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प्रेग्नेंसी में कितना महत्वपूर्ण है पोटेशियम को आहार में लेना

एक सामान्य महिला में पोटेशियम की दैनिक अनुशंसित खुराक प्रतिदिन 4700 मिलीग्राम है। गर्भावस्था में यह जरूरत बढ़ती...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 12, 2018, 04:40 AM IST

प्रेग्नेंसी में कितना महत्वपूर्ण है पोटेशियम को आहार में लेना
एक सामान्य महिला में पोटेशियम की दैनिक अनुशंसित खुराक प्रतिदिन 4700 मिलीग्राम है। गर्भावस्था में यह जरूरत बढ़ती नहीं है, लेकिन पोटेशियम युक्त भोजन का नियमित सेवन महत्वपूर्ण है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान ब्लडप्रेशर 50 फीसदी तक बढ़ता है।

गर्भावस्था में पोटेशियम के निम्न स्तर के कारण : उल्टी या दस्त अधिक होने के कारण पोटेशियम की कमी हो जाती है यूरिन को बढ़ाने एवं हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए लेने वाली दवाइयां भी पोटेशियम की कमी की वजह बनती हैं।

पोटेशियम की कमी के परिणाम : शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत कठिन होता है, क्योंकि उनमें से होने वाली ज्यादातर समस्याएं गर्भावस्था के दौरान आम होती हैं। गर्भवती महिला में पोटेशियम की कमी के कारण थकान, पानी की कमी के कारण पैरों और टखने में सूजन, ब्लड प्रेशर लो होने के कारण चक्कर आना, हाथ और पैरों की उंगलियों में अकड़न, मांसपेशियों में असामान्यन कमजोरी, कब्ज‍, मिजाज में बदलाव, गंभीर मामलों में असामान्य दिल की धड़कन और अवसाद, भ्रम या मतिभ्रम के रूप में सामने आ सकता है।

कमी को कैसे दूर करें : शुरुआती चरणों में जब पोटेशियम की कमी होती है, तब पोटेशियम युक्त आहार का सेवन करना पर्याप्त होगा। इसमें केले, टमाटर, पालक, मशरूम, मछली, एवोकैडो, आलू इत्यादि शामिल हैं। सामान्य कमी के लिए पोटेशियम युक्त सीरप, कैप्सूल और टेबलेट का सेवन करने की आवश्यकता हो सकती है। गंभीर मामलों में पोटेशियम की बॉटल लगाई जाती है।

जब गर्भावस्था के दौरान पोटेशियम का स्तर बढ़ जाए : गर्भावस्था में हाइपरक्लेमिया या उच्च पोटेशियम का स्तर खतरनाक समस्याओं का कारण बन सकता है। गंभीर मामलों में इसका परिणाम दिल की धड़कन को बंद करना और कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है। समय पर लक्षण पहचानकर उपचार करा सकते हैं।

न्यूट्रीशियन

डॉ. शालू कक्कड़

सीनियर कंसल्टेंट, गाइनिकोलॉजी एंड ओबेस्ट्रिक, जयपुर

एक सामान्य महिला में पोटेशियम की दैनिक अनुशंसित खुराक प्रतिदिन 4700 मिलीग्राम है। गर्भावस्था में यह जरूरत बढ़ती नहीं है, लेकिन पोटेशियम युक्त भोजन का नियमित सेवन महत्वपूर्ण है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान ब्लडप्रेशर 50 फीसदी तक बढ़ता है।

गर्भावस्था में पोटेशियम के निम्न स्तर के कारण : उल्टी या दस्त अधिक होने के कारण पोटेशियम की कमी हो जाती है यूरिन को बढ़ाने एवं हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए लेने वाली दवाइयां भी पोटेशियम की कमी की वजह बनती हैं।

पोटेशियम की कमी के परिणाम : शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत कठिन होता है, क्योंकि उनमें से होने वाली ज्यादातर समस्याएं गर्भावस्था के दौरान आम होती हैं। गर्भवती महिला में पोटेशियम की कमी के कारण थकान, पानी की कमी के कारण पैरों और टखने में सूजन, ब्लड प्रेशर लो होने के कारण चक्कर आना, हाथ और पैरों की उंगलियों में अकड़न, मांसपेशियों में असामान्यन कमजोरी, कब्ज‍, मिजाज में बदलाव, गंभीर मामलों में असामान्य दिल की धड़कन और अवसाद, भ्रम या मतिभ्रम के रूप में सामने आ सकता है।

कमी को कैसे दूर करें : शुरुआती चरणों में जब पोटेशियम की कमी होती है, तब पोटेशियम युक्त आहार का सेवन करना पर्याप्त होगा। इसमें केले, टमाटर, पालक, मशरूम, मछली, एवोकैडो, आलू इत्यादि शामिल हैं। सामान्य कमी के लिए पोटेशियम युक्त सीरप, कैप्सूल और टेबलेट का सेवन करने की आवश्यकता हो सकती है। गंभीर मामलों में पोटेशियम की बॉटल लगाई जाती है।

जब गर्भावस्था के दौरान पोटेशियम का स्तर बढ़ जाए : गर्भावस्था में हाइपरक्लेमिया या उच्च पोटेशियम का स्तर खतरनाक समस्याओं का कारण बन सकता है। गंभीर मामलों में इसका परिणाम दिल की धड़कन को बंद करना और कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है। समय पर लक्षण पहचानकर उपचार करा सकते हैं।

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