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बयानों में मिलावट ; स्वास्थ्य विभाग को ही नहीं पता- यूज्ड खाद्य तेल की जांच हो रही है या नहीं

प्रदेश में पिछले डेढ़ साल से खाद्य पदार्थों के बनाने में इस्तेमाल हो रहे यूज्ड ऑयल की जांच बंद है। हैरानी तो यह है...

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2018, 04:36 AM IST
प्रदेश में पिछले डेढ़ साल से खाद्य पदार्थों के बनाने में इस्तेमाल हो रहे यूज्ड ऑयल की जांच बंद है। हैरानी तो यह है कि इसके लिए जिम्मेदार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अभी खुद ही कंफ्यूज है कि जांच बंद है या नहीं। खाद्य सुरक्षा आयुक्त का जिम्मा संभाल रहे विभाग के निदेशक वीके माथुर का कहना है कि जांच पूरे प्रदेश में लगातार हो रही है। वहीं दूसरी ओर अतिरिक्त निदेशक रवि माथुर ने कहा कि जांच करीब डेढ़ साल से बंद थी। सच यह है, कि एफएसएसएआई की ओर से 23 सितंबर 2016 को ही यूज्ड तेल की जांच बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए थे। जांच बंद करने का मुख्य कारण यह रहा कि यूज्ड ऑयल की जांच का कोई फिक्स पैरामीटर नहीं बना था। इसी को आधार बनाकर कुछ नामचीन खाद्य संस्थाएं एफएसएसएआई के द्वार चली गई थीं। नतीजा यह निकला कि यूज्ड तेल के सैम्पल भरने पर ही रोक लगा दी गई। हालांकि, ये जांच 1 जुलाई से फिर से शुरू कर दी गई है, लेकिन जांच के पैरामीटर तय नहीं होने से विभाग खुद ही उलझन में है। इस कारण यूज्ड ऑयल का बेड कॉलेस्ट्रॉल रोजाना लाखों लोगों के दिलों को बीमार कर रहा है। जयपुर में दस से ज्यादा नामचीन खाद्य कंपनियों और 5 हजार छोटी-बड़ी दुकानों में तलने वाले खाद्य पदार्थ बनाने में धड़ल्ले से यूज्ड ऑयल का उपयोग किया जा रहा है।

यूज्ड ऑयल की जांच करने में अभी भी पैरामीटर का फंसा पेच

यूज्ड ऑयल की जांच को लेकर अब भी स्वास्थ्य विभाग में पेच फंसा है। एक निजी कंपनी अपनी मशीन बेचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रही है जबकि उस मशीन को अभी तक एफएसएसएआई की ओर से हरी झंडी नहीं मिली है। वहीं जांच के पैरामीटर क्या होंगे? इसको लेकर भी अभी आला अधिकारी और कर्मचारियों में उलझन की स्थिति बनी हुई है।

यूज्ड ऑयल की जांच एक माह बाद भी शुरू नहीं हो सकी

यूज्ड ऑयल की जांच पिछले डेढ़ साल से बंद थी। जुलाई माह में शुरू होने के आदेश आ गए, लेकिन अभी तक जांच का एक भी सैम्पल नहीं लिया गया। इसकी मुख्य वजह यह है कि लैब में जांच करने वाले अभी भी यह तय नहीं कर पा रहे है कि जांच उस निजी कंपनी की मशीन से करें या फिर पहले की तरह मैनुअल। हालांकि, अतिरिक्त निदेशक रवि माथुर ने कहा है कि हम जल्द ही यूज्ड ऑयल की जांच शुरू कर देंगे।

इन बयानों के कारण हुआ कंफ्यूजन

जयपुर समेत प्रदेशभर में फ्रेश ऑयल और यूज्ड ऑयल दोनों की जांच लगातार की जा रही है। -वीके माथुर, निदेशक जन स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा कमिश्नर, जयपुर

आगे क्या- जांच शुरू होगी, तो भी ऐसी

यूज्ड ऑयल की जांच आखिरकार शुरू तो हुई है, लेकिन अब इस जांच का आधार ही संशय में चला गया है। क्योंकि विभागीय सूत्रों के अनुसार अब सैम्पल की जांच एक निजी कंपनी द्वारा निर्मित मशीन से की जाएगी। लेकिन न तो एफएसएसएआई ने इस मशीन को वेरिफाई किया है और न ही विभाग को इस मशीन की जांच रिपोर्ट पर भरोसा है।

यह सही है कि पिछले डेढ़ साल से यूज्ड ऑयल की जांच नहीं की जा रही है। लेकिन अब जल्द ही यूज्ड ऑयल की जांच पूरे प्रदेश में शुरू कर दी जाएगी। -रवि माथुर, अतिरिक्त निदेशक, ग्रामीण स्वास्थ्य, जयपुर

जानिए... इस कंफ्यूजन का हम पर क्या हो रहा है असर


एसएमएस अस्पताल के डॉक्टर एसएम शर्मा ने बताया कि यूज्ड ऑयल के उपयोग से ट्रांसफेटी एसिड इतना बढ़ जाता है कि उससे पूर्ण स्वस्थ इंसान को हार्ट अटैक और लकवा जैसी गंभीर बीमारियां हो जाती हैंै। जिनको हार्ट की शिकायत है उन्हें तो यूज्ड ऑयल बिलकुल ही उपयोग में नहीं लेना चाहिए। जयपुर शहर में हर रोज हार्ट संबंधी बीमारियों के करीब 500 मरीज सामने आ रहे है।


जिन लोगों को दिल की गंभीर बीमारी है उनके एक दिन के इलाज का खर्च करीब दो हजार रुपए है। हालांकि, कई लोग सरकारी योजना के तहत निशुल्क इसका इलाज करवाते हैं, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कम है। ज्यादातर मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ता है। दिल की बीमारियों में काम ली जाने वाली दवाएं भी काफी महंगी है।

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