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स्ट्रेचिंग से बढ़ेगा ब्लड सर्कुलेशन और नहीं होगी इंजरी

हैल्थ रिपोर्टर जयपुर जिम में एक्सरसाइज और स्पोर्ट्‌स में बेहतरीन परफॉर्मेंस देने के लिए वॉर्म अप...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 04:46 AM IST

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    हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



    जिम में एक्सरसाइज और स्पोर्ट्‌स में बेहतरीन परफॉर्मेंस देने के लिए वॉर्म अप और स्ट्रेचिंग करना जरूरी है। स्ट्रेचिंग से शरीर में लचीलापन आएगा और परफॉर्मेंस अच्छी रहेगी। इससे मसल्स वॉर्म होने से खिंचाव आने का खतरा कम रहता है। ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। इंजरी के चांस कम हो जाते हैं। एक्सरसाइज करने से पहले शरीर में फुर्ती आने के साथ साथ मेटाबॉलिक रेट बढ़ती है। इससे वजन आसानी से कम होता है।

    स्ट्रेचिंग करने से मिलेगी एनर्जी और मैटाबोलिक रेट बढ़ने से वजन कम करने में आसानी होगी, मसल्स में खिंचाव आने से ये मजबूत बनेगी

    कैट-काउ पोज में स्ट्रेचिंग

    वार्मअप के लिए कैट-काउ स्ट्रेचिंग सबसे ज्यादा फायदेमंद है। इसमें रीढ़ की हड्डी वॉर्म होने के साथ-साथ पूरे शरीर में फुर्ती आती है। 5 से 10 मिनट तक कैट और काउ पोज में सांस पर नियंत्रण रखते हुए एनिमल पोज बनाएं। कमर को सीधा रखते हुए सांस बाहर निकालें और कमर को मोड़ते हुए बाहर निकालें। टेल बोन से मूवमेंट करना चालू करें और उसे स्पाइन तक ले जाए। चेहरे को आगे पीछे की ओर मूव करें। यह स्ट्रेचिंग पूरी बॉडी को एक्टिव कर देती है।

    योग है स्ट्रेचिंग का बेहतर विकल्प'

    योग स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथ का अच्छा माध्यम है। सूर्य नमस्कार से लोअर बॉडी की स्ट्रेचिंग होती है। वहीं, हलासन में स्पाइनल से लेकर लोअर पार्ट तक स्ट्रेच होता है। ताड़ासन से स्पाइनल और अपर पार्ट कवर होता है। भुजंगासन से लोअर बेक की कोर मसल्स में स्ट्रेंथ बढ़ती है। इन्हें 20 से 30 सैकंड तक करें।

    डायनमिक स्ट्रेचिंग

    जॉइंटस के मूवमेंट के लिए डायनमिक स्ट्रेचिंग सबसे फायदेमंद है। इसकी शुरुआत गर्दन, शोल्डर, आर्म्स, रीढ़ की हड्डी, हिप जॉइंट, नी जॉइंट और एंकल को लचीला बनाने का काम करती है। वॉर्म अप में ब्लड सर्कुलेशन तेज हो जाता है। इससे इंजरी के चांस कम हो जाते हैं। ठंडे शरीर में बिना वॉर्म अप किए हुए एक्सरसाइज करने पर मसल्स में इंजरी हा़े सकती है। इसमें रनिंग, जंपिंग, रस्सी कूदना आदि शामिल कर सकते है।

    स्टेटिक स्ट्रेचिंग

    इस स्ट्रेचिंग में मसल्स को स्ट्रेच करके 30 सैकंड के लिए होल्ड करना होता है। एक्सरसाइज के दौरान जो मसल्स टाइट हो गई हैं, उन्हें नॉर्मल पोजिशन में लाने के लिए एक्सरसाइज के बाद इसे किया जाता है। इसमें मेजर मसल्स ग्रुप को शामिल करना चाहिए। शुरुआत गर्दन से करते हुए पिंडलियों तक ले जाना चाहिए।

    इंजरी के बाद 15 मिनट करें वॉर्म अप

    जॉइंट इंजरी होने पर मसल्स कमजोर और स्टिफ रहती है। इंजरी वाले लोगों के लिए स्ट्रेचिंग फायदेमंद है। मेजर प्रॉब्लम होने पर 15 मिनट तक उस पार्ट की स्ट्रेचिंग करें। राइट और लेफ्ट साइड दोनों तरफ एक समान स्ट्रेचिंग करें।

    -केशव भारद्धाज, फिटनेस एक्सपर्ट

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