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पब्लिक बोली- 15 रु. का पाॅपकॉर्न 200 में बेच रहे...

मल्टीप्लेक्स में बाहर का खाना लाने की मंजूरी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 04:40 AM IST

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    मल्टीप्लेक्स में बाहर का खाना लाने की मंजूरी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। महाराष्ट्र हाईकोर्ट भी बाहरी खाना ले जाने की मंजूरी देने की बात कह चुका है, ऐसे में सवाल उठता है कि जयपुर में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? इस मुद्दे पर भास्कर ने जयपुराइट्स और मल्टीप्लेक्स ओनर्स से बात की। पब्लिक का कहना है कि मल्टीप्लेक्स में खाने-पीने की चीजों के दाम 20 गुना तक ज्यादा वसूले जा रहे हैं। 15 रु. का पॉपकॉर्न मल्टीप्लेक्स में करीब 200 रु. का मिलता है। वहीं, मल्टीप्लेक्स ओनर्स का कहना है कि सिर्फ टिकट के पैसों से पूरा खर्च निकालना मुश्किल होता है, इसलिए फूड की कीमतें बढ़ाकर इसकी भरपाई की जाती है। भास्कर ने जाना कि आखिर मल्टीप्लेक्स ओनर्स को किस-किस चीज के कितने पैसे खर्च करने पड़ते हैं। पेश है विजय सिंह की रिपोर्ट ...

    मल्टीप्लेक्स के खर्च के बारे में...वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

    मनमानी वसूली पर क्या तर्क दे रहे हैं...

    18 लाख रु. से ज्यादा रेंट होता है हर महीने का, यदि 3 स्क्रीन का मल्टीप्लेक्स है और वह 25 से 30 हजार वर्ग फीट में फैला हुआ है

    30-35 लाख रु. प्रति माह खर्च आता है मेंटीनेंस और इलेक्ट्रिसिटी बिल आदि मिलाकर, जिसमें 18% अलग से टैक्स भी शामिल है

    3 लाख रु. के टिकट रोजाना बेचने हाेते हैं इसकी भरपाई के लिए, जो ओनर्स के मुताबिक संभव नहीं है

    किसी ने कहा- सुरक्षा को खतरा, तो कोई बोला- पेशेंट्स को अलाउ

    सिक्यूरिटी के लिहाज से ऐसा करना सही नहीं होगा। सीट पर बाकी लोगों को दिक्कत होगी। - राज बंसल, ईपी के ओनर

    मुनाफा कैसे कमाते हैं मल्टीप्लेक्स ओनर्स

    28% लग्जरी टैक्स के नाम पर लेती है सरकार मल्टीप्लेक्स में मूवी पर। टिकट प्राइस का 50% डिस्ट्रीब्यूटर्स को जाता है और बाकी 40% सिनेमाहॉल या मल्टीप्लेक्स का प्रॉफिट होता है, जो उनके ओनर्स -मैनेजर्स के अनुसार काफी नहीं होता है क्योंकि इस मार्जिन के आगे खर्चे कई गुना ज्यादा हैं। इन खर्चों को वे फूड स्टॉल्स से पूरा करने की कोशिश करते हैं।

    नियम के मुताबिक कौन ले सकता है एक्शन

    द सिनेमोटोग्राफ एक्ट 1952 की धारा 11 में लाइसेंस देने का अधिकार कलेक्टर को है। धारा 11 और 12 के अंतर्गत वह प्रतिबंध लगा सकता है। सेक्शन 16 बी के तहत सेंट्रल गवर्नमेंट पब्लिक सेफ्टी के लिए रूल बना सकती है। हाईकोर्ट जयपुर के एडवोकेट डॉ. योगेश कुमार गुप्ता के अनुसार मुद्दा उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत है और कार्यवाही हो सकती है।

    बुजुर्ग और पेशेंट्स के साथ यदि कोई इम्पॉर्टेंट रीजन देता है तो फूड अलाउ कर देते हैं। - अशोक तंवर, राजमंदिर

    मूवी टिकट + टैक्स+ अन्य फैसिलिटीज

    Movie Ticket

    250/-

    मुद्दा कोर्ट में है और इस स्टेज में कुछ नया नहीं कर सकते। - दीपक ऐशर, प्रेसीडेंट, मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया

    Price

    पॉपकॉर्न

    Popcorn

    250/-

    क्याें परेशान हो रही पब्लिक, ये भी जानें

    15 रुपए का पॉपकॉर्न 200 रु. में बेचते हैं। समोसे और कचौड़ी पर भी 10 गुना ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं। पानी भी एमआरपी पर नहीं देते हैं। - दीपा, डिजाइनर और टीचर

    मैं 75 साल की हूं। बीमारी के कारण बाहर का पानी भी मना है। पिछले दिनों जन्मदिन सेलिब्रेट करने बच्चे मूवी दिखाने ले गए। तब वहां तीन घंटे पानी भी नहीं पी पाई। - जमना देवी, हाउसवाइफ

    टिकट से तीन गुना खाने में खर्च करना पड़ता है। बच्चों के लिए मिल्क बॉटल भी अलाउड करने से सिक्योरिटी ने मना कर दिया। - पृथ्वी सिंह, अकाउंट ऑिफसर

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