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विमान में खाना ले जा सकते हैं तो थियेटर में क्या खतरा : हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि मल्टीप्लैक्स में बाहर से खाना ले जाना सुरक्षा के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 04:36 AM IST

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    बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि मल्टीप्लैक्स में बाहर से खाना ले जाना सुरक्षा के लिए खतरा कैसे है। कोर्ट ने कहा कि जब विमान में भी लोग घर का खाना ले जा सकते हैं ताे थियेटर में क्यों नहीं?

    महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर कहा था कि बाहर से खाना ले जाने की इजाजत देने से सुरक्षा संबंधी खतरे पैदा हाेंगे। मल्टीप्लैक्स की पाबंदी में सरकार कोई दखल नहीं देगी। जस्टिस रंजीत मोरे और अनुजा प्रभुदेसाई की बेंच ने सरकार से पूछा कि बाकी किसी सार्वजनिक स्थल पर घर से या कहीं और से खाना लेकर जाने पर रोक नहीं है। सरकार भी मानती है कि सिनेमा हॉल में बाहर से खाना ले जाने से रोकने संबंधी कोई कानून नहीं है। खाने से थियेटर में सुरक्षा को क्या खतरा होगा? मल्टीप्लैक्स एसोसिएशन ने कोर्ट को बताया कि थियेटर्स में पानी की सुविधा मुफ्त है। वहां बेचे जाने वाले सभी प्रकार के फूड और बेवरेज के दाम भी 20% तक घटा दिए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आपका काम फिल्म दिखाना है, खाना बेचना नहीं।





    कोर्ट ने कहा- महंगा जंक फूड खाने पर मजबूर करती है पाबंदी

    कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी। कहा- मल्टीप्लैक्स की तुलना रेस्टोरेंट से नहीं कर सकते। हम सिर्फ सुरक्षा के मुद्दे पर बात करेंगे, क्योंकि सरकार ने यही दलील दी है। मल्टीप्लैक्स में बिक रहे सामान की कीमत बहुत ज्यादा होती है। खाना लाने से रोककर आप परिवारों को महंगा जंक फूड खाने पर मजबूर करते हैं।

    राज्यमंत्री चव्हाण ने सदन से झूठ बोलाः मनसे

    राज्यमंत्री रवीन्द्र चव्हाण ने विधान परिषद में सिनेमागृहों में घर का बना खाना ले जाने पर पाबंदी नहीं है। इस प्रकार का झूठ बयान 13 जुलाई को दिया था। यह आरोप मनसे प्रवक्ता संदीप देशपांडे ने लगाया है। उन्होंने कहा, विधान परिषद में राज्यमंत्री चव्हाण ने जो बयान दिया था। 7 अगस्त को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में बिल्कुल उस बयान के विपरीत हलफनामा दाखिल किया है। इसके साथ ही सिनेमागृहों में घर का बना खाना ले जाने पर पाबंदी को सुरक्षा संबंधित कारणों से सही बताया है।

    इस मसले पर अगली सुनवाई 3 सितंबर को

    हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार और मल्टीप्लैक्स एसोसिएशन के साथ ही राज ठाकरे की पार्टी मनसे द्वारा सिनेमागृहों में की गई तोड़फोड़ की घटना पर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा,“ यह मामला अदालत में विचाराधीन है। लिहाजा किसी को भी कानून-व्यवस्था हाथ में लेने की जरूरत नहीं है। इस मुद्दे को पुलिस और प्रशासन संभालने में सक्षम है।” इस मसले पर अब अगली सुनवाई 3 सितंबर को होने वाली है।

    मल्टीप्लैक्स मालिक बोले- थियेटर में खाना लाना मौलिक अधिकार नहीं

    मल्टीप्लैक्स ओनर्स एसो. की ओर से एडवोकेट इकबाल ने दलील दी कि थियेटर में खाना ले जाना मौलिक हक नहीं है। मल्टीप्लैक्स में खाना बेचना कॉमर्शियल फैसला है। बाहर के खाने पर रोक सुरक्षा कारणों से लगाई है। आप एयरपोर्ट की बात कर रहे हैं, लेकिन वहां कड़े सुरक्षा इंतजाम होते हैं। दुनियाभर में थियेटर्स में खाने-पीने का सामान बाहर से लाने पर पाबंदी है। कल तो लोग मौलिक हकों की दुहाई देकर ताज होटल व बाकी रेस्टोरेंट्स में खुद की ड्रिंक ले जाने की मांग करेंगे।

    राजस्थान में भी यही हाल, बाजार से कई गुना ज्यादा कीमत वसूलते हैं

    जयपुर | जयपुर सहित प्रदेश के कई मल्टीप्लैक्स में खाने की चीजें ले जाना मना है। ऐसे में फिल्म देखने वालों को टिकट के अलावा फूड पर अलग से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। बाजार में मिलने वाली खाने की चीजों से इनकी कीमत कई गुना तक ज्यादा होती हैं। जो मिनरल वाटर बाजार में 20 रुपए में उपलब्ध है, वह 50 से 60 रुपए की कीमत पर बेचा जाता है। 5 से 10 रुपए में मिलने वाले पॉपकोर्न के 280 रुपए तक वसूले जाते हैं।

    अगली सुनवाई 3 सितंबर को

    याचिकाकर्ता जैनेंद्र बख्शी की ओर से एडवोकेट आदित्य प्रताप ने बेंच को बताया कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने थियेटर्स में बाहर से खाना ले जाने की इजाजत दी थी। राज्य सरकार की काउंसिल पूर्णिमा कांतहरिया ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर बेंच ने कहा, ‘हम देखना चाहते हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है।’ अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।

    हाईकोर्ट ने कहा-तुम्हारा काम सिनेमा दिखाना है, खाद्य पदार्थ बेचना नहीं

    सार्वजनिक स्थानों पर जब नागरिक घर का बना खाद्य पदार्थ लेकर जाते हैं, तब सुरक्षा का मुद्दा नहीं बनता है, फिर मल्टीप्लैक्स में घर का बना खाना ले जाने पर सुरक्षा संबंधित सवाल कैसे बन जाते हैं? बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और मल्टीप्लैक्स एसोसिएशन को फटकारते हुए कहा, ‘तुम्हारा काम सिनेमा दिखाना है, खाद्य पदार्थ बेचना नहीं!’ बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता जैनेंद्र बख्शी ने सिनेमागृहों में घर का खाना ले जाने पर पाबंदी के खिलाफ याचिका लगाई है।









    महाराष्ट्र के सिनेमागृहों खासकर मल्टीप्लैक्स में घर का बना खाद्य पदार्थ ले जाने पर पाबंदी है। इसके विरोध में राज ठाकरे के निर्देश पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पदाधिकारियों ने मुंबई, ठाणे सहित कई जिलों में आंदोलन के साथ साथ तोड़फोड़ की वारदात को अंजाम दिया। राज्य सरकार ने सिनेमागृहों में घर का बना खाद्य पदार्थ ले जाने पर सुरक्षा संबंधित कारण देते हुए पाबंदी को सही बताया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में एक हलफनामा भी दाखिल किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता जैनेंद्र बक्षी ने सिनेमागृहों में घर का खाना ले जाने पर लगाई गई पाबंदी के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की हुई है।

    सामग्री मल्टीप्लैक्स में

    कोक लार्ज 190 रु.

    650 मिली. चाय 120 रु.

    240 मिली. हॉट कॉफी 130 रु.

    समोसा (दो पीस) 110 रु.

    पॉपकोर्न लार्ज 198 रु.

    पॉपकोर्न सुपर लार्ज 280 रु.

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