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पीयूसी सर्टिफिकेट के नवीनीकरण पर अब कोई जुर्माना नहीं देना पड़ेगा

हाईकोर्ट ने अवधि पार पीयूसी (पाेल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट के नवीनीकरण पर पेनल्टी वसूलने की स्कीम पर रोक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 04:40 AM IST

पीयूसी सर्टिफिकेट के नवीनीकरण पर अब कोई जुर्माना नहीं देना पड़ेगा
हाईकोर्ट ने अवधि पार पीयूसी (पाेल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट के नवीनीकरण पर पेनल्टी वसूलने की स्कीम पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को जुर्माना नहीं वसूलने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि हर पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांच केन्द्र खोले जाएं।

वहीं, अदालत ने मामले मुख्य सचिव, परिवहन आयुक्त व आरटीओ जयपुर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पीयूसी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता रहेगी। न्यायाधीश एम.एन.भंडारी व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश बुधवार को बीएल शर्मा की याचिका पर दिया। याचिका में कहा कि राज्य सरकार ने राजस्थान मोटर यान जांच प्रदूषण केन्द्र योजना (ऑनलाइन) 2017 शुरू की थी। इसके अनुसार पीयूसी सर्टिफिकेट को अनिवार्य किया था। इसमें प्रावधान किया था कि सर्टिफिकेट के अवधिपार होने पर इसके नवीनीकरण के लिए चौपहिया वाहनों पर 1000 रुपए व दो पहिया वाहनों पर 500 रुपए का प्रावधान किया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि राज्य सरकार को ऐसा करने का अधिकार नहीं है क्योंकि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 190 में जुर्माने का पहले से ही प्रावधान है। इसलिए यह प्रावधान गलत है। अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए पेनल्टी वसूलने की स्कीम पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा।

भास्कर ने उठाया था मुद्दा

राहत भरी 2 खबरें

प्रदेश में सिर्फ एक कॉमर्शियल कोर्ट है, अब 7 और खोलने की अधिसूचना जारी

जयपुर| व्यावसायिक विवादों को निपटाने के लिए प्रदेश में सात और नए कोर्ट खोली जाएंगी। विधि एवं विधिक कार्य विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। अब तक राज्य स्तर पर सिर्फ एक कोर्ट जयपुर में है और प्रदेशभर के व्यवसायियों को अपने विवादों के सिलसिले में जयपुर ही आना पड़ता था। वर्तमान में 1300 से ज्यादा विवाद पेंडिंग हैं। जयपुर में 950 प्रकरण पेंडिंग चल रहे हैं। इसलिए, राज्य सरकार ने जयपुर में 3 और कोर्ट खोलने का निर्णय किया। कोटा, उदयपुर, अजमेर और जोधपुर में एक-एक कोर्ट खुलेगा। बीकानेर एवं भरतपुर संभाग में 50 से भी कम केस पेंडिंग होने की वजह से वहां अदालतें नहीं खोली जा रही हैं। बीकानेर को जोधपुर और भरतपुर संभाग से संबंधित प्रकरणों का न्यायिक क्षेत्र जयपुर तय किया गया है।

2.व्यावसायिक विवादों का निपटारा जल्द... जयपुर में 3, कोटा, उदयपुर, अजमेर और जोधपुर में 1-1 कोर्ट को मंजूरी

10 महीने पहले पहली कॉमर्शियल कोर्ट :राजस्थान की एकमात्र कॉमर्शियल कोर्ट जयपुर में खोलने की अधिसूचना 13 अक्टूबर 2017 को जारी की गई थी। जयपुर में पेपरलेस ई-कोर्ट है। तक राज्य के सभी जिलों में मौजूद डीजे-एडीजे कोर्ट्स के पास कॉमर्शियल कोर्ट्स की न्यायिक शक्तियां थीं। उच्च न्यायालय के कॉमर्शियल डिवीजन एक करोड़ रुपए से अधिक के मामलों की सुनवाई करते थे यानी इससे कम धन संबंधी विवादों की सुनवाई कॉमर्शियल कोर्ट में हो रही थी।

विवाद एक करोड़ से घटाकर 3 लाख किया:केंद्र ने इसी सत्र में कॉमर्शियल कोर्ट्स, डिवीजन व अपीलीय हाईकोर्ट डिवीजन संशोधन विधेयक-2018 पारित किया। इसके तहत हाईकोर्ट में कॉमर्शियल डिवीजन और जिला न्यायालय में कॉमर्शियल कोर्ट की स्थापना की व्यवस्था की है। हाईकोर्ट के कॉमर्शियल डिवीजन 1 करोड़ से अधिक के मामलों की सुनवाई करते थे, लेकिन सीमा घटाकर 3 लाख रुपए कर दी गई है।

जयपुर

गुरुवार 09 अगस्त, 2018

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