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निरीक्षक नहीं, अब कम्प्यूटर लेगा ड्राइविंग लाइसेंस का ट्रायल

ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | जयपुर ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी होने वाली है। लाइसेंस के लिए ली...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 04:45 AM IST

निरीक्षक नहीं, अब कम्प्यूटर लेगा ड्राइविंग लाइसेंस का ट्रायल
ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | जयपुर

ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी होने वाली है। लाइसेंस के लिए ली जाने वाला ड्राइविंग ट्रायल अब परिवहन निरीक्षक नहीं, बल्कि कम्प्यूटर लेगा। राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम ने सड़क, ट्रैक, और ट्रायल कॉम्प्लेक्स का काम पूरा कर लिया है। जल्द ही यहां डिजिटल कम्प्यूटराइज्ड नेटवर्क भी लगाए जाने की संभावना है। 15 अगस्त तक इसे परिवहन विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा। एक महीने में कम्प्यूटराइजेशन करने के बाद सितंबर के अंतिम सप्ताह में इसे शुरू कर दिया जाएगा। जयपुर के जगतपुरा आरटीओ कार्यालय में प्रदेश का पहला ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक होगा।

ड्राइविंग लाइसेंस की यह होगी नई प्रक्रिया, लर्निंग लाइसेंस के बाद ऑनलाइन तारीख लेनी होगी

अब इस तरह मिलेगा ड्राइविंग लाइसेंस

लर्निंग लाइसेंस के बाद ऑनलाइन तारीख लेनी होगी। इसके बाद तय तारीख को जगतपुरा आरटीओ ऑफिस 45 मिनट पहले पहुंचना होगा। ट्रायल से पहले 20 मिनट की क्लास अटैंड करनी होगी। जगतपुरा आरटीओ ऑफिस में 5 ड्राइविंग ट्रैक बनाए गए हैं। एक दुपहिया और 4 ट्रैक होंगे चौपहिया लाइसेंस की ट्रायल के लिए।

टेस्ट के दौरान 4 प्रकार का ड्राइविंग टेस्ट देना होगा चालक को

1. टेस्ट में सभी ट्रैफिक रूल्स फॉलो करते हुए 8 का अंक बनाना होगा। 2. टेस्ट में अंग्रेजी के अक्षर H की तरह गाड़ी चलानी होगी।

3. टेस्ट में गाड़ी एंगुलर और पैरेलल तरीके से पार्क करके दिखानी होगी। 4. टेस्ट में गाड़ी चढ़ाते समय पीछे नहीं खिसके, यह दिखाना होगा। इन सभी ट्रायलों पर ट्रैक पर कैमरों की नजर और मॉनीटरिंग रहेगी। एनालिसिस के आधार पर कैमरे कंप्यूटर के माध्यम से फेल-पास का रिजल्ट देगा।

प्रदेश में 13 जगह बनने वाले ड्राइविंग ट्रक पर 23 करोड़ 66 लाख रुपए खर्च होंगे। ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक का कार्य अंतिम चरण में है और अब यहां पर परिवहन विभाग निजी फर्मों के जरिए कम्प्यूटराइजेशन शुरू करेगा। -शैलेन्द्र माथुर, जीएम आरएसआरडीसी

वर्तमान में यह है लाइसेंस जारी करने की स्थिति

अभी तक कार्यालय में अंग्रेजी में उल्टा-सीधा आठ बनाया जाता था। इसमें निरीक्षक मनमर्जी से जिसे चाहे फेल-पास कर देते थे। लेकिन आने वाले महीनों में जब ट्रायल ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर ली जाएगी तो यह संभव नहीं हो सकेगा।

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