जयपुर

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सड़कों पर गड्ढे और जानवर

हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बाद भी शहर की सड़कों पर गड्ढों व आवारा पशुओं के हालात नहीं सुधरने पर शुक्रवार को अफसरों...

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 04:45 AM IST
सड़कों पर गड्ढे और जानवर
हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बाद भी शहर की सड़कों पर गड्ढों व आवारा पशुओं के हालात नहीं सुधरने पर शुक्रवार को अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अंतिम मौका दिया जा रहा है। जिस गति से वे चल रहे हैं उस गति से तो यह कर पाना संभव नहीं है। यदि वे नहीं कर पाए तो जेल के अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं है। आए दिन खबरें आ रही हैं कि सड़कें बनते ही उखड़ जाती हैं और आवारा पशुओं को पकड़कर वापस छोड़ दिया जाता है। यह पैसे की बर्बादी है जिसे रोका जाए।

न्यायाधीश एमएन भंडारी ने यह टिप्पणी पिछली साल नवंबर महीने में सांड के सींग मारने से अर्जेंटीना के पर्यटक जुआन की मौत मामले में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में की। अदालत ने अफसरों से कहा कि इस मामले में उठाए गए सभी मुद्दों पर मैकेनिज्म विकसित किया जाए और इसकी रिपोर्ट तीन सप्ताह में पेश करें। साथ ही जो निर्देश अदालत ने इस मामले में दिए हैं उनका पालन करें ताकि हर शहर आवारा जानवरों व गड्ढों से मुक्त हो सके। अदालत ने मामले की सुनवाई 31 अगस्त को रखी है। सुनवाई के दौरान अदालती आदेश के पालन में एसीएस यूडीएच पीके गोयल, जेडीसी वैभव गैलारिया व नगर निगम कमिश्नर सुरेश कुमार ओला पेश हुए। नगर निगम की ओर से पालना रिपोर्ट भी पेश की गई जिसे रिकार्ड पर ले लिया।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई पर अदालत ने आदेश के बाद भी सड़कों पर गड्ढे होने व आवारा पशुओं के सड़कों पर घूमने को गंभीर मानते हुए इसे अदालती आदेश की अवमानना माना। साथ ही अदालती आदेश का पालन नहीं होने पर एसीएस यूडीएच, जेडीसी व नगर निगम जयपुर के कमिश्नर को अवमानना के नोटिस जारी कर उनसे पूछा था कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने दिसंबर 2017 में मामले में कहा था कि जयपुर शहर केटल फ्री होना चाहिए और सड़कों पर आवारा पशु घूमते हुए नहीं होने चाहिए। साथ ही जेडीए व नगर निगम जयपुर को कहा था कि वह सड़क पर केबल डालने के लिए गड्ढे खोदने वाली कंपनियों को पत्र जारी कर कहे कि पुराने गड्ढे भरने के बाद ही नए गड्ढे खोदे जाएं।

चुनावी साल में सड़कों के जख्म भरने को तीन गुना बजट पास

इंजीनियर पूरी सड़कों के काम कराने के िलए गड्ढे नहीं भर रहे

दोनों डायरेक्टर इंजीनियर बोले- हम तो हर मीटिंग में गड्ढे भरने के निर्देश दे रहे, रिपोर्ट भी मांगी है

जेडीए हर साल बजट खर्च करता है

600 करोड़ के आसपास सड़कों पर।

15 से 20 करोड़ बरसात के बाद सड़कों की मेंटिनेंस।

लापरवाही से शहर गड्ढों में गिरने को मजबूर

डायरेक्टर इंजीनियर एनसी माथुर और ललित शर्मा ने आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन पालना नहीं करने वालों पर एक्शन भी नहीं कर रहे। गड्ढे भरने के बजाए इंजीनियर पूरी सड़क की मेंटिनेंस के लिए सड़कों के और खराब होने का इंतजार कर रहे हैं।

फटकार- एसीएस यूडीएच, जेडीसी व निगम कमिश्नर बार-बार आदेश के बाद भी नहीं सुुधरे, अब अवमानना की कार्रवाई होगी


गंगा-जमुना ितराहा, मानसरोवर

मंत्री को दिखाने को दो बिछा दी डामर की पपड़ी

हाल ही मालवीय नगर प्रधान मार्ग अंडरपास का शिलान्यास हुआ। रैंप से उतरते ही महज 2 इंच डामर की परत उतरी हुई थी, लेकिन जेडीए इंजीनियरों ने डामर मिक्स मेटेरियल की गाड़ी मंगवा ली। मंत्री के रूट चार्ट पर गाड़ी घूमकर गड्ढे खोजती रही, जबकि जनता की शिकायतों के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई।

हकीकत - किसी भी एरिया से इंजीनियर ने रिपोर्ट नहीं दी, कोर्ट तक पहुंच रहे मामले

मालवीय नगर जैसी रोड कई माह से खराब, कहीं राइडिंग क्वालिटी खराब तो कहीं रोड छलनी

जेएलएन से अपेक्स सर्किल को जाने वाली रोड की हालत कई महीने से खराब है। दिल्ली रोड, टोंक, अजमेर रोड पर कई जगह गड्ढे और कमियां मिल चुकी हैं। सीकर रोड पर हालत खराब हैं तो बीटू बाईपास पर तो राइडिंग क्वालिटी को लेकर भारी शिकायतें हैं। बाईस गोदाम से गोपालपुरा रेलवे लाइन के समानांतर सड़क, कालवाड़ रोड, सी-जोन बाईपास पर भी इंजीनियरों की नजर नहीं गई।

दावा- हर मीटिंग में गड़्ढे भरने की बात होती है

सच- किसी लापरवाह पर कार्रवाई नहीं करते





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