जयपुर

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विश्व गुरु हम तभी बनेंगे विद्वानों काे मान मिले...

City Reporter

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 04:35 AM IST
विश्व गुरु हम तभी बनेंगे विद्वानों काे मान मिले...
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देश के मंचाें पर कई दशाब्दियाें तक हास्य अाैर करुण रस की फुहार बिखेरने वाले कवि बंकट बिहारी पागल की याद में चैंबर भवन में कवि सम्मेलन अायाेजित हुआ। अध्यक्षता सत्यव्रत सामवेदी ने की। शायर लाेकेश कुमार सिंह साहिल, वीर रस के कवि अब्दुल गफ्फार अाैर समाज सेवी बबिता शर्मा भी माैजूद थे। सम्मेलन डाेमा साॅफ्ट लि अाैर जयपुर काव्य साधक के बैनर पर प्रशंसा अाैर प्रज्ञा श्रीवास्तव के संयाेजन में अायाेजित हुअा। सिटी भास्कर ने जुटाए कवियाें की रचनाअाें के अंश...

भारत र| के जैसा सम्मान मिले

उमेश उत्साही की रचना विश्व गुरु हम तभी बनेंगे विद्वानाें काे मान मिले। हर शहीद काे भारत र| के जैसा ही सम्मान मिले इस सम्मेलन का मुख्य अाकर्षण रही।

बेटी है ताे कल है

वरिष्ठ कवि किशाेर जी किशाेर ने अपनी रचना बेटियाें काे समर्पित की। बेटी है ताे उज्जवल कल है, ये रिश्ता सबसे काेमल है, बेटी पूजा की थाली में दीपक है, घर में जैसे गंगा जल है ..श्रीराधे

वाे बुद्धि बिहारी था

वरुण चतुर्वेदी ने अपनी रचना बंकट बिहारी पागल काे समर्पित की। बेशक रहा नाम का पागल, पर वाे बुद्धि बिहारी था, संचालन का बादशाह मंचाें का कुशल मदारी था।

हम दाे हमारे दाे

पी.के. मस्त की करुण रस से सराबाेर रचना थी जाे उन्हाेंने माता-पिता काे समर्पित की। हम दाे हमारे दाे, मां बाप काे बाहर फेंक दाे। पर जब-जब ये फार्मूला दाेहराया जायेगा, ताे चार का याेग ही अाएगा। मां-बाप काे फेंकने वाले एक दिन तेरा भी नंबर अाएगा।

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