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जेडीए सिफारिशें तौलने में लगा, सवालों में अधिकारी

जयपुर | पृथ्वीराज नगर स्थित बहुचर्चित गोल्यावास की 104 बीघा जमीन मामले में जेडीए फिर सवालों में है। जेडीए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 12, 2018, 04:35 AM IST

जयपुर | पृथ्वीराज नगर स्थित बहुचर्चित गोल्यावास की 104 बीघा जमीन मामले में जेडीए फिर सवालों में है। जेडीए ट्रिब्युनल के आदेशों की पालना में मामले की गंभीरता को जान नोटिस तामील नहीं करा पाया। संबंधित जोन उपायुक्त ने गंभीर और विवादित मामले पर पहले तो रुटीन तरह से नोटिस भिजवाए, फिर मामले में इतने ही दिन का नोटिस भिजवाने की फाइल प्रपोज कर दी। इससे पहले कि जेडीए कोई फैसला कर पाता, मामले में हाईकोर्ट से स्टे आ गया। बहरहाल संबंधित जोन उपायुक्त राकेश गुप्ता ने मामले में जवाब पेश कर जेडीए हक में फैसले की उम्मीद जताई है। जेडीसी वैभव गालरिया ने भी यही निर्देश देने की बात कही है।

दोषियों को दिया स्टे का समय : जेडीए से मिले इस अतिरिक्त समय के चलते एक काश्तकार ने ट्रिब्युनल के फैसला पर हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। पहली सुनवाई तक तो जेडीए इसमें तय ही नहीं कर पाया कि आखिर क्या करना है, जवाब क्या देना है। इसके बाद प्रशासन ने लापरवाही पर कार्रवाई की बात कही, लेकिन कर नहीं पाए। दूसरी बार वही कहानी दोहराई गई। पूरे हालात पर जेडीए अफसरों की भूमिका बार-बार सवालों में आ रही है।

प|ी से विवाद : विवाह पंजीकरण नहीं हुआ, चयन निरस्त न करने की अपील

जयपुर | हाईकोर्ट ने असिस्टेंट रेडियोग्राफर भर्ती-2018 में आवेदन करने वाले विवाहित प्रार्थी का प|ी से विवाद के कारण विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं बनने और इस कारण से उसे चयन से वंचित करने की संभावना के मामले में प्रमुख चिकित्सा सचिव, स्वास्थ्य निदेशक व अतिरिक्त चिकित्सा निदेशक से जवाब मांगा है। अदालत ने यह अंतरिम निर्देश प्रवीण कुमार की याचिका पर दिया। अधिवक्ता प्रेमचंद देवन्दा ने बताया कि प्रार्थी ने असिस्टेंट रेडियोग्राफर भर्ती में आवेदन किया था। जिसमें उसके दस्तावेज सत्यापन हो चुके हैं। भर्ती विज्ञापन के तहत सरकारी नौकरी के लिए विवाह पंजीकरण को जरूरी माना है। याचिका में कहा कि उसका विवाह वर्ष 2014 में हुआ था। तभी से उसका विवाद चल रहा है। प्रार्थी ने फैमिली कोर्ट में संबंधों की पुन: बहाली के लिए प्रार्थना पत्र भी दायर कर रखा है। ऐसे में विभाग को निर्देश दिया जाए कि वह विवाह पंजीकरण नहीं होने के आधार पर उसके चयन को निरस्त नहीं करें।

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