्त है कि राज्य में अगली सरकार कांग्रेस की ही होगी। हालांकि पिछली बार लोकसभा की सभी 25 सीटें भाजपा ने जीती थीं। जानकार कहते हैं कि इस बार भाजपा 18 से 20 सीटें तक जीत लेगी। लेकिन, प्रदेश सरकार चुनाव हार गई तो 10 लोकसभा सीटों तक का नुकसान हो सकता है। भाजपा को अगर नुकसान हुआ तो इसकी एक वजह राजपूत, ब्राह्मण और दलितों में खासकर मेघवालों की नाराजगी हो सकती है। राजपूत समाज ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी को इसका तोड़ निकालना ही होगा। अजमेर एवं अलवर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा में हार की भी एक बड़ी वजह यही मानी जा रही है।

इधर, राज्य में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जोड़-तोड़ में जुटी दिखती हैं। भाजपा ने अपने रूठे एवं मीणा समाज में पैठ रखने वाले डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की पार्टी में वापसी कराई है। मीणा सहित राजपा के तीन विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधायक घनश्याम तिवाड़ी के अलग पार्टी बनाने से भाजपा को नुकसान तय है। उधर, कांग्रेस ने नागौर में दो बार जिला प्रमुख रहे डॉ. सहदेव चौधरी की वापसी कराई है। साथ ही भाजपा से पूर्व मंत्री डॉ. हरिसिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया को भी पार्टी में लाए हैं। विधायक सोना देवी भी पिछले दिनों कांग्रेस में शामिल हो गईं। इधर, भाजपा को राज्य में कुछ लोकसभा सीटों का नुकसान भले ही दिखाई दे रहा हो, लेकिन मतदाता की नाराजगी मोदी से नहीं राज्य सरकार से है। गंगानगर के एपी सिंह कहते हैं कि हमारे यहां पाकिस्तान से सीमा लगती है। मोदी के रहते विश्वास है कि हमारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। जबकि राजधानी जयपुर के सज्जन कुमार कहते हैं कि मोदी का कोई विकल्प भी तो नहीं है।

साढ़े चार साल में क्या बदला

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर का जादू चला। 200 सीटों में से भाजपा ने 163 सीटें जीत कर रिकॉर्ड बनाया। कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई। इसकी बदौलत राज्यसभा की सभी 10 सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया। पहली बार राजस्थान से राज्यसभा में कांग्रेस का कोई सदस्य नहीं है। लोकसभा-2014 में इतिहास में पहली बार भाजपा सभी 25 सीटें जीत गई। कांग्रेस को राहत मिली विधानसभा की 4 सीटों पर उपचुनाव में, इसमें वह 3 पर जीती। लोकसभा की भी दो सीटें उसने उपचुनाव में जीत लीं।

भाजपा की चिंता

लोकसभा की एससी आरक्षित चारों सीटों गंगानगर, बीकानेर, भरतपुर एवं करौली-धौलपुर और एसटी आरक्षित बांसवाड़ा, दौसा एवं उदयपुर में भाजपा बड़े अंतर से जीती थी। लेकिन एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुई घटनाओं से दलितों का भाजपा से मोहभंग हुआ है।

मुश्किल सीटें : 2009 में सिर्फ बीकानेर, चूरू, झालावाड़ और जालोर सीटें मिली थीं। दौसा में निर्दलीय जीते और 20 सीटों पर कांग्रेस जीती थी। 2014 की लहर में भाजपा ने सभी सीटें जीत लीं। 2019 में गंगानगर, बाड़मेर, करौली-धौलपुर, भरतपुर, बांसवाड़ा, अलवर, अजमेर, सीकर, झुंझुनूं, टोंक-सवाई माधोपुर में कड़ी चुनौती मिलना तय है। अजमेर व अलवर सीटें भाजपा उपचुनाव में हार गई थी।

प्लस पॉइंट

राज्यसभा सांसद मदनलाल सैनी को अध्यक्ष बना दिया। इसके जरिए भाजपा ने माली वोटों को साधने की कोशिश की है, जो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वजह से कांग्रेस की तरफ झुक गए थे। गृह मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया का कहना है कि मोदी-जनसंवाद कार्यक्रम ने पार्टी में जोश भर दिया है। इसका फायदा आने वाले चुनाव में हमें जरूर मिलेगा। पार्टी लोकसभा में पहले जैसा प्रदर्शन करेगी।

10 सीटों पर कड़ी चुनौती

माली अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस को चुनौती

कांग्रेस की चिंता

कांग्रेस की कमान युवा सचिन पायलट के हाथों में है। लेकिन, गहलोत एवं पायलट में खींचतान जगजाहिर है। कांग्रेस ने बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए ‘मेरा बूथ-मेरा गौरव’ अभियान चलाया है। लेकिन इसमें टिकट की दावेदारी के नाम पर स्थानीय नेता शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। हाथापाई तक की घटनाएं हो गई हैं। राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे की मौजूदगी में जयपुर के शाहपुरा में राष्ट्रीय प्रवक्ता संदीप चौधरी केे कपड़े फाड़ दिए गए। सवाई माधोपुर में आईटी सेल के प्रमुख दानिश अबरार के साथ भी बदसलूकी की गई। जयपुर के किशनपोल में पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल ने स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा उठा दिया। कई क्षेत्रों में विवाद की स्थितियां देखने को मिलीं।

प्लस पॉइंट

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 46 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 34 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद लोकसभा में भाजपा का वोट प्रतिशत 10 फीसदी बढ़कर 56 पहुंच गया और कांग्रेस का वोट प्रतिशत 31 पर आ गया। लेकिन इसके बाद जिला पंचायत चुनाव में भाजपा को 47 प्रतिशत वोट मिले तो कांग्रेस को 45 प्रतिशत। यानी मोटे तौर पर अंतर दो प्रतिशत का रह गया।

गुटबाजी व हाथापाई

वोट प्रतिशत बढ़ा