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‘संघर्ष के बिना जीवन अधूरा’

Dainik Bhaskar

Aug 09, 2018, 04:30 AM IST

Jaipur News - सोशल रिपोर्टर. जयपुर | शहर में चल रहे चातुर्मास के दौरान धर्म ज्ञान का रसपान करने के लिए दिगंबर जैन समाज के श्रावकगण...

‘संघर्ष के बिना जीवन अधूरा’
सोशल रिपोर्टर. जयपुर | शहर में चल रहे चातुर्मास के दौरान धर्म ज्ञान का रसपान करने के लिए दिगंबर जैन समाज के श्रावकगण संतों की गंगा में गोते लगा कर जीवन के सफर का अनुभव बना रहे है। इसी कड़ी में जनकपुरी-ज्योति नगर दिगंबर जैन मंदिर में आर्यिका गौरवमती माताजी ने बुधवार सुबह स्वाध्याय सभा के में कहा कि जीवन एक माटी का पुतला है। जिसे एक न एक दिन ढहना ही है, लेकिन यह माटी का पुतला व्यर्थ न ढहे उसके लिए संघर्ष बहुत जरूरी है। जीवन में एकमात्र संघर्ष ही ऐसा शब्द है जिसे स्वयं करना होता है। उसे देखना और समझना होता है। जिस किसी भी प्राणी ने जीवन के संघर्ष का रसपान किया है वह व्यर्थ के मोह, माया के जाल से सदैव मुक्त रहा है। संघर्ष सभी तरह का होता है सदैव संघर्ष की अनुमोदना होनी ही चाहिए। यह संघर्ष ही है जो कर्मों का बंधन करते हैं। जैसे वेंटिलेटर पर पड़े मरीज को जीवन के लिए आक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है, उसी प्रकार जीवन को सरल और सफल बनाने के लिए संघर्ष की जरूरत होती है। संघर्ष बिन जीवन अधूरा है जो प्रत्येक प्राणी को करना चाहिए। यह एक एक्जाम की तरह ही होता है, बस इसमें स्वयं अंक देने होते हैं।

जीवन में त्याग वैराग्य को धारण करो - आर्यिका विमल प्रभा

गायत्री नगर, महारानी फार्म के श्रीआदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आर्यिका विमल प्रभा माताजी ने बुधवार को धर्मसभा में कहा कि भारत की वसुंधरा पर अनेक मानव जन्म लेते हैं और मरण को प्राप्त होते हैं। यह जन्म-मरण की शृंखला तब तक चलती रहेगी जब तक इस जीव को मुक्ति की प्राप्ति नहीं होगी। मुक्ति की प्राप्ति तब होगी जब आप संयम को धारण करके तपस्या करें। यदि तपस्या नहीं की तो मुक्ति भी नहीं मिलेगी। संसार भ्रमण जारी रहेगा। यदि संसार से छूटना है तो जीवन में त्याग और वैराग्य को धारण करना पड़ेगा।

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